कॉलेजों में प्रोफेसर्स के पद खाली, संविदा-गेस्ट के भरोसे शुरू होगी पढ़ाई, विशेषज्ञों की कमी बरकरार

शहर के तीनों प्रमुख सरकारी कॉलेजों में नई शिक्षा नीति लागू हो चुकी है। लेकिन इस साल भी संविदा और अतिथि प्रोफेसर्स के भरोसे पढ़ाई होगी। यहां संविदा और अतिथि प्रोफेसर्स रखे जाएंगे। सभी कॉलेजों में प्रोफेसर्स का वेतन भुगतान राज्य शासन स्तर से और जन भागीदारी समिति के माध्यम से होगा। नियमित प्रोफेसर्स नहीं होने का असर पढ़ाई व परीक्षा परिणाम में पड़ेगा है। विशेषज्ञ अध्यापक नहीं होने से फिर स्टूडेंट्स परेशान होंगे। जिले के सभी ब्लॉकों को मिलाकर करीब 12 शासकीय कॉलेज संचालित है। इसमें से कई कॉलेजों में नियमित प्राचार्यों की नियुक्ति नहीं हो सकी। कई कॉलेज सालों से प्रभारी प्राचार्य के भरोसे चल रहें है। कॉलेजों में नियमित प्राध्यापकों की मांग को लेकर छात्र संगठन अभाविप और एनएसयूआई ने कई बार मांग उठाई। मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक और कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा गया लेकिन नियमित प्राध्यापकों की नियुक्ति नहीं की गई। आक्रोशित होकर छात्र संगठनों ने कई बार पुतला दहन और विरोध प्रदर्शन भी किया लेकिन मांग पूरी नहीं हो सकी। दिग्विजय कॉलेज में सालों से खाली 39 पदों पर भर्ती नहीं की: प्रदेश के सबसे बड़े ऑटोनॉमस दिग्विजय कॉलेज में नई शिक्षा नीति पहले से लागू है। लेकिन यहां भी संविदा प्रोफेसर्स के भरोसे पढ़ाई होगी। लंबे समय से यहीं स्थिति बनी हुई है। यहां 95 प्रोफेसर्स के सेटअप के मुकाबले करीब 56 नियमित प्रोफेसर्स से काम लिया जा रहा जबकि 39 पद सालों से खाली पड़े है। हर साल यहां अतिथि प्रोफेसर्स के भरोसे पढ़ाई रही है। इस साल भी ऐसा ही होगा। दिग्विजय कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने बताया कॉलेज में प्राध्यापकों की कमी को लेकर शासन को अवगत कराया गया है। संविदा और अतिथि प्राध्यापक रखे जाएंगे जो नियमित क्लासेस लेंगे और नई शिक्षा नीति के अनुसार सेमेस्टर परीक्षा की तैयारी की जाएगी। कमला कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आलोक मिश्रा ने बताया शासन को जानकारी दी गई है। नियमित प्राध्यापकों की नियुक्ति शासन स्तर से होगी। संविदा और अतिथि प्राध्यापक रखेंगे, समय पर सिलेबस पूरा करने हर संभव प्रयास और वैकल्पिक इंतजाम कॉलेज प्रबंधन द्वारा किया जाएगा। शहर के साइंस कॉलेज की बात करें तो यहां 16 पद स्वीकृत है। इसके मुकाबले 10 प्रोफेसर है, जबकि 6 पद कई सालों से खाली पड़े है। यहां बीए, बीकॉम और बीएसी संकाय में 120-120 सीटें में एडमिशन दिया जाएगा। यहां भी इस सत्र में दूसरी प्रवेश सूची जारी कर एडमिशन दिया जा रहा है। यहां भी नई शिक्षा नीति लागू की जा चुकी है। इसमें कौशल विकास, रोजगार से जुड़े सिलेबस शामिल है। नई शिक्षा नीति लागू की गई लेकिन प्रोफेसर्स की नियुक्ति नहीं होने के कारण संविदा और अतिथि प्रोफेसर्स पर समय में कोर्स पूरा कराने की जिम्मेदारी रहेगी।

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