छ्त्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य तेलंगाना में DKSZCM कैडर के माओवादी दंपति ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। पुलिस के सामने हथियार डाल दिए हैं। इन दोनों पर करीब 25-25 लाख रुपए का इनाम घोषित है। CG में भी 20 से 22 सालों तक काम किया। अलग-अलग मुठभेड़ों में करीब 2 से 3 बार बचकर निकले थे। नक्सल संगठन में 40-45 साल गुजारने के बाद सरेंडर कर दिया है। दरअसल, माला संजीव उर्फ अशोक उर्फ लेंगु दादा (62) ने अपनी पत्नी पेरुगुल्ला पार्वती (50) के साथ सरेंडर किया है। ये दोनों सीनियर कैडर के हैं। 80-90 के दशक में लेंगु दादा देश के अलग-अलग 16 राज्यों में माओवाद विचारधारा का प्रचार-प्रसार करता था। सरेंडर से पहले नक्सलियों की चेतना नाट्य मंडली के प्रमुख पद की जिम्मेदारी थी। पत्नी भी इसी की सदस्य थी। दोनों ने कई बड़े लीडरों के साथ काम किया है। कौन है लेंगु दादा? लेंगु दादा 1980 में माओवाद संगठन से जुड़ा था। शुरुआत में पीपुल्स वॉर की जन नाट्य मंडली (जेएनएम) में शामिल हुआ था। 1986 तक इसमें काम किया। नक्सल विचारधारा को फैलाने और लोगों को आंदोलन के लिए आकर्षित करने के लिए भारत के लगभग 16 राज्यों में गया। वहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संचालन में दप्पू रमेश, दया, विद्या और दिवाकर जैसे सदस्यों के साथ काम किया। 1996 में सशस्त्र शाखा, विशेष रूप से मनुगुरु दलम में इसे शामिल किया गया। जहां डिवीजन कमेटी सदस्य (DVCM) के रूप में कार्य किया। बाद में एटूनगरम, पांडव और महादेवपुर दलम में काम किया। 2001 में राज्य समिति सदस्य (SCM) के रूप में पदोन्नत किया गया। 2003 से बस्तर में सक्रिय 2003 में दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति (DKSZCM) में भेज दिया गया। यहां चेतना नाट्य मंडली (CNM) के प्रभारी के रूप में काम किया। दंडकारण्य के विभिन्न क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों को नक्सल संगठन से जोड़ने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए। इससे पहले 2002 में जिले बॉर्डर इलाके में हुई गोलीबारी से बच निकला। वहीं 2005 में छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में भी हुई गोलीबारी से भी बच निकला था। जानिए कौन है महिला नक्सली? पार्वती भी DKSZCM और राज्य समिति सदस्य है। CNM की सांस्कृतिक उप-समिति की भी सदस्य है। ये 1992 में नल्लामाला क्षेत्र में नक्सल संगठन में शामिल हुई थी। 1998 में ACM के रूप में प्रमोशन किया गया। 2004 में AOBSZCM के विशाखापट्टनम जिले के अंतर्गत गलीकोंडा एरिया दलम में SCM के रूप में पदोन्नत कर भेजा गया था। जहां 2007 तक सक्रिय थी। उसी साल दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के पद पर पदोन्नत कर CG भेजा। लंबे समय तक छ्त्तीसगढ़ में काम की। साल 2017 में अबूझमाड़ इलाके में हुई मुठभेड़ में बचकर निकली थी। पहली पत्नी एनकाउंटर में मारी गईलेंगु दादा ने 1982 में करीमनगर जिले की पंजला सरोज उर्फ विद्या से पहली शादी की थी। 2002 में विद्या मुलुगु जिले में हुए एनकाउंटर में मारी गई। फिर 2007 में उसने पार्वती से शादी कर ली।
नक्सली दंपति ने डाले हथियार, 3 बार एनकाउंटर से बचे:देश के 16 राज्यों में नक्सल विचारधारा का किया प्रचार, DKSZCM कैडर तक पहुंचे, 45 साल बाद छोड़ी हिंसा

















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