बिलासपुर में डीपी विप्र कॉलेज को स्वायत्त शासी (ऑटोनॉमस) का दर्जा देने की मांग को लेकर छात्र-छात्राएं गुरुवार को अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय परिसर में भूख हड़ताल पर बैठ गए। इस दौरान 3 छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें सिम्स में भर्ती कराया गया है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना पर विरोध जताया। वहीं, कुलपति ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। प्राचार्य डॉ. शुक्ला ने स्पष्ट कहा कि यदि एक हफ्ते के अंदर विश्वविद्यालय कोई निर्णय नहीं लेता है, तो वे खुद छात्रों के साथ धरने पर बैठेंगे। ये है पूरा मामला दरअसल, हाई कोर्ट ने 8 मई को आदेश जारी कर विश्वविद्यालय को निर्देशित किया था कि डीपी विप्र महाविद्यालय को 30 दिनों के भीतर स्वायत्त शासी घोषित किया जाए। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सिंगल बेंच के आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी। लेकिन, डिवीजन बेंच ने भी यूनिवर्सिटी की अपील खारिज कर दी। जिसके बाद छात्रों ने इस संबंध में 2 जून को पहला ज्ञापन सौंपा था और फिर 11 जुलाई को दूसरा ज्ञापन देने के बाद गुरुवार (17 जुलाई) को भूख हड़ताल शुरू कर दी। पुलिस ने दी समझाइश, नहीं माने स्टूडेंट्स विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एकत्रित हुए और शांतिपूर्ण ढंग से भूख हड़ताल पर बैठ गए। प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार विभोर यादव, सीएसपी सरकंडा सिद्धार्थ बघेल एवं कोनी टीआई राहुल तिवारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और छात्रों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र कुलपति से प्रत्यक्ष वार्ता की मांग पर अड़े रहे। करीब 6 घंटे तक चली भूख हड़ताल के दौरान छात्राएं अनसुमी खांडे, मीनाक्षी वाकड़े और भावना साहू की तबीयत बिगड़ गई। भावना साहू की स्थिति गंभीर होने पर, एंबुलेंस न मिलने की स्थिति में पुलिस वाहन से उन्हें सिम्स अस्पताल पहुंचाया गया। एक सप्ताह में फैसला नहीं लिया तो कॉलेज प्रबंधन करेगा आंदोलन कॉलेज के मनीष मिश्रा ने बताया कि छात्रों की स्थिति को देखते हुए प्राचार्य डॉ. अंजू शुक्ला, उप प्राचार्य डॉ. एमएस तंबोली, मनीष तिवारी, नीतिश चौबे, प्रो. श्रीराम और किरण दुबे मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रतिनिधि मंडल के रूप में कुलपति आचार्य वाजपेयी से मुलाकात की और छात्रों को प्रदर्शन स्थगित करने की सलाह दी। छात्रों ने बताया कि प्राचार्य डॉ. शुक्ला ने स्पष्ट कहा कि यदि एक हफ्ते के अंदर विश्वविद्यालय कोई निर्णय नहीं लेता है, तो वे स्वयं, प्राध्यापकगण और छात्र धरने पर बैठेंगे। कुलपति ने कहा– हम कार्यपरिषद के अधीन, सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं डीपी विप्र कॉलेज मामले में कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने कहा कि मामला कॉलेज, यूजीसी और यूनिवर्सिटी के बीच का है। इसमें छात्रों को शांत रहना चाहिए। छात्र कॉलेज से ऑटोनॉमस संबंधी जानकारी लें, क्योंकि कॉलेज ने यूनिवर्सिटी की अधिसूचना के बिना स्वयं को ऑटोनॉमस घोषित कर लिया है और छात्रों की परीक्षा भी ले ली है। कॉलेज ही पहले हाईकोर्ट गया। इसलिए जब तक मामला हाईकोर्ट में था, तब तक यूनिवर्सिटी ऑटोनॉमस की घोषणा नहीं कर पाई। यूनिवर्सिटी न्यायालय और कार्यपरिषद से बाधित रही। इसके बाद कार्यपरिषद ने डबल बेंच में जाने को कहा। इसके बाद कॉलेज ने कंटेम्प्ट लगा दिया है।अब कार्यपरिषद सुप्रीम कोर्ट में जाने को कह रही है।
बिलासपुर में भूख-हड़ताल पर बैठी 3 छात्राओं की बिगड़ी तबीयत:डीपी कॉलेज को ऑटोनॉमस ग्रेडिंग देने का मामला; हाईकोर्ट के आदेश का भी असर नहीं

















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