विधानसभा:रायपुर, दुर्ग-भिलाई को मिलाकर स्टेट कैपिटल रीजन बनाने की नींव बनेगी

विधानसभा में विपक्ष की गैरमौजूदगी में शुक्रवार को बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की तर्ज पर छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र (एससीआर) विकास प्राधिकरण विधेयक पारित हो गया। रायपुर, दुर्ग-भिलाई और नया रायपुर अटल नगर में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण को देखते हुए इसके सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध विकास के लिए यह प्राधिकरण काम करेगा। यह प्राधिकरण राजधानी क्षेत्र के लिए योजना बनाना, निवेश को बढ़ावा देना, विभिन्न सरकारी और निजी संगठनों के बीच समन्वय तथा शहर के विस्तार को सही ढंग से नियंत्रित करने का काम करेगा। इसके अलावा सदन ने जनविश्वास विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ यह विधेयक पारित करने वाला मध्यप्रदेश के बाद देश का दूसरा राज्य बन गया है। यह विधेयक राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा। इसका उद्देश्य अंग्रेजों के समय से चले आ रहे कई ऐसे कानूनों में बदलाव करना है, जो नागरिकों और कारोबारियों द्वारा की गई छोटी-मोटी गलितयों भी आपराधिक कृत्य की श्रेणी में शामिल थीं। इसमें नगरीय प्रशासन विभाग, नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, छत्तीसगढ़ औद्योगिक संबंध अधिनियम, और छत्तीसगढ़ सहकारिता सोसायटी अधिनियम से संबंधित 8 अधिनियमों के 163 प्रावधानों में बदलाव किया गया है। इस विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह आम नागरिकों और कारोबारियों द्वारा किए गए छोटे-मोटे तकनीकी उल्लंघनों को आपराधिक श्रेणी से हटाकर जुर्माने (शास्ति) के दायरे में लाता है। इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी और अदालतों पर बोझ कम होगा। विधेयक में छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 के प्रावधान में भी संशोधन किया गया है। सार्वजनिक स्थल पर शराब के उपभोग के मामले में पहली बार सिर्फ जुर्माना और इसकी पुनरावृत्ति के मामले में जुर्माना और कारावास का प्रावधान किया गया है। वित्तीय नियंत्रण करेगा छत्तीसगढ़ ग्रोथ एंड स्टेबिलिटी फंड विधेयक
सदन में छत्तीसगढ़ ग्रोथ एंड स्टेबिलिटी फंड विधेयक 2025 पारित किया गया। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि राज्य के राजस्व, खनिज संपदा एवं अन्य युक्तिपूर्ण परिसंपत्तियों के कुशल प्रबंधन द्वारा राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता एवं सतत विकास के लिए यह विधेयक तैयार किया गया है। इस फंड का स्वामित्व राज्य शासन के पास होगा और इसका प्रबंधन इस अधिनियम तथा इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार किया जाएगा। यह फंड अलग कानूनी पहचान रखेगा और इसे राज्य के संचित निधि से अलग संचालित किया जाएगा। इसके माध्यम से राज्य के राजस्व में असामान्य वृद्धि या कमी का प्रबंधन करने और आर्थिक मंदी के समय वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। किराया बढ़ाने पर अब अधिकतम 1000 जुर्माना नगरीय प्रशासन विभाग के अधिनियम के तहत मकान मालिक द्वारा किराया वृद्धि की सूचना नहीं दिए जाने के मामले में आपराधिक मामला दर्ज किए जाने के प्रावधान को संशोधित कर अब अधिकतम 1,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसी तरह किसी सोसायटी द्वारा वार्षिक प्रतिवेदन दाखिल करने के मामले में विलंब की स्थिति में आपराधिक कार्रवाई के प्रावधान को संशोधित कर नाममात्र के आर्थिक दंड में बदल दिया गया है। विशेषकर महिला समूहों के मामलों में इसे और भी न्यूनतम रखा गया है। यदि कोई संस्था गलती से सहकारी शब्द का उपयोग कर लेती थी, तो उसे आपराधिक मुकदमे और दंड के प्रावधान के स्थान पर अब केवल प्रशासनिक आर्थिक दंड का प्रावधान है। ध्यानाकर्षण में मंत्री देवांगन ने की घोषणा
विधायक दल की समिति करेगी बोरे-बासी घोटाले की जांच एक मई 2023 को साइंस कॉलेज मैदान में हुए बोरे-बासी कार्यक्रम की जांच अब विधायक दल की समिति करेगी। विधानसभा सत्र के अंतिम दिन भाजपा विधायक राजेश मूणत ने बोरे-बासी कार्यक्रम में हुई अनियमितता पर ध्यानाकर्षण लगाया। इस पर चर्चा के दौरान मूणत ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने इवेंट को धंधा बना लिया था। मजदूरों को साइकिल, औजार के पैसों से बोरे-बासी खिलाने के नाम 8 करोड़ रुपए खर्च कर दिए।
कार्यक्रम में 16 हजार कुर्सियां लगाई गईं। अगर 40 हजार लोग भी आए तो 2 हजार की बोरे-बासी एक मजदूर पर खर्च की गई। मजदूरों के पैसों से 10 हजार का मोमेंटो 150 वीआईपी को दिया गया। यही नहीं, इसी मैदान पर अगले दो दिन तक अलग-​अलग विभागों के भी कार्यक्रम हुए। तीनों कार्यक्रम में जमकर खेल हुआ है। अंत में मंत्री ने सदन में घोषणा की कि वे इस मामले की विधायक दल की समिति से जांच करवाएंगे और इसमें लिप्त एक भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। भास्कर ने उठाया था मामला: 21 मई 2025 के अंक में भास्कर ने इस सरकारी जलसे में हुए घोटाले को उजागर किया था। हमने बताया था कि बोरे-बासी खिलाने के नाम पर 5 घंटे में 8.14 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। 1.10 करोड़ के डोम में 75 लाख का खाना खिलाया गया। विधानसभा में मंत्री ने भी माना कि फिजूलखर्ची हुई है। सदन में मंत्री ने माना-गड़बड़ी हुई थी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *