समाज बना सहारा…:जिन विधवाओं के पास आय नहीं उन्हें मासिक पेंशन, बच्चों को 1000 पॉकेट मनी

प्रदेश में माहेश्वरी सभा, समाज ऐसी महिलाओं को संबल प्रदान कर रहा है, जिनके पति के गुजर जाने के बाद आय का साधन नहीं है। साथ ही उन पर नाबालिग बच्चों के पालन और पढ़ाई का भार आन पड़ा। ऐसे में की मदद करते हुए सभा मासिक पेंशन और बच्चों को पॉकेट मनी सीधे उनके खाते में पहुंचा रहा है। इसके लिए सभा ने आर्थिक सेवा के संचालन के लिए छत्तीसगढ़ महेश निधि ट्रस्ट का गठन किया है, जिसके माध्यम से सालाना 49 लाख 62 हजार रुपए पेंशन और पॉकेटमनी सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जा रही हैं। सभा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश मुंधड़ा ने बताया कि पेंशन के साथ बच्चों की स्कूल की पूरी फीस भी समाज चुकाता है, लेकिन बच्चों को मासिक स्टेशनरी, किताब व अपने अन्य खर्चों पॉकेटमनी से वहन करने होते हैं। 3000 सदस्य देते हैं दान, मेडिकल इमरजेंसी में 20 हजार की मदद: निधि के पूर्व अध्यक्ष मनोज राठी बताते हैं कि इस ट्रस्ट को बड़ी संख्या में कॉरपस डोनेशन मिला। साथ ही समाज के ही लोग जन्मदिन, शादी की सालगिरह और स्मृति में लगातार दान करते रहते हैं। वैसे सामान्य दान और कॉरपस डोनेशन के ब्याज की राशि से ही लाभार्थियों को आरटीजीएस किया जाता है। इस ट्रस्ट की स्थापना साल 2005 में हुई। तब विधवा महिलाओं को 1 हजार रुपए मासिक देते थे। इसे बढ़ा कर अब 3500 रुपए कर दिया है। सभा के प्रचार-प्रसार प्रमुख ने बताया कि पूरे प्रदेश में सभा के लगभग 3 हजार मेंबर हैं, जो इस ट्रस्ट में लगातार अपनी इच्छानुसार राशि दान करते हैं। इस राशि का उपयोग सिर्फ मेडिकल, शिक्षा और पेंशन पर ही खर्च होता है। इसमें मेडिकल इमरजेंसी में तत्काल 20 हजार रुपए की राशि के साथ और भी आर्थिक मदद की जाती है। पति के निधन के बाद समाज बना सहारा, अब दूसरों को रोजगार दे रहीं मदद पाने वाली एक महिला ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि 3 साल पहले पति की अचानक मृत्यु हो गई। तब बेटा 10 साल का था। तब मेरे परिवार से भी आर्थिक मदद नहीं मिल सकी थी। इस कठिन हालात में समाज आगे आया। लगातार 2 साल तक समाज ने मदद की। इस दौरान सिलाई के माध्यम से रोजगार आगे बढ़ाने में समाज ने भी साथ दिया। आज खुद कई महिलाओं को मैं रोजगार दे रही हूं। जानकारी गोपनीय ताकि कोई हिकारत से न देखे
निधि के अध्यक्ष बालकिशन झंवर ने बताया कि आर्थिक मदद लेने वाले लाभार्थियों की जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रखी जाती है। यह इसलिए ताकि लोगों के बीच ये संदेश न जाए कि मदद के सहारे जीवन-यापन कर रही हैं। उन्हें हिकारत से न देखा जाए। इसीलिए किसी भी समारोह में या घर जाकर राशि देने के बजाए सीधे उनके खाते में हर माह के पहले सप्ताह में दे दी जाती है। लाभ के लिए महिला को एक फार्म भरना होगा और स्थानीय संगठन पदाधिकारी के पास देना होगा। स्थानीय संगठन उसकी जरूरत को वेरिफाई करते हुए ​सिफारिश करता है, जिसके बाद उन्हें हर माह की 7 तारीख को आरटीजीएस के माध्यम से पैसे दिए जाते हैं।

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