मौसम विभाग ने उत्तर छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिनों तक आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है। कल यानी 6 अगस्त से प्रदेश भर में गरज चमक के साथ बारिश हो सकती है। वहीं आज सुकमा, बस्तर, बीजापुर, सूरजपुर, बलरामपुर, सरगुजा, रायपुर सहित 17 जिलों में आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट है। प्रदेश में पिछले 48 घंटों में दुर्ग, रायपुर और बस्तर संभाग के कुछ स्थानों हल्की से मध्यम बारिश हुई है। बिलासपुर और सरगुजा संभाग के जिलों में कई जगहों पर मध्यम बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं बलरामपुर जिले के एक-दो स्थानों पर भारी बारिश हुई है। तापमान की बात करें तो सोमवार को प्रदेश में सबसे अधिक तापमान 34.2°C रायपुर में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.6°C पेण्ड्रा रोड में दर्ज किया गया। पिछले 7 दिनों में सिर्फ 42 MM बारिश 28 जुलाई तक 603 MM औसत बारिश प्रदेश में हुई थी। 29 जुलाई को यही आंकड़ा 611.5 MM और 30 जुलाई को 623 MM, 31 जुलाई को 627.1MM तक पहुंचा और एक अगस्त को 629.2 MM बारिश ही हुई। 2 अगस्त को बारिश का आंकड़ा सिर्फ 633 MM तक ही पहुंच पाया। हालांकि 3 अगस्त को बारिश के आंकड़े में कुछ बढ़ोत्तरी हुई है। लगभग 7MM बारिश प्रदेश में रिकॉर्ड की गई। जो पिछले चार दिनों से हो रही बारिश से बेहतर है। दरअसल, 28 और 29 जुलाई के बीच 8.5 MM, 29 और 30 जुलाई के बीच 11.5 MM, 30 से 31 जुलाई के बीच 4.1MM, 31 से 01 अगस्त के बीच 2MM बारिश हुई। वहीं 1 अगस्त से 2 अगस्त के बीच सिर्फ 4MM बारिश हुई। 02 से 03 अगस्त के बीच 7 MM बारिश हुई है। और 03 से 04 अगस्त के बीच लगभग 5MM पानी बरसा है। यानी 28 जुलाई से 04 अगस्त के बीच सिर्फ 42MM औसत बारिश ही दर्ज की गई। जून से जुलाई के बीच 623.1 MM मिलीमीटर बारिश प्रदेश में 1 जून से 30 जुलाई तक कुल 623.1 MM मिमी बारिश हुई। जबकि 558MM के करीब होनी चाहिए थी। यानी एक्चुअल से 12 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। वहीं सिर्फ जुलाई महीने की बात करें तो कुल 453.5 मिमी बारिश हुई है। पिछले 10 सालों में सिर्फ 2 बार ही जुलाई में बारिश का आंकड़ा 400MM पार हुआ है। 2023 में जुलाई माह में प्रदेश में सबसे ज्यादा 566.8MM पानी बरसा था। इससे पहले 2016 में 463.3MM पानी गिरा था। बलरामपुर में सबसे ज्यादा बारिश, बेमेतरा में सबसे कम प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 1050.1 मिमी वर्षा हुई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 326 मिमी पानी बरसा है। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ
उत्तर छत्तीसगढ़ में 5 दिन आंधी-तूफान का अलर्ट:रायपुर, सूरजपुर समेत 17 जिलों में अंधड़ चलेगी, बिजली गिरेगी; कल से प्रदेशभर में बरसात

















Leave a Reply