एमसीबी के सलाइन सैंपल जांच को भेजे:CGMSC से भेजी गई सलाइन से मरीजों को कंपकपी, प्रदेश में इसके इस्तेमाल पर रोक

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जनकपुर में सलाइन ड्रिप लगाने के बाद 7 मरीजों की हालत बिगड़ गई। मरीज पेट में दर्द, बुखार और दस्त की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे थे। जिन्हें इलाज के लिए भर्ती किया गया था। लेकिन, आईवी फ्लुड-आरएल और आईवी फ्लुड- डीएनएस चढ़ाए जाने के दौरान मरीजों को कंपकपी (सिवरिंग) होने लगी। 27 जुलाई से 7 अगस्त तक लगातार इस तरह के केस सामने आते रहे। इन 12 दिनों में सलाइन लगाने से 8 मरीजों ने कंपकपी की शिकायत की। डॉक्टर्स द्वारा भेजी गई रिपोर्ट की पड़ताल में इसका खुलासा हुआ कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कार्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) द्वारा भेजी गई दवाइयों के उपयोग के बाद मरीजों को कंपकपी हुई है। इस घटना के बाद ड्यूटी डॉक्टर ने 1 अगस्त को RL और 8 अगस्त को DNS के संबंध में सीजीएमएससी को जानकारी दी। शिकायत के बाद पूरे प्रदेश में इस बैच की दवाइयों के उपयोग पर अस्थाई रोक लगा दी गई है। साथ ही दवाइयों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं।
ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) जनकपुर की रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल में जिस आईवी फ्लुड- आरएल के लगाने से पांच मरीजों की सेहत बिगड़ी थी, वह विजन पेरेंटल प्राइवेट लिमिटेड नामक दवा कंपनी ने बनाई है। जो उत्तरप्रदेश की है। इसी तरह आईवी फ्लुड- डीएनएस लगाने से तीन अन्य मरीजों को सिवरिंग हाेने के मामले सामने आए हैं। जिसे महाराष्ट्र के नागपुर की दवा कंपनी हसीब फार्मास्युटिकल ने बनाई है। बीएमएओ जनकपुर की रिपोर्ट पर सीजीएमएएसी ने आईवी फ्लुड आरएल – आरएल (बैच नंबर – CG240705033) के उपयोग पर तत्काल रोक लगा दी है। विजन पेरेंटल से संबंधित दवा को बीते साल जुलाई 2024 में बनाया था, जिसकी एक्सपायरी जून 2027 है। हसीब फार्मास्युटिकल द्वारा बनाई गई DNS के बैच नंबर(CGF240383) भी संक्रमित संदिग्ध निकली हैं। केस- 1 : 8 साल की बच्ची रीता, 29 जुलाई को पेट में दर्द की समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती हुई थी। रिंगर लैक्टेट (RL) ( सीजीएमएसी से भेजी गई ) बोतल चढ़ाने पर बच्ची के शरीर में कंपकपी आने लगी।
केस – 2 : 27 साल की ममता 30 जुलाई को बुखार आने पर अस्पताल पहुंची। रिंगर लैक्टेट (RL) लगाने की वजह से इन्हें शरीर में कंपकपी आना शुरू हो गया। इसका स्पष्ट उल्लेख संदिग्ध प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया रिपोर्टिंग फार्म में है। केस – 3 : मरीज कुलसी बाई उम्र 50 साल। 30… जुलाई को दस्त की समस्या लेकर अस्पताल पहुंची थी। RL चढ़ाते ही शरीर में कंपकपी होने लगी। जनकपुर अस्पताल में आरएल की 2 हजार बोतल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जनकपुर को आईवी फ्लुड- RL और DNS की सप्लाई सितंबर 2024 में हुई थी। तब दवा कंपनी विजन पेरेंटल ने RL की 2 हजार और हसीब फार्मास्युटिकल ने DNS की 1 हजार बोतल यहां दी थीं। रोक के बाद अब RL की 1200 और DNS की 288 बोतल स्टॉक में हैं। सीजीएमएससी के रिकॉर्ड के मुताबिक विजन पेरेंटल और हसीब ने 2024-25 में 6 करोड़ 14 लाख रुपए का आईवी फ्लुड सप्लाई किया है। इसने RL की 23 लाख और हसीब ने DNS की 7.5 लाख बोतल सप्लाई की थीं। जिसमें से सीजीएमएससी के पास अब आईवी फ्लूड आरएल की 4 हजार और डीएनएस की 4.24 लाख बोतल ही बची हैं। एक्सपर्ट डॉ राकेश गुप्ता ने कहा – RL और DNS दवाइयों के उपयोग से शरीर में कंपकपी आ सकती है। 100 में से एक-दो केस में ऐसा हो सकता है। 7-8 मरीजों में कंपकपी की शिकायत है तो दवाइयां संदिग्ध अमानक हो सकती हैं। सैंपल जांच के लिए भेज रहे, रिपोर्ट 15 दिन में संभव
शिकायत के बाद संबंधित कंपनी के आईवी फ्लुड के उपयोग पर पूरे प्रदेश में अस्थाई रोक लगा दी गई है। जिस बैच से शिकायत है उस बैच के आईवी फ्लुड के सैंपल टेस्टिंग के लिए लैब में भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट 15 दिन बाद आ सकती है।
-रितेश अग्रवाल, एमडी, सीजीएमएएसी

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