रायपुर में 500 में बन रही महादेव-सट्टे की ID:भास्कर-रिपोर्टर ने ऑनलाइन खरीदी; EOW-ED की कार्रवाई के बीच सट्टा जारी, सोशल-मीडिया पर प्रचार, 24X7 दांव

महादेव सट्टा ऐप मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस के अलावा आर्थिक अपराध शाखा (EOW), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) भी जांच कर रही है। देशभर में छापे की कार्रवाई चल रही है। इसके बावजूद महादेव बुक सिंडिकेट बेखौफ होकर ऑनलाइन प्लेटफार्म पर सट्टा खिला रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए अपना प्रचार प्रसार कर 24X7 दांव लगवा रहे हैं। इस सिंडिकेट के युवक रायपुर के सुंदर नगर और महावीर नगर में पैनल लेकर दांव लगवा रहे हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने 500 रुपए में ऑनलाइन ID खरीदी और पैनल के अंदर खिलाए जाने वाले गेम्स और उनमें लगने वाले दांव की रिकॉर्डिंग की। अब विस्तार से पढ़िए महादेव बुक में कैसे दी जा रही आईडी? किन-किन गेम्स में लगवा रहे दांव ? किस-किस अकाउंट में ले रहे पैसे? कैसे होती है पूरी ऐप मॉनिटरिंग ? दुबई से मॉनिटरिंग, कोडवर्ड पर चल रहा पैनल सोशल मीडिया ऐप के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर आसानी से महादेव बुक सिंडिकेट के सदस्य सट्‌टा खेलने की ID बांट रहे हैं। ये ID देशभर के अलग-अलग राज्यों से भले चल रही हो, लेकिन इसकी पूरी मॉनिटरिंग दुबई से हो रही है। सिंडिकेट ने आईडी देने के लिए अलग-अलग कोडवर्ड अलग-अलग राज्यों में पैनल चलाने वालों को दिया है। रायपुर के युवक जो पैनल चला रहे है, उनका कोडवर्ड एक महीने की रिसर्च के बाद हाथ लगा। फोन पर बात नहीं करते सटोरिए भास्कर रिपोर्टर ने कोडवर्ड लगाकर पैनल चला रहे सिंडिकेट के सदस्यों से आईडी मांगी तो उन्होंने 20 मिनट में ID भी दे दी। महादेव बुक सिंडिकेट के सदस्य फोन पर बात नहीं करते, केवल चैटिंग में रिप्लाई देते है। रिप्लाई देने के लिए टेक्स्ट और वाइस मैसेज का इस्तेमाल करते हैं। पढ़िए किस तरह जनरेट हुई ID रिपोर्टर और महादेव बुक के कॉल सेंटर में बैठे सटोरिए की बातचीत स्टेप वाइज स्टेप-1: ID लेने का प्रोसेस समझा रिपोर्टर का मैसेज: ID चाहिए? जवाब: लोटस 365 का विज्ञापन देकर तीन साइट लिंक का मैसेज आया। किस तरह से प्रोसेस करना है, इसकी जानकारी भी। फिर बारकोड आया, जिसमें पैसे डालने थे। इसमें केवल सिंगल पेमेंट करना था, ऐसा निर्देश भी दिया गया। स्टेप-2: पैसे ट्रांसफर करने का प्रोसेस जवाब: रिपोर्टर ने सटोरिए के कहने पर 200 रुपए ट्रांसफर किया। 200 रुपए ट्रांसफर करते ही रिप्लाई आया कि ID जनरेट करने के लिए 500 रुपए जमा करना होगा। रिपोर्टर ने सटोरिए के कहने पर 500 रुपए जमा किए, तो पैसे चेक करने का प्रोसेस शुरू हुआ। स्टेप-3: ID-पासवर्ड मिलने का प्रोसेस जवाब: पैसे सिंडिकेट के खाते में पहुंचने का कंफर्मेशन आया, तो सटोरिए ने चैट में रुपए पहुंचने की जानकारी कंफर्म की। जानकारी कंफर्म करने के तीन मिनट बाद ही चैट में ID-पासवर्ड मिल गया। ID का इस्तेमाल कैसे करना है? इसके बारे में भी बताया गया। रिपोर्टर ने वेबसाइट में जाकर ID-पासवर्ड का इस्तेमाल किया, तो नया पासवर्ड क्रिएट करने के लिए कहा गया। ID के अंदर पैसा निकालने और डालने के लिए पासवर्ड जनरेट करने का प्रोसेस भी रिपोर्टर ने किया। इन अकाउंट्स में ले रहे पैसे महादेव बुक सिंडिकेट के सदस्यों ने भास्कर रिपोर्टर के लिए जो ID जनरेट की, इससे उन्होंने दूसरे राज्यों में बैठे गौरव, असरफ, गोविंद,पवन, राम के अकाउंट में पैसा भेजने का ऑप्शन दिया। इन अकाउंट्स में पैसे भेजते ही ID के अकाउंट में फंड आ गया और दांव लगाने की छूट दे दी गई। हर दिन लग रहे करोड़ों के दाव EOW की जांच में पता चला कि, सिंडिकेट के सदस्य हर महीने 450 करोड़ कमाते थे। सिंडिकेट के सदस्यों की यह कमाई लॉकडाउन के बाद की थी। सिंडिकेट में 4 हजार से ज्यादा लोग जुड़े थे। देशभर में इसकी 400 से ज्यादा ब्रांच संचालित हो रही थी। ये स्थिति महादेव सट्टा सिंडिकेट में हुई कार्रवाई से पहले का आंकड़ा है। वर्तमान में देश में कितनी ब्रांच संचालित है। इस सिंडिकेट से कितने लोग जुड़े है? सिंडिकेट को किसका संरक्षण है? इन सब सवालों का जवाब अफसरों के पास भी नहीं है। शेयर बाजार में निवेश किया पैसा ED-EOW के अलावा महादेव ऐप केस में SEBI भी जांच कर रही है। ED की चार्जशीट में खुलासा हुआ कि महादेव सट्टा ऐप प्रमोटर सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और शुभम सोनी ने सट्टेबाजी की काली कमाई को सफेद करने शेयर मार्केट में 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया है। इसी की जांच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) कर रही है। महादेव ऑनलाइन सट्टा खुलेआम चल रहा- भूपेश महादेव सट्‌टा जारी रहने पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए पिछले दिनों लिखा था कि लीजिए जी! ईडी/सीबीआई साहब, देखिए कि महादेव ऑनलाइन सट्टा खुले आम चल रहा है।राजनीतिक संरक्षण का आलम यह है कि फेसबुक पर विज्ञापन आने लगे। आज मेरे एक साथी की फेसबुक पर आया है यह विज्ञापन। तो अब कौन संरक्षण दे रहा है? केंद्रीय गृहमंत्री या छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री? कार्रवाई होगी कि किसी का फर्जी बयान डालने से ही होगी? पूर्व सीएम ने लिखा था, कि महादेव बुक के साथ अन्य सट्‌टा एप के विज्ञापन भी दिखाई दे रहे हैं। महादेव सट्टा के बारे में जानिए-

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