बस्तर संभाग के 4 जिलों में रेड, 3 में ऑरेंज-अलर्ट:रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग समेत बाकी जिलों में बिजली गिरेगी, 2 दिन ऐसा ही मौसम

बस्तर संभाग के जिलों में भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक आज बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा में रेड अलर्ट वहीं कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में ऑरेंज अलर्ट है। प्रदेश के बाकी सभी जिलों में बिजली गिरने, बादल गरजने को लेकर अलर्ट है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 2 दिन यही स्थिति रहेगी। मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। पिछले 24 घंटे में दुर्ग संभाग के जिलों में सबसे ज्यादा बारिश हुई। इस दौरान सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया। शंकर नगर सहित कई इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए।। बारिश के नए सिस्टम से गिरेगा पानी मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक विदर्भ और उसके आसपास लो प्रेशर एरिया बना हुआ है। वहीं उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा तट पर बारिश के नए सिस्टम के असर से बस्तर संभाग के जिलों में अगले 2 दिन भारी बारिश हो सकती है। रायपुर में गरज चमक के साथ बौछारें पड़ेंगी रायपुर में आज हल्के बाद छाए रहेंगे। इस दौरान हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। बादल और बारिश के कारण दिन का तापमान सामान्य के आसपास रहेगा। शनिवार-रविवार को रायपुर में हल्की बारिश हुई। पिछले 24 घंटे के दौरान करीब 15 मिमी पानी बरसा। दिन का तापमान भी 33.3 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। यह सामान्य से 2.8 डिग्री ज्यादा है। 1 जून से अब तक 740.6 मिमी बरसा पानी 1 जून से अब तक प्रदेश में 740.6 मिमी औसत बारिश हो चुकी है। बलरामपुर में सबसे ज्यादा 1141.4 मिमी पानी बरसा है। बेमेतरा में सबसे कम 364.1 मिमी बारिश हुई है। जून से जुलाई के बीच 623.1 MM मिमी बारिश प्रदेश में 1 जून से 30 जुलाई तक कुल 623.1 MM मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग ने 558MM के करीब बारिश का अनुमान लगाया था। यानी अनुमान से 12 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। वहीं सिर्फ जुलाई महीने की बात करें तो कुल 453.5 मिमी बारिश हुई है। पिछले 10 सालों में सिर्फ 2 बार ही जुलाई में बारिश का आंकड़ा 400MM पार हुआ है। 2023 में जुलाई माह में प्रदेश में सबसे ज्यादा 566.8MM पानी बरसा था। इससे पहले 2016 में 463.3MM पानी गिरा था जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ

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