बिलासपुर में कार्रवाई:ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पारित कर मकान तोड़ने की थी मांग

सरकारी जमीन पर बने जिस मकान में धर्मांतरण चल रहा था, उस पर चला प्रशासन का बुलडोजर बिलासपुर जिला प्रशासन और पुलिस की टीम ने ग्राम भरनी में सोमवार को सरकारी जमीन पर बने एक मकान को तोड़ दिया। आरोप है कि इस मकान में प्रार्थना सभाओं की आड़ में धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। शिकायत के बाद ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर कार्रवाई की गई। मौके पर परिवार के सदस्यों ने कार्रवाई का विरोध किया। लेकिन राजस्व और पुलिस बल के साथ अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर मोर्चा संभाला। इसके बाद मकान पर जेसीबी चलाई गई। पुलिस अब धर्म परिवर्तन से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है। दरअसल, सरकारी जमीन पर कब्जा कर ग्राम भरनी के सूर्यवंशी परिवार ने चर्च बना लिया था। यहां प्रार्थना सभा की आड़ में गांव की महिलाओं और बच्चों की भीड़ जुटने लगी थी। हिंदू संगठन के सदस्यों ने मकान में भीड़ एकत्रित कर नियमित धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि यहां जुटने वाले लोगों का ब्रेनवॉश कर कथित रूप से धर्म परिवर्तन शुरू हो गया था। इसके अलावा ग्राम पंचायत के पदाधिकारियों ने इसकी रैकी कराई तो धर्म परिवर्तन की बात सामने आई। संगठन के पदाधिकारियों और सरपंच ने मामले की शिकायत राजस्व व सकरी थाने में की। इसके बाद ग्राम पंचायत जनप्रतिनिधियों ने प्रस्ताव पारित कर इस चर्च को हटाने की मांग की। शिकायत की जांच के बाद राजस्व व पुलिस की टीम भरनी पहुंची। ग्रामीणों की शिकायत के बाद अवैध निर्माण धराशाई… सकरी तहसीलदार राहुल सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पारित सरकारी जमीन से मकान हटाने की मांग की थी। इसके बाद तोड़ने की कार्रवाई की है। संबंधित परिवार पर धर्म परिवर्तन कराने का भी आरोप है, जिसकी जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। उधर, सूर्यवंशी परिवार के एक सदस्य ने बताया कि यह मकान महावीर सूर्यवंशी ने बनाया था। उनका पूरा परिवार प्रभु यीशु की प्रार्थना करता था। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम में और भी मकान सरकारी जमीन पर बने हैं, लेकिन प्रशासन ने केवल उनका ही पक्का मकान तोड़ा। जशपुर: क्रिश्चियन किसान गाड़ते हैं निशान; किस धर्म का कौनसा खेत, ‘क्रॉस’ और ‘भागदांड’ चिन्ह से पहचान अमित पुरोहित की रिपोर्ट देशभर में धर्मांतरण के मामले रोज सामने आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्थिति ऐसी है कि आदिवासी परंपरा के स्वरूप को बदलकर खेती में इस तरह का हथकंडा अपनाया जा रहा है कि हम देखकर ही यह पहचान सकें कि यह खेत हिंदू या कन्वर्टेड क्रिश्चियन का है। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जशपुर जिले के ही रहने वाले हैं। केंद्रीय मंत्री व सांसद रहे स्व. दिलीप सिंह जुदेव जब तक जीवित रहे, आदिवासियों के धर्मांतरण के खिलाफ ऑपरेशन घर वापसी चलाकर हजारों कन्वर्टेड क्रिश्चियन्स की मूल धर्म में वापसी का दावा करते रहे। उसके बाद उनके पुत्र प्रबल प्रताप सिंह इस अभियान को चला रहे हैं। जिले में धर्मांतरण की ऐसी तस्वीर सामने आ रही है जिसे देखकर समझा जा सकता है कि धार्मिक प्रचार और ताकत दिखाने खेतों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां के आदिवासी धान फसल की रक्षा के लिए हर रक्षाबंधन को अपने खेतों में ‘भागडांड’ लगाते हैं। धर्मांतरित क्रिश्चियन हर 15 अगस्त को इसके मुकाबले खेतों में क्रॉस लगाते हैं। खेतों में धान फसल की रक्षा के लिए क्रॉस लगाने वाले कुनकुरी ब्लॉक के मोहाटोली सिंदरीमुंडा निवासी कोमल खेस बताते हैं कि उनके पूर्वज निशान चिन्ह लगाते आ रहे हैं। धान की फसल को कीटों से बचाने के लिए शुरू हुई परंपरा

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