रायगढ़ के केलो डैम में डूबने से सब इंजीनियर के बेटे की मौत हो गई। सुशांत प्रधान (24) की लाश बरामद कर ली गई है। सुशांत अपने दोस्तों अविनाश सारथी और पुलेंद्र सिंह के साथ कार से केलो डैम घूमने गया था। पुलेंद्र और अविनाश कार में ही बैठे थे और सुशांत डैम के पानी में उतर गया। काफी देर तक वापस नहीं आने पर दोस्तों ने उसकी खोजबीन की लेकिन सुशांत का कहीं पता नहीं चला। सोमवार को पुलिस ने लाश बरामद कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। बताया जा रहा है ज्यादा पानी होने के कारण सुशांत बाहर नहीं आ पाया। वहीं सुकमा जिला मुख्यालय का ओडिशा से संपर्क टूट गया है। लगातार बारिश से शबरी नदी उफान पर है। झापरा पुल के ऊपर से पानी बह रहा है। मार्ग बाधित होने से वाहनों के पहिए थम गए हैं। वहीं आज के मौसम की बात करें तो छत्तीसगढ़ में अगले 18 घंटे के लिए रायगढ़, जांजगीर-चांपा, बलौदा-बाजार, महासमुंद, सुकमा और बीजापुर इन 6 जिलों में भारी बारिश, बादल गरजने, बिजली गिरने और आंधी चलने का यलो अलर्ट है। बस्तर संभाग में एक-दो स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। डैम में डूबने से युवक की मौत की तस्वीरें- बंगाल में बने सिस्टम से 2-3 दिन बारिश बंगाल की खाड़ी, उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा तट पर लो प्रेशर एरिया बना हुआ है। जिसके असर से छत्तीसगढ़ अगले 2-3 दिन तक मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। तापमान की बात करें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 32.4°C बिलासपुर में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 19.6°C दुर्ग में दर्ज किया गया। 1 जून से अब तक 755.6 मिमी बरसा पानी 1 जून से अब तक प्रदेश में 755.6 मिमी औसत बारिश हो चुकी है। बलरामपुर में सबसे ज्यादा 1141.7 मिमी पानी बरसा है। बेमेतरा में सबसे कम 366.3 मिमी बारिश हुई है। जून से जुलाई के बीच 623.1 MM मिमी बारिश प्रदेश में 1 जून से 30 जुलाई तक कुल 623.1 MM मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग ने 558MM के करीब बारिश का अनुमान लगाया था। यानी अनुमान से 12 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। वहीं सिर्फ जुलाई महीने की बात करें तो कुल 453.5 मिमी बारिश हुई है। पिछले 10 सालों में सिर्फ 2 बार ही जुलाई में बारिश का आंकड़ा 400MM पार हुआ है। 2023 में जुलाई माह में प्रदेश में सबसे ज्यादा 566.8MM पानी बरसा था। इससे पहले 2016 में 463.3MM पानी गिरा था जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ
केलो डैम में डूबने से सब-इंजीनियर के बेटे की मौत:दोस्तों संग घूमने गया था; सुकमा का ओडिशा से संपर्क टूटा, 6 जिलों में अलर्ट

















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