पिता बिसरा राम ने दी सलाह-
मोतीलाल वोरा के जैसा बनना
‘यह जनसेवा का अवसर है। पूरी ईमानदारी और निष्ठा से जनता की सेवा करना। यह परिवार की मेहनत का फल है। कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा बहुत सरल और मिलनसार थे, तुम्हें भी वैसा ही बनना है।’ आईटीआई प्रशिक्षित गजेंद्र आज भी करते हैं किसानी दुर्ग शहर विधायक गजेंद्र यादव ने बुधवार को मंत्री पद की शपथ ली। आरएसएस के प्रांत संघ संचालक रहे पिता बिसरा राम यादव बोले- गजेंद्र बचपन से ही मेहनती और जुझारू रहे। घर में मुनगा का बड़ा पेड़ था। गजेंद्र खुद मुनगा तोड़ते और अहिवारा के बाजार में पसरा लगाकर बेचते। फिर गाय पाली और दूध बेचकर घर में मदद करने लगे। खेती-किसानी में भी उनकी गहरी रूचि रही है। अपनी कमाई से उन्होंने ग्राम माटरा में 13-14 एकड़ खेत खरीदा। इस पर आज भी खुद ही खेती कराते हैं। गजेंद्र बचपन में ही संघ से जुड़ गए। महावीर नगर में खुद शाखा भी लगाते। 15 जून 1978 को जन्मे गजेंद्र आरएसएस के प्रांत संघ संचालक रहे बिसरा राम यादव और कौशल्या बाई यादव के सुपुत्र हैं। प्रारंभिक शिक्षा मारवाड़ी विद्यालय दुर्ग से और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा शासकीय स्कूल दुर्ग से प्राप्त की। स्नातकोत्तर (एमए राजनीति शास्त्र) की डिग्री साइंस कॉलेज दुर्ग से ली। फिटर ट्रेड में आईटीआई प्रशिक्षित गजेंद्र पेशे से आज भी कृषक हैं। उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत भाजपा में वार्ड अध्यक्ष से हुई। मात्र 21 वर्ष की आयु में 1999 के दुर्ग नगर निगम चुनाव में पांच बार के पार्षद और पूर्व उपमहापौर खेमलाल सिन्हा को हराकर वे पार्षद बने। इससे उन्हें अविभाजित मध्यप्रदेश का सबसे कम उम्र का पार्षद होने का गौरव मिला। फिर संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभाते हुए विधायक और अब मंत्री बनने तक का सफर तय किया। राजेश की मां बोलीं- यह परिवार का आशीर्वाद भाजपा विधायक राजेश अग्रवाल अब प्रदेश के पर्यटन और संस्कृति मंत्री बन गए हैं। बुधवार को राजभवन में उनके मंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही लखनपुर और अंबिकापुर में जबरदस्त उत्साह का माहौल बन गया। अग्रवाल वर्ष 2023 में कांग्रेस के दिग्गज नेता और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव को शिकस्त देकर पहली बार विधायक बने। राजेश अग्रवाल की जीत और क्षेत्र में लोकप्रियता के पीछे उनके पिता स्व. चांदी अग्रवाल की छवि का भी बड़ा योगदान रहा है। उनके पिता लखनपुर के नगर सेठ थे और गांव-गांव तक उनका व्यवसाय फैला हुआ था। उनकी मिलनसार और मददगार छवि ने गांवों में विश्वास की गहरी छाप छोड़ी थी। राजेश अग्रवाल की मां ने बेटे के मंत्री बनने पर खुशी जताई और कहा कि यह उनके दिवंगत पति की मेहनत और परिवार की आशीर्वाद का नतीजा है। राजेश अग्रवाल का राजनीतिक सफर काफी रोचक रहा है। वे 2002 में लखनपुर के पास ग्राम पंचायत कुंवरपुर से पंच बने। फिर उपसरपंच चुने गए। वर्ष 2009 में कांग्रेस ने नगर पंचायत अध्यक्ष का टिकट नहीं दिया तो उन्होंने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा। हालांकि मात्र एक वोट से हार गए। अगली बार कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया और वे 2014 में नगर पंचायत अध्यक्ष बन गए। वर्ष 2019 में उनका कांग्रेस से मोहभंग हो गया। टर्बो मशीनरी में एमटेक गुरु खुशवंत कर रहे पीएचडी आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब अब राज्य सरकार में मंत्री बन गए हैं। गुरु खुशवंत साहेब ने मेट्स यूनिवर्सिटी से वर्ष 2017 में टर्बो मशीनरी में एमटेक किया। फिलहाल पीएचडी कर रहे हैं। उनके पिता राजगुरु बालदास साहेब सतनामी समाज के धर्मगुरु हैं। वे अखिल भारतीय सतनाम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। इस लिहाज से गुरु खुशवंत का सतनामी समाज पर जबरदस्त प्रभाव है। ग्राम भंडारपुरी धाम के रहने वाले गुरु खुशवंत साहेब का जन्म 27 मार्च 1989 को हुआ। वे अविवाहित हैं। वर्ष 2023 में वे पहली बार विधायक बने। उन्होंने आरंग में कांग्रेस के कद्दावर नेता और भूपेश बघेल की सरकार में मंत्री शिवकुमार डहरिया को शिकस्त दी। इसके बाद उन्हें अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया। गुरु खुशवंत साहेब के पिता सतनामी समाज के धर्मगुरु बाल दास साहेब पहले भाजपा में थे। वर्ष 2013 के चुनाव उन्होंने भाजपा के पक्ष में जमकर काम किया था। लेकिन 2018 के चुनाव से पहले बाल दास कांग्रेस में शामिल हो गए। लगातार उपेक्षा की वजह से पांच साल में ही उनका कांग्रेस से मोहभंग हो गया। और वे फिर से भाजपा में आ गए।
मंत्री बने बेटे के संघर्ष को पिता ने किया याद:बोले- गजेंद्र बचपन से ही जुझारू, मुनगा और दूध भी बेचा

















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