छत्तीसगढ़ में बहुतायत में मिलने वाली चेंच भानी अब अपराध की गुत्थियां सुलझाने में भी मदद करेगी। छत्तीसगढ़ के महासमुंद की दो होनहार बेटियों मृणाल विदानी और ओजल भारद्वाज (चंद्राकर) ने इस भाजी से ऐसा फॉरेंसिक पाउडर तैयार किया है, जो अपराध स्थल से फिंगरप्रिंट, चोट के निशान को स्पष्ट करने और अन्य साक्ष्य जुटाने में बेहद कारगर साबित होगा। खास बात यह है कि महंगे और हानिकारक केमिकल की जगह यह सुरक्षित और किफायती विकल्प है। इस आविष्कार के लिए दोनों को भारत सरकार ने हाल ही में कॉपीराइट का सर्टिफिकेट दिया है। रिसर्च के लिए इसलिए चुनी चेच भाजी और ऐसे की जांच चेंच भाजी में चारकोल पाउडर होता है, जो टेबल, कप, गिलास, दीवान में चिपकने में सहायक होता है। वहीं मैग्नीशियम पाउडर की लुग्दी बनने से रोकता है, जबकि सेल्यूलोज कंपोनेटेड साइड इफेक्ट नहीं करता। छात्राओं ने चेच भाजी से फॉरेंसिक पाउडर बनाने 12 सैंपल लिए थे, जो तीन कैटेगरी में बंटे थे। लैब में पोरस पाउडर के सैंपल से दीवार, टेबल में जांच की। नॉनपोरस को स्टील, गिलास, कप, मोबाइल ग्लास से सैंपल लेकर देखा। वहीं दोनों के मिश्रण सेमीपोरस के सैंपल को कापी के पत्रे, नोटबुक, लिफाफा में पाउडर डालकर सैंपल की जांच की। तब कहीं जाकर यह कारगर हुआ। ऐसे तैयार हुआ खास पाउडर दोनों छात्राओं ने चेंच भाजी के कोमल पत्तों का प्राकृतिक रसायन खत्म न हो, इसलिए सीधे धूप में सुखाने की बजाय कागज के नीचे उन पत्तों को रखकर विशेष तकनीक से सुखाया। 15 दिनों तक उसे छांव में रखा और सूखे पत्तों को पत्थर की मदद से चूरा बनाया। छह बार कपड़े से छानकर महीन बनाया। तब कहीं जाकर नैनो पार्टिकल साइज में यह आ सके। इसके बाद इन पर प्रयोग किया और सफल होने के बाद भारत सरकार से कॉपीराइट के लिए आवेदन किया। ये है चेंच भाजी चैव भाजी एक पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक भाजी है, जो न केवल ग्रामीण रसोइयों में बल्कि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच भी खास पहचान बना रही है। इसे आमतौर पर ‘देशी चेज’ या ‘जूट की भाजी’ के नाम से जाना जाता है। यह दो प्रकार (लाल और सफेद) की होती है। जानिए… दोनों छात्राओं के बारे में मृणाल विदानी की नार्को व डीएनए की पढ़ाई की इच्छा थी। इसलिए उन्होंने ऑल इंडिया फोरेंसिक साइंस एन्ट्रेन्स टेस्ट दी। परीक्षा में उन्हें 14वां स्थान मिला। मृणाल वर्तमान में डीएनए और अन्य विषयों के साथ मास्टर्स अंतिम वर्ष की छात्रा है। वहीं, ओजल ने स्कूली पढ़ाई महासमुंद से की है। वह साइंस की छात्रा रही। 2023 में एआईएफएसईटी दी और पहले ही अटैम्प्ट में सेलेक्ट हुई। वे इस वर्ष फॉरेंसिक साइंस बैचलर के तृतीय वर्ष की छात्रा है। दोनों ही छात्राएं विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी जयपुर में अध्ययनरत हैं।
छत्तीसगढ़ की बेटियों की बड़ी खोज:चेंच भाजी से बनाया फॉरेंसिक पाउडर, जो साक्ष्य के गुप्त फिंगरप्रिंट को स्पष्ट करने में मदद करेगा, यह सुरक्षित-किफायती भी

















Leave a Reply