छत्तीसगढ़ में पिछले दो दिनों में मानसून कमजोर पड़ा है। पिछले 24 घंटे में अच्छी बारिश किसी भी जिले में रिकॉर्ड नहीं हुई। बस्तर संभाग में पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश के बाद चार जिलों दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और बस्तर में बाढ़ के बाद की तस्वीरें सामने आई हैं। यहां 200 से ज्यादा मकान ढह गए। 2196 लोग राहत शिविर में शिफ्ट किए गए। इन्हें स्कूल, इंडोर स्टेडियम, आश्रम जैसे जगहों पर ठहराया गया है। अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। बारसूर में स्टेट हाईवे 5 पर पुल टूट गया है, टूटे पुल पर अब सीढ़ी बांधकर ग्रामीण आना जाना कर रहे हैं। बता दें कि नारायणपुर, बस्तर, बीजापुर के 55 से 60 गांवों के ग्रामीण अपनी रोजमर्रा के सामानों के लिए बारसूर साप्ताहिक बाजार पहुंचते हैं। इस बीच मौसम विभाग ने आज, शनिवार को रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, सरगुजा सहित 12 जिलों में गरज चमक के साथ बिजली गिरने और आंधी चलने का यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं कल यानी रविवार से अगले तीन दिनों तक बारिश में और तेजी आएगी। दंतेवाड़ा में 50 करोड़ से ज्यादा का नुकसान दंतेवाड़ा नगर समेत आस-पास के गांवों में कुल करीब 50 करोड़ से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है। दंतेवाड़ा में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया। इससे शंखनी-डंकनी नदी का पानी नहीं बह पाया और आसपास के गांवों में भारी तबाही मच गई। बस्तर में बाढ़ के बाद की तस्वीरें… 4 जिलों में 43 राहत शिविर बाढ़ प्रभावित बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बस्तर में राहत शिविरों में 2196 लोग ठहराए गए हैं। इसमें दंतेवाड़ा जिले के 1,116, सुकमा के 790, बीजापुर के 120 और बस्तर के 170 लोग हैं। बाढ़ से अब तक 5 लोगों और 17 पशुओं की मृत्यु हुई है। 15 से ज्यादा पुल-पुलिए टूटे, करीब 50 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है। बस्तर की ये तस्वीरें भी देखिए… बलरामपुर में सबसे ज्यादा पानी बरसा प्रदेश में अब तक 892.8 MM बारिश हुई है। बेमेतरा जिले में अब तक 426.7 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से -49% कम है। महासमुंद (-20%) जिले में वर्षा सामान्य से काफी कम रही है, जिन्हें ‘क्षेत्र में वर्षा की कमी’ वाले क्षेत्रों में रखा गया है। सरगुजा जिले में भी 27% वर्षा की कमी दर्ज की गई है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, बेमेतरा, जगदलपुर में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। वहीं, बलरामपुर जिले में 1257.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 66% अधिक है। जांजगीर जिले में भी 24% अधिक बारिश हुई है। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी
बाढ़ से पुल टूटा…सीढ़ी बांधकर आना-जाना कर रहे ग्रामीण:बस्तर में 200 घर ढहे, 5 मौतें, आज 12 जिलों में अलर्ट;कल से 3 दिन बरसात

















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