काशीनाथ गोरे के लिए आज बिलासपुर आएंगे मोहन भागवत:पहली बार बिताएंगे रात, 300 पुलिसकर्मी तैनात, RSS से जुड़े थे काशीनाथ और उनका परिवार

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत आज शनिवार को छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान बिलासपुर के सिम्स ऑडिटोरियम में उनका उद्बोधन होगा। इस अवसर पर स्व. काशीनाथ गोरे की स्मृतियों पर आधारित “लोकहितकारी काशीनाथ स्मारिका’ का विमोचन भी करेंगे। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे। साथ ही विशेष अतिथि के रूप में संघ के मध्य क्षेत्र के क्षेत्रिय संघचालक डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना मौजूद रहेंगे। उनके आने को लेकर पुलिस प्रशासन ने पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए हैं। वहीं, ऑडिटोरियम परिसर को सील कर दिया गया है। काशीनाथ ने समाज और राष्ट्र की सेवा में लगा दिया जीवन आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा और सचिव बृजेन्द्र शुक्ला ने बताया कि, स्मारिका में स्व. काशीनाथ गोरे के सामाजिक योगदान, पारिवारिक जीवन और राष्ट्रसेवा से जुड़े प्रेरणादायी संस्करणों को समाहित किया गया है। काशीनाथ गोरे ने अपना पूरा जीवन समाज और राष्ट्र की सेवा में लगा दिया था। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। इस स्मारिका के माध्यम से उनके कार्यों और विचारों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। इस कार्यक्रम में सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्र के विशिष्ट लोगों के साथ ही भाजपा के कई दिग्गज नेता, मंत्री और विधायक भी मौजूद रहेंगे। लोकसभा चुनाव के पहले किया था दौरा, पहली बार बिताएंगे रात इससे पहले RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत लोकसभा चुनाव के पहले बिलासपुर दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर चर्चा की थी। वहीं, साल 2021 में संघ के समरसता कार्यक्रम में मुंगेली जिले के मदकूद्वीप आए थे। जहां उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित किया था। इस बार उनका यह कार्यक्रम संघ प्रायोजित नहीं है। बल्कि, ट्रस्ट का आयोजन है। पहली बार RSS प्रमुख भागवत बिलासपुर में रात बिताएंगे। जिसके बाद रविवार की सुबह वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से रवाना होंगे। संघ प्रमुख को मिली है जेड प्लस सुरक्षा, एसपीजी ने किया रिहर्सल उनके आने से पहले सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था की जा रही है। एसपीजी ने शुक्रवार को उनकी सुरक्षा का रिहर्सल किया। पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों के साथ एसएसपी रजनेश सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख के आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जगह-जगह तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। संदिग्धों से पूछताछ की जारी है। वे ट्रेन से यहां पहुंचेंगे। इसके लिए रेलवे स्टेशन की सुरक्षा बढ़ाई गई है। आज यात्रियों को स्टेशन पहले आने के लिए कहा गया है। शहर में उनकी सुरक्षा के लिए अधिकारी और जवानों के साथ करीब 300 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। इसके अलावा सीआरपीएफ, सशस्त्र अर्धसैनिक के जवान और नगर सैनिकों को जिम्मेदारी दी गई है। सिम्स ऑडिटोरियम परिसर को शुक्रवार से ही सील कर दिया गया है। यहां आने जाने वालों पर नजर रखी जा रही है। सिम्स के सामने के दोनों गेट खोले गए आरएसएस प्रमुख के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा बलों के साथ बाकी लोगों की भी भीड़ रहेगी। इसे देखते रेख हुए मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए सामने के दोनों गेट को खोल दिए गए हैं। सिम्स प्रबंधन ने मरीज और उनके परिजनों के लिए अलग से व्यवस्था करने का दावा किया है। साथ ही कहा कि कार्यक्रम के दौरान मरीजों को किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। संघ के लिए पिता ने छोड़ दी नौकरी काशीनाथ गोरे का परिवार संघ से जुड़ा था। उनके पिता यशवंत नरहर गोरे भी बचपन से संघ से जुड़े थे। वे रेलवे में कार्यरत थे। जब संघ के कार्य में उनकी केंद्र सरकार की नौकरी आड़े आई, तब उन्होंने रेलवे की नौकरी छोड़ दी और किराना दुकान कर परिवार का गुजारा करने लगे। लेकिन, संघ को नहीं छोड़ा। अपने पिता और परिवार के सदस्यों से प्रेरणा लेकर काशीनाथ गोरे ने संघ परिवार के लिए जीवन भर काम किया। कुष्ठ रोगियों की भी करते रहे सेवा काशीनाथ गोरे एक अच्छे बांसुरी वादक भी थे। वे घर में भी हंसी मजाक में ही गंभीर से गंभीर बातों को समझा देते थे। वे सभी को समान दृष्टिकोण से देखते थे। उनका संघ के सभी बड़े पदाधिकारी व भाजपा के बड़े नेताओं से सीधा जुड़ाव था। उन्होंने चांपा स्थित भारतीय कुष्ठ निवारक संघ से जुड़कर कुष्ठ रोगियों की सेवा की। वहीं, सेवा भारती नाम की संस्था से भी जुड़कर जरूरतमंदों की मदद करते रहे। बताया जाता है कि कांशीनाथ गोरे संघ से अलग हटकर भी लोगों की मदद करते रहे हैं। मुंबई के कैंसर अस्पताल में इलाज कराने के लिए जाने वाले लोगों को सहयोग करने और परिजन को वहां नानावती धर्मशाला में ठहराने की व्यवस्था करते थे। मदद करते समय उन्होंने कभी यह ध्यान नहीं दिया कि कांग्रेसी है या भाजपाई। जो भी उनके पास जाते, सभी को बराबर मदद करते थे।

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