बूढ़ातालाब के सौंदर्यीकरण पर खर्च करने थे 12 करोड़, बिना पैसे लगाए कंपनी खोल रही चौपाटी

बूढ़ातालाब में चौपाटी का विवाद गहराता जा रहा है। नगर निगम ने अनुमति के बिना ही चौपाटी में खुली तीन दुकानों को सील कर दिया है। यहां ऐसी 50 दुकानें बनाई गई है। ठेका लेने वाली मुंबई की कंपनी एमएमपी वाटर स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को 2016-17 में हुए अनुबंध के अनुसार बूढ़ातालाब में 12 करोड़ खर्च कर सौंदर्यीकरण करना था। इस खर्च की भरपाई के लिए उन्हें बूढ़ेश्वर चौक के आसपास 12 दुकानें बनानी थी। कंपनी को इससे आय होती। वह बूढ़ातालाब का मेंटनेंस करती और पर्यटन मंडल को सालाना 10 लाख रुपए का भुगतान भी करती। विवादों के बीच रायपुर स्मार्ट सिटी ने बूढ़ातालाब में लगभग 30 करोड़ खर्च कर दिए। इसके चलते सौंदर्यीकरण के लिए कंपनी को एक रुपए भी खर्च नहीं करने पड़े और चौपाटी उसके हाथ लग गई। पूरा विवाद इसी को लेकर चल रहा है। 2016 की अनुबंध शर्तों पर ही एक दशक बाद खोल रहे चौपाटी बूढ़ातालाब में चौपाटी खोलने का प्रस्ताव 2015-16 में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने तैयार किया था। उस वक्त प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। इस प्रस्ताव के लिए पर्यटन मंडल ने रायपुर नगर निगम से मंजूरी मांगी थी। निगम में उस वक्त कांग्रेस की सरकार थी। महापौर परिषद ने पर्यटन मंडल को इस प्रस्ताव के लिए सशर्त अनुमति दी थी। इसी अनुमति के आधार पर पर्यटन मंडल ने कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किया था। कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई। इसके बाद टेंडर जारी किया गया। टेंडर में मुंबई की एमएमपी वाटर स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने सबसे ज्यादा बोली लगाई। इस आधार पर उसे ठेका दिया। 25 अक्टूबर 2016 को एमएमपी वाटर स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ अनुबंध किया गया। अनुबंध की शर्तों के अनुसार तालाब का सौंदर्यीकरण, वाटर स्पोर्ट्स शुरू करना और अन्य सुविधाएं विकसित करना था। कंपनी को 30 साल तक संचालन और मेंटनेंस करना था। कंपनी इसके एवज में सालाना 10 लाख रुपए का लाइसेंस फीस देती। 10 लाख रुपए सिक्योरिटी डिपाजिट के रूप में कंपनी से लिया गया था। इस बीच प्रोजेक्ट विवादों में घिर गया। कंपनी ने तालाब की वाटर बॉडी पाटनी शुरू कर दी। इसके खिलाफ स्थानीय लोगों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला दायर कर दिया। एनजीटी ने प्रोजेक्ट रोकने का आदेश दिया। विवाद गहराता देख उस वक्त नगरीय प्रशासन विभाग ने कुछ लोगों की एक टीम बनाई। उन्होंने मामले की जांच की और टेंडर रद्द करने की सिफारिश की। इसी बीच कोरोना काल शुरू हो गया। कोरोना के दौर में दो साल मामला लंबित रहा। इसी बीच 2020-21 में पर्यटन मंडल ने अनुबंध रद्द कर दिया। इसके बाद कंपनी हाईकोर्ट चली गई। कोर्ट में मामला करीब दो साल चला। आखिरकार कोर्ट ने कंपनी के पक्ष में फैसला दिया। इस बीच बूढ़ातालाब में रायपुर स्मार्ट सिटी ने सौंदर्यीकरण का काम शुरू कर दिया था। काम पूरा होने के बाद महापौर एजाज ढेबर की एमआईसी ने प्रस्ताव पास कर बूढ़ातालाब को पर्यटन मंडल को हैंडओवर कर दिया। पर्यटन मंडल के हाथ में आते ही कंपनी ने यहां चौपाटी बनाने का काम शुरू कर दिया। तब इसका भरपूर विरोध भी किया गया। नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने चौपाटी को लेकर आंदोलन भी किया। इसके बावजूद कंपनी ने काम नहीं रोका और दुकानें शुरू कर दी। 10 करोड़ से तैयार साइंस कालेज चौपाटी विवादों में बूढ़ातालाब के बाद सबसे ज्यादा विवादित साइंस कालेज चौपाटी रही। यहां पर रायपुर स्मार्ट सिटी ने करीब 10 करोड़ रुपए खर्च कर यूथ हब के नाम पर चौपाटी बनाई। यहां पर आधुनिक 60 दुकानें तैयार की गईं। चौपाटी तैयार होने के बाद इसे भी रायपुर की एक फर्म को 15 साल के लिए ठेके पर दे दिया गया। पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेश मूणत ने चौपाटी का लगातार विरोध करते रहे। निर्माण शुरू होने पर वे महीनेभर तक धरने पर भी बैठे, लेकिन उनका विरोध काम नहीं आया। साइंस कालेज चौपाटी का काम कांग्रेस शासनकाल में शुरू हुआ। भाजपा की सरकार आने के बाद सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी, पश्चिम विधायक राजेश मूणत तथा अन्य जनप्रतिनिधियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि साइंस कालेज में चौपाटी बंद कर उसे दूसरी जगह शिफ्ट जाए। पर्यटन मंडल का है अनुबंध
^ यह पूरा मामला पर्यटन मंडल का है। पर्यटन मंडल ने अनुबंध किया। अनुबंध रद्द होने के बाद रायपुर स्मार्ट सिटी सौंदर्यीकरण का काम किया। सौंदर्यीकरण के बाद स्मार्ट सिटी ने बूढ़ातालाब निगम को हैंडओवर किया। यह सब प्रक्रिया पूर्व की है। निगम ने नियम विपरीत खुली दुकानों पर कार्रवाई कर सील किया है।
विश्वदीप, एमडी स्मार्ट सिटी व निगम कमिश्नर कोर्ट से आदेश लाकर शुरू किया काम
^ पर्यटन मंडल ने कंपनी के साथ अनुबंध किया है। इसके लिए नगर निगम से अनुमति भी ली गई थी। अनुबंध की शर्तों के तहत और कोर्ट के आदेश के बाद ही कंपनी ने काम शुरू किया। इस मामले में पर्यटन मंडल सिर्फ एक एजेंसी के रूप में काम किया। इससे ज्यादा मंडल की कोई भूमिका नहीं है।
वेदव्रत सिरमौर, जीएम, टूरिज्म बोर्ड

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