5 बांधों में 27% तक गाद, इसे निकालने की पॉलिसी तैयार हो रही; बढ़ेगी भराव क्षमता प्रदेश के 5 बांधों में 40 साल में 27% तक गाद जमा हो चुकी है। इसकी वजह से इन बांधों की जल संग्रहण क्षमता कम हो गई है। बांधों में सिल्टिंग की गति को देखते हुए राज्य में पहली बार सेडीमेंट्रेशन पॉलिसी बनाई जा रही है। इसके लिए विभाग ने ड्राफ्ट बनाने से पहले चार पड़ोसी राज्यों ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना का अध्ययन किया है। इन राज्यों की सेडीमेंट्रेशन पॉलिसी के अध्ययन के बाद विभाग ने अपने राज्य के हिसाब से पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। पॉलिसी के तहत अब पीपीपी मॉडल पर छत्तीसगढ़ के बांधों से गाद निकाली जाएगी। हालांकि, इस गाद से जल संसाधन विभाग को मिलने वाले राजस्व पर अंतिम चर्चा होनी है। सर्वे के अनुसार प्रदेश के 23 बांधों में अब तक कुल 8.7 प्रतिशत तक गाद है। पांच बांधों सोंढुर, क्षीरपानी, खमारपाकुट, बहेरखार और मतियामोटी में 29-40 साल में ही 27 प्रतिशत तक गाद है। जल संसाधन विभाग के अफसरों का कहना है कि अमूमन 75 साल में 25 से 30 प्रतिशत तक गाद जमा होती है। सिल्टिंग के कारण बांधों की क्षमता में लगातार आ रही गिरावट को देखते हुए ही सेडीमेंट्रेशन पॉलिसी बनाई जा रही है। सिल्ट हटाने के काम और संचालन को लेकर जल संसाधन विभाग एसओपी और गाइडलाइन तैयार करेगा। चर्चा के बाद पॉलिसी को कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे विधानसभा से पारित कराना होगा। दरअसल, जल संसाधन विभाग ने प्रदेश के 23 बांधों में सिल्टिंग प्रोसेस और लेवल का सर्वे किया। इसमें पता चला कि कुछ बांधों में खतरनाक तरीके से सिल्टिंग हो रही है, जबकि कुछ बांधों में सिल्टिंग की गति आश्चर्यजनक रूप से कम है। टेक्निकल कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बनेगी प्रोजेक्ट रिपोर्ट: जल संसाधन विभाग के रीजनल चीफ इंजीनियर बांधों में सिल्ट एकत्र होने की स्थिति के आधार पर डिसिल्टेशन का प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार करेगा। इसके बाद विभाग की तरफ से प्रस्ताव भेजे जाने के बाद टेक्निकल कमेटी प्रारंभिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करेगी। पीपीपी समेत नीति में दो मॉडल पर जोर रिजर्ववायर सेडीमेंट मैनेजमेंट पॉलिसी बनाने को लेकर सरकार दो मॉडल पर काम कर रही है। इसमें पहला सेल्फ फाइनेंस मॉडल है, जिसमें सेडीमेंट निकालने वाली एजेंसी ही अपने खर्च पर सेडीमेंट को निकालने से लेकर उसको स्टोर करने और डिस्पोज करेगी। दूसरा मॉडल, राजस्व बढ़ाने पर आधारित है। इसमें ठेकेदार रेत और अन्य निकाले गए मेटेरियल को बेचकर जल संसाधन विभाग को तय की गई राशि देंगे। 11 सदस्यीय कमेटी करेगी रिव्यू
बांधों के डिसिल्टिंग और सेडीमेंट प्रबंधन पर निर्णय के लिए राज्य और जिले स्तर पर तकनीकी कमेटी बनाई जाएगी। डैम सेफ्टी एक्ट के तहत बांधों के डिसिल्टिंग का रिव्यू किया जाएगा। जल संसाधन विभाग के इंजीनियर इन चीफ की अध्यक्षता में राज्य स्तर पर 11 सदस्यीय कमेटी बनाई जाएगी। इसमें माइनिंग, फिशरीज, पीएचई, वन, आवास एवं पर्यावरण और विभाग के नामांकित अफसर रखे जाएंगे। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक 9 सदस्यीय कमेटी बनेगी। इसमें भी जल संसाधन, माइनिंग, कृषि, फिशरीज, पीएचई, फॉरेस्ट और पर्यावरण संरक्षण बोर्ड के जिले स्तर के अफसर शामिल रहेंगे। भास्कर एक्सपर्ट — शेख शाकर, रिटायर्ड इंजीनियर इन चीफ, जल संसाधन गाद बांधों के लिए खतरनाक, ज्यादा गाद आने से रोकना होगा
सिल्ट जमा होने की गति ज्यादा होने पर बांधों की कैपेसिटी पर असर पड़ता है। लगातार सिल्ट जमा होने से बांधों में पानी का स्टोरेज कम हो जाता है। हालांकि, सिल्ट ज्यादातर डेड स्टोरेज में ही जमा होता है। बांधों में सिल्टिंग रेट को कम करने के लिए कैचमेंट एरिया में पेड़- पौधे लगाए जाने चाहिए। इसके अलावा एनीकट और छोटे- छोटे चेक डैम बनाए जाने चाहिए। इससे बांधों में सिल्टिंग प्रोसेस में कमी आएगी।
ड्राफ्ट तैयार:प्रदेश में बांधों में बढ़ती गाद के निपटारे के लिए जल संसाधन विभाग जुटा

















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