राजीव भवन पहुंची ED…मलकीत सिंह को दी चालान की कॉपी:अधिकारियों का दावा- शराब-घोटाले के पैसे से हरीश का घर और सुकमा कांग्रेस भवन बना

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारी सोमवार को कांग्रेस प्रदेश कार्यालय राजीव भवन पहुंचे। उन्होंने कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री संगठन मलकीत सिंह गैदु से मुलाकात की। उन्हें केस से संबंधित चालना की कॉपी दी। करीब 10 मिनट तक अधिकारी राजीव भवन में रहे इसके बाद लौट गए। दरअसल, इस केस में एजेंसी ने सुकमा कांग्रेस भवन को भी अटैच किया है। मलकीत सिंह गैदु ने बताया कि, ईडी की ओर से सुकमा कांग्रेस भवन का मामला दिल्ली ट्रिब्यूनल में दायर किया गया था। ट्रिब्यूनल से नोटिस मिलने के बाद हमें 2 सितंबर को जवाब देना था। लेकिन कांग्रेस लीगल टीम ने मांग की थी कि हमारे पास केस से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं है। हम इसका जवाब कैसे देंगे। जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने केस से संबंधित चालान की कॉपी दी है। उन्होंने कहा कि, आगे हम इसका जवाब देंगे। कमीशन के पैसे से बेटे का घर बना, कांग्रेस भवन निर्माण का भी ऐसा पहली बार है, जब एजेंसी ने सुकमा कांग्रेस पार्टी के भवन को अटैच किया है। ईडी की ओर से दावा किया गया है कि, शराब घोटाले में भ्रष्टाचार का पैसा कवासी लखमा को मिला है। उसी 68 लाख रुपए से सुकमा में कांग्रेस भवन तैयार किया गया है। ED का आरोप है कि, शराब घोटाला मामले में लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। इस दौरान 36 महीने में लखमा को 72 करोड़ रुपए मिले। यह पैसे बेटे हरीश कवासी के घर निर्माण और सुकमा कांग्रेस भवन निर्माण में लगे। ED ने कहा था कि, छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। शराब सिंडिकेट के लोगों की जेबों में 2,100 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई भरी गई। पूर्व आबकारी मंत्री लखमा जेल में ED ने लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। उसके बाद से ही वे रायपुर के सेंट्रल जेल में न्यायिक रिमांड पर बंद हैं। ED का आरोप- लखमा सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे ED का आरोप है कि, पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे। लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था। इनसे शराब सिंडिकेट को मदद मिलती थी। वहीं, शराब नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिससे छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई। ED का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। …………………………………….. इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए… शराब घोटाला…कवासी सिंडिकेट के प्रमुख थे:ED बोली- हर महीने 2 करोड़ कमीशन, 3800 पन्नों का चालान पेश छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED ने कवासी लखमा के खिलाफ 3773 पन्नों का चालान पेश किया। चालान में कहा गया है कि पूर्व आबकारी मंत्री लखमा को इस घोटाले की पूरी जानकारी थी। उन्हें हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। पढ़ें पूरी खबर…

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