रायपुर में नवंबर से पहले कमिश्नर प्रणाली लागू हो सकती है; बद्री, संजीव व अमरेश कमिश्नर की रेस में ADG प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में बनाई गई 8 सदस्यीय कमेटी रायपुर में नवंबर से पहले कमिश्नर प्रणाली लागू होने के आसार हैं। इसके लिए सरकार ने एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में 8 सदस्यीय कमेटी बनाई है। कमेटी में आईजी अजय यादव, अमरेश मिश्रा, ध्रुव गुप्ता, डीआईजी अभिषेक मीणा, संतोष सिंह, एसपी प्रभात कुमार और संयुक्त संचालक लोक अभियोजन मुकुला शर्मा शामिल हैं। कमेटी कमिश्नर सिस्टम कैसा होगा, क्या अधिकार क्षेत्र होगा, क्या कर्तव्य होगा, कितने पद होंगे, कितने बल चाहिए, कितने कोर्ट होंगे, जैसे तमाम विषयों पर चर्चा कर प्रस्ताव तैयार करेगी। प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा। हालांकि अलग-अलग स्तर में गृह विभाग को आईपीएस अधिकारियों ने कमिश्नर सिस्टम के पद, कार्य क्षेत्र, अधिकार क्षेत्र, पद को लेकर प्रस्ताव भेज दिया है। अभी तक जहां भी कमिश्नर सिस्टम लागू है, वहां पूरे जिले को शामिल नहीं किया जाता। वहां ग्रामीण इलाकों के थानों के लिए अलग से ग्रामीण एसपी की तैनाती की जाती है। लेकिन रायपुर में ग्रामीण एसपी नहीं होगा। पूरे जिले के 32 थाने कमिश्नर के अंदर आएंगे। इसे लेकर कुछ सवाल भी आया था। पीएचक्यू ने उसका भी समाधान कर भेज दिया है। इसके बाद फिर से शासन ने एक कमेटी बनाई है। चर्चा है कि रायपुर के पहले कमिश्नर आईजी बद्री नारायण मीणा, डॉ. संजीव शुक्ला या अमरेश मिश्रा हो सकते हैं। अगर अमरेश मिश्रा कमिश्नर बनते हैं तो उन्हें ईओडब्ल्यू के साथ कमिश्नर रायपुर की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस स्थिति में आईजी बद्री नारायण मीणा महासमुंद नए रेंज के आईजी को सकते हैं। आईजी होंगे कमिश्नर ऑफ पुलिस: शासन को जो प्रस्ताव भेजा गया है, उसमें कमिश्नर के लिए एडीजी या आईजी का पद प्रस्तावित किया गया है। चर्चा है कि सरकार आईजी रैंक के अधिकारी को ही रायपुर कमिश्नर ऑफ पुलिस बनाएगी। उनके नीचे दो डीआईजी रहेंगे। यह पद जॉइंट कमिश्नर या एडिशनल कमिश्नर का होगा। एक डीआईजी को क्राइम ब्रांच और साइबर की जिम्मेदारी दी जाएगी। दूसरे डीआईजी को प्रशासन और लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी दी जाएगी। इनके बाद 4 डीसीपी रैंक के अधिकारी होंगे। यह एसपी रैंक या सीनियर एडिशनल रैंक के अधिकारी हो सकते हैं। एडिशनल डीएसपी का भी पद होगा। यह एएसपी रैंक के अधिकारियों के लिए रहेगा। 10-12 एसीपी होंगे। इसमें डीएसपी रैंक के अधिकारी होंगे। उनके नीचे टीआई या एचओ होंगे। राजधानी में जवानों की कमी, जरूरत 7000 पुलिस बल की रायपुर में 25 साल पहले 8 लाख आबादी पर 3825 की फोर्स थी, अब 25 लाख आबादी पर 2980 पुलिस जवान प्रमोद साहू की रिपोर्ट राजधानी में कमिश्नर प्रणाली लागू होने जा रही है, लेकिन कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस में जरूरी फोर्स ही नहीं है। 25 साल पहले जब रायपुर राजधानी बना था तो आबादी 8 लाख थी। उस हिसाब से पुलिस में 3700 की फोर्स मंजूर की गई। फिर कुछ नए थाने और सीएसपी ऑफिस खुले तो फोर्स बढ़कर 3825 हो गई। अब आबादी 25-26 लाख हो गई। लोग समय के साथ रिटायर होते गए और फोर्स घटकर 2980 हो गई। रायपुर पुलिस में जितने पद मंजूर हैं, उसे भी भरा नहीं जा रहा है, जबकि आबादी के अनुपात में फोर्स बढ़ाकर 7000 करने की जरूरत है। थानों में पर्याप्त स्टाफ नहीं है। सबसे ज्यादा रायपुर में सिपाहियों की कमी है। 750 से ज्यादा सिपाहियों के पद खाली हैं। ट्रैफिक में 525 का बल मंजूर हैं, लेकिन इसमें भी भर्ती नहीं हुई है। कई जवानों के रिटायरमेंट के बाद अभी 395 का बल तैनात है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सिपाही-हवलदार पुलिस की रीढ़ होती है। इन्हीं से थाना चलता है और लॉ एंड ऑर्डर संभलता है। हर दो साल में सिपाहियों की भर्ती होनी चाहिए। इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा और जिला और बटालियन में पर्याप्त फोर्स रहेंगे। 7 माह में 38 पुलिस वाले रिटायर
रायपुर में इस साल 7 माह के भीतर 38 पुलिस वाले रिटायर हो गए। इसमें थानों में पदस्थ स्टाफ से लेकर ऑफिस में पदस्थ कर्मचारी शामिल हैं। आने वाले 5 माह में भी बड़ी संख्या में रिटायरमेंट हैं, जबकि पिछले साल 54 लोग रिटायर हुए थे। यानी पिछले डेढ़ साल में 92 लोग रिटायर हुए हैं, लेकिन उनकी जगह कोई आया नहीं है। बटालियन में सिपाहियों की कमी
राज्य के जिलों के अलावा बटालियन में भी सिपाहियों की कमी है। इसमें भी लंबे समय से सिपाहियों की भर्ती नहीं हुई है। बटालियन में पहले जो सिपाही के तौर पर भर्ती हुए थे, वे हवलदार बन गए। जो हवलदार थे वे प्रमोट होकर एएसआई बन गए। इसलिए राज्य में सिपाहियों की कमी होती जा रही है। छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में भी फोर्स की कमी है। केंद्र के मानकों पर 4570 फोर्स होनी चाहिए भास्कर एक्सपर्ट – अन्वेष मंगलम, रिटायर स्पेशल डीजी कमिश्नर प्रणाली लागू करने बढ़ानी होगी फोर्स
रायपुर में जल्द कमिश्नरी प्रणाली लागू होने जा रही है, इसके लिए मौजूदा जो फोर्स या बल है। वह आबादी और ड्यूटी के अनुसार पर्याप्त नहीं है। क्योंकि कमिश्नर प्रणाली में पुलिस का खुद का कोर्ट होगा। अभी 8 सीएसपी हैं, तो वहां 8 कोर्ट चलेंगी। कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर के दो कोर्ट होंगे। इस तरह तकरीबन 10 कोर्ट होंगे। हर कोर्ट में 10-15 स्टाफ की जरूरत होगी। इसके अलावा हर कार्यालय में स्टाफ की जरूरत होगी। कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर का अलग-अलग सेटअप होगा। इसलिए रायपुर में 7000 फोर्स की जरूरत है।
कमिश्नर प्रणाली:आईजी रैंक के अधिकारी को सीपी की जिम्मेदारी, दो डीआईजी के लिए भी होगा पद

















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