भिलाई की तेजेश्वरी नायडू का चयन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी लंदन के लिए हुआ है। अब वे वहां बच्चों के साथ होने वाली घरेलू हिंसा की रोकथाम पर काम करेंगी और शोध करने के तरीके सीखेंगी। इसके लिए उन्हें डॉ. गीता पीरामल छात्रवृत्ति मिली है। छात्रवृत्ति में उनका लंदन में रहने, खाने-पीने समेत भारत से लंदन आने और जाने का खर्च आदि शामिल है। इसका उद्देश्य बच्चों के साथ होने वाली घरेलू हिंसा को रोकना है। अक्सर मारपीट की डर से बच्चों का हमेशा सहमे रहने, अपनी बातों को खुलकर नहीं रख पाने या फिर ढीठ हो जाने जैसी समस्याओं की रोकथाम में सुविधा होगी। 28 सितंबर को वह बेंगलुरू से लंदन के लिए उड़ान भरेंगी। वहां 4 अक्टूबर से कक्षाएं लगेंगी। तेजेश्वरी बीएसपी के रेल मिल विभाग के सेवानिवृत्त सीनियर टेक्निशयन उमा महेश्वर नायडू और रानी नायडू की बेटी हैं। तेजेश्वरी ने बताया कि मेरी स्कूलिंग एमजीएम स्कूल सेक्टर-6 में हुई। फिर बेंगलुरू में केमेस्ट्री, न्यूट्रीशियन और ह्यूमन डेवलपमेंट विषयों के साथ स्नातक की उपाधि ली। फिर मुंबई टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में पीजी की। इस दौरान बेस्ट स्टूडेंट रही और स्वर्ण पदक जीता। इसी दौरान छोटे बच्चों के वेलफेयर में काम किया। हफ्ते में तीन दिन स्लम बस्ती के बच्चों को पढ़ाया। चिल्ड्रन वेलफेयर में काम किया। इस दौरान टीच फॉर इंडिया के लिए वर्ष 2019 से 2021 तक काम किया। तीसरी और चौथी कक्षा के बच्चों के साथ रहने का मौका मिला। उनसे उनके साथ घरों में होने वाली हिंसा को जानने और समझने का मौका मिला। इसके बाद एविडेंस बेस्ड सोशल इंटरनेशनल एंड पॉलिसी इवेल्युएशन में छात्रवृत्ति के साथ पढ़ने का मौका मिला है। महाराष्ट्र, यूपी के अस्पताल और महिलाओं के अधिकारों की जानकारी ली तेजेश्वरी ने बताया कि मुंबई में पढ़ने के दौरान चार प्रोजेक्ट पर काम किया। इसके अंतर्गत महाराष्ट्र में गढ़चिरौली के पास भू गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की जानकारी लेने का मौका मिला। इसके बाद उत्तर प्रदेश के लखीमपुर और खिरी गांव में बच्चों के टीकाकरण की वास्तविक स्थिति के बारे में जाना। इस दौरान वहां एक से पांच साल के बच्चों के टीकाकरण के आंकड़ों का अध्ययन किया। फिर बनारस और गोरखपुर में महिलाओं के अधिकार की स्थिति के बारे में जानने का मौका मिला। इसलिए मिला अवॉर्ड
काम के दौरान तेजेश्वरी ने गंडई से आगे बालाघाट मार्ग में साल्हेवारा के पास बैगा जनजातीय बच्चों पर मिले प्रोजेक्ट पर काम किया। स्टडी में देखा कि वहां अधिकांश बच्चे अंडर न्यूट्रीशियन वाले मिले। बच्चों को पौष्टिक खाने-पीने की चीजों की भारी कमी है। आंगनबाड़ी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, लेकिन खुलते नहीं हैं। इसकी रिपोर्ट पर टाटा इंस्टीट्यूट से बेस्ट रिसर्च का इनाम मिला। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में चयन के दौरान साक्षात्कार में इससे संबंधित सवाल पूछे गए थे।
बैगा-आदिवासी बच्चों पर शोध करने पर मिला बेस्ट-रिसर्च का अवॉर्ड:अब भिलाई की तेजेश्वरी ऑक्सफोर्ड में बच्चों पर घरेलू हिंसा पर काम करेंगी

















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