छत्तीसगढ़ में अगले तीन दिनों तक गरज चमक के साथ बारिश हो सकती है। उसके बाद बारिश की गतिविधि में कमी आएगी। मौसम विभाग ने आज प्रदेश के 33 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। सभी जिलों में गरज चमक के साथ बिजली गिर सकती है। वहीं 12 सितंबर तक प्रदेश में 1018.5 मिमी बारिश हो चुकी है। औसत से ये 2 प्रतिशत कम है। इस साल अगस्त के महीने को छोड़ दें तो मानसून अब तक सामान्य रहा है। पिछले 24 घंटे में बस्तर और बिलासपुर संभाग के कुछ इलाकों में भारी वर्षा दर्ज की गई। कांकेर जिले के चारामा में सबसे ज्यादा 82 मिमी बारिश हुई है। तापमान की बात करें तो शुक्रवार को प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 34 डिग्री बिलासपुर में रहा, सबसे कम न्यूनतम तापमान 19.2°C दुर्ग में रहा। बलरामपुर में सबसे ज्यादा पानी बरसा प्रदेश में अब तक 1018.5 मिमी बारिश हुई है। बेमेतरा जिले में अब तक 475.5 मिमी पानी बरसा है, जो सामान्य से 50% कम है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, बेमेतरा, जगदलपुर में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। वहीं, बलरामपुर जिले में 1367.4. मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 52% अधिक है। आंकड़े 1 जून से 12 सितंबर 2025 तक के हैं। चलिए, अब आपको मौसम से जुड़े दूसरे अपडेट्स भी देते हैं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दिक्कत अभी बरकरार पिछले हफ्ते उत्तरी और दक्षिणी छत्तीसगढ़ में भारी बारिश हुई। बस्तर संभाग के 4 जिलों में कई पुल टूट गए, 200 से ज्यादा घर ढह गए। नदियां-नाले उफान पर आ गए और बाढ़ जैसे हालात बन गए। प्रशासन को राहत और बचाव कार्य चलाना पड़ा। प्रभावितों को राहत शिविर में रखा गया है। फिलहाल स्थिति सामान्य की ओर बढ़ रही है, लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दिक्कतें अब भी बरकरार हैं। बस्तर में 200 से ज्यादा घर ढहे बस्तर संभाग में पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश के बाद चार जिलों दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और बस्तर में बाढ़ से 200 से ज्यादा मकान ढह गए। 2196 लोग राहत शिविर में शिफ्ट किए गए। इन्हें स्कूल, इंडोर स्टेडियम, आश्रम जैसे जगहों पर ठहराया गया है। अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। अब बाढ़ के बाद की तस्वीरें भी सामने आई हैं। बारसूर में स्टेट हाईवे 5 पर पुल टूट गया, टूटे पुल पर अब सीढ़ी बांधकर ग्रामीण आना जाना कर रहे हैं। बता दें कि नारायणपुर, बस्तर, बीजापुर के 55 से 60 गांवों के ग्रामीण अपनी रोजमर्रा के सामानों के लिए बारसूर साप्ताहिक बाजार पहुंचते हैं। बिजली गिरने का कारण भी जान लीजिए बादलों में मौजूद पानी की बूंदें और बर्फ के कण हवा से रगड़ खाते हैं, जिससे उनमें बिजली जैसा चार्ज पैदा होता है। कुछ बादलों में पॉजिटिव और कुछ में नेगेटिव चार्ज जमा हो जाता है। जब ये विपरीत चार्ज वाले बादल आपस में टकराते हैं तो बिजली बनती है। आमतौर पर यह बिजली बादलों के भीतर ही रहती है, लेकिन कभी-कभी यह इतनी तेज होती है कि धरती तक पहुंच जाती है। बिजली को धरती तक पहुंचने के लिए कंडक्टर की जरूरत होती है। पेड़, पानी, बिजली के खंभे और धातु के सामान ऐसे कंडक्टर बनते हैं। अगर कोई व्यक्ति इनके पास या संपर्क में होता है तो वह बिजली की चपेट में आ सकता है।
अगले 3 दिन बारिश…फिर कम होगी एक्टिविटी:आज 33 जिलों में अलर्ट, गरज-चमक के साथ बिजली गिरेगी, अब-तक औसत से 2% कम बरसा पानी

















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