छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने हड़ताल पर बैठे NHM संविदा कर्मचारियों को चेतावनी दी है। उनसे कहा है कि वे आज यानी मंगलवार तक काम पर लौट आएं। अगर कर्मचारी वापस नहीं लौटते तो 16,000 सीटें शून्य मान ली जाएगी और कर्मचारियों को नोटिस देकर नौकरी से निकाला जाएगा। वहीं, सरकार के आदेश के बाद भी कर्मचारियों को स्ट्राइक जारी है। सरकार की चेतावनी का असर हड़ताल करने वाले कर्मचारियों पर नहीं हुआ है। NHM कर्मियों के हड़ताल को 27 दिन से अधिक होने जा रहे हैं। लेकिन सरकार ने 10 में से एक भी मांग लिखित में पूरी नहीं की है। कांग्रेस बोली- झूठा वादा क्यों किया गया कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख की सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि, एनएचएम कर्मचारियों की मांग बिल्कुल जायज है, लेकिन सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के बजाय उन्हें बर्खास्तगी करने की चेतावनी दी जा रही है। भाजपा ने 2023 के विधानसभा चुनाव में एनएचएम कर्मचारियों से वादा किया था कि उनकी नौकरी नियमित की जाएगी और उनकी समस्याओं का समाधान होगा। यह वादा प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी का हिस्सा था। सवाल यह है कि जब वादा निभाना ही नहीं था, तो झूठा वादा क्यों किया गया? साफ है कि भाजपा सरकार अपने ही चुनावी वादों से मुकर रही है। केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार का मामला कहा दिया आनंद शुक्ला ने कहा कि केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि एनएचएम कर्मचारियों का नियमितीकरण राज्य सरकार का विषय है, यानी अधिकार राज्य सरकार के पास है। फिर इस ‘डबल इंजन’ की सरकार को दिक्कत क्या है? हम साफ चेतावनी देना चाहते हैं कि यदि किसी भी एनएचएम कर्मचारी को प्रताड़ित किया गया या जबरन दबाव बनाया गया तो कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर इसका कड़ा विरोध करेगी। कांग्रेस पार्टी एनएचएम कर्मचारियों की लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ी है। समाधान निकालने के बजाय सरकार दमन का रास्ता अपना रही कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि, छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से देर शाम एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल को लेकर चेतावनी जारी की गई है। मुझे लगता है कि कर्मचारियों से बातचीत करने और उनकी मांगों का समाधान निकालने के बजाय सरकार दमन का रास्ता अपना रही है। यह रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे सभी सरकारी कर्मचारियों में गलत संदेश जाएगा। यही भाजपा सरकार का असली चेहरा है, जो संवाद की जगह दबाव और डर की राजनीति कर रही है। हालांकि सरकार की इस सख्ती का कोई असर संविदा कर्मचारियों पर दिख नहीं रहा है। कर्मचारियों न सोमवार को रायपुर के तूता धरना स्थल पर रोजगार मेला लगाया। इस मौके पर अपना विरोध दिखाने के लिए किसी कर्मचारी ने गुपचुप का ठेला लगाया, तो किसी ने भेलपुरी का। कुछ फरा और चीला बेचते हुए भी नजर आए। देखिए पहले ये तस्वीरें… NHM कर्मचारी दे चुके हैं सामूहिक इस्तीफा इससे पहले NHM कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा देकर स्वास्थ्य विभाग को झटका दिया था। रायपुर में 1600, दुर्ग में 850 और रायगढ़ में 500 कर्मचारियों ने इस्तीफा सौंपा। हालांकि, रायपुर NHM कर्मचारियों के इस्तीफे को लेकर CMHO डॉ. मिथिलेश चौधरी ने कहा कि ज्ञापन लिया गया है, लेकिन इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने 3 सितंबर को 25 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। इसमें NHM संविदा कर्मचारी संगठन के प्रदेश संरक्षक हेमंत सिन्हा और महासचिव कौशलेश तिवारी के नाम भी शामिल हैं। इसके बाद से NHM कर्मियों का विरोध प्रदर्शन भी तेज हो गया है। स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने की कगार पर हैं। देखिए ये 3 तस्वीरें- सिस्टम दबाव बनाने की कोशिश कर रहा इस कार्रवाई पर NHM संविदा कर्मचारियों का कहना है कि सिस्टम दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। बातचीत के रास्ते शासन-प्रशासन स्तर पर बंद कर दिए गए हैं। ऐसे में प्रोटेस्ट ही एक मात्र विकल्प है, जो जारी रहेगा। बता दें कि, कर्मचारियों ने अलग-अलग तरह से प्रदर्शन किया। पीएम-सीएम और स्वास्थ्य मंत्री का मुखौटा पहनकर डांस किए। खून से लेटर भी लिख चुके हैं। बर्खास्तगी का आदेश… 18 अगस्त से हड़ताल पर हैं कर्मचारी छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) संविदा कर्मचारी 18 अगस्त से हड़ताल पर हैं। इसके चलते स्वास्थ्य सेवाएं ठप हैं। NHM कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अलग-अलग तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। खून से सरकार को लेटर तक लिख चुके हैं। वहीं सरकार NHM कर्मियों की 10 में से पांच मांगें पूरी करने का आश्वासन भी दे चुकी है। लेकिन बात नहीं बन पाई है। इस बीच सोमवार को हड़ताल पर बैठे सभी NHM संविदा कर्मचारियों को 24 घंटे के भीतर काम पर लौटने का आदेश दिया गया था। आदेश नहीं मानने पर बर्खास्त करने की चेतावनी दी गई थी। जारी रहेगा प्रदर्शन आदेश के जवाब में NHM कर्मी मंगलवार को स्वास्थ्य संचालनालय पहुंचे। यहां कर्मचारियों ने आदेश की प्रति संचालनालय के सामने ही जला दी। संविदा कर्मियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांग नहीं मानी जाएगी, प्रदर्शन जारी रहेगा। सभी जिले के CMHO से हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों की मंगाई गई थी सूची इससे पहले 25 अगस्त को सभी मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र जारी कर 18 अगस्त से गैरमौजूद कर्मचारियों की सूची मांगी गई है। लिखा गया था कि ये सूची नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए चाहिए। अलग-अलग तरीकों से प्रदेश भर में चल रहा प्रदर्शन NHM कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अलग-अलग तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। खून से सरकार को लेटर तक लिख चुके हैं। कर्मचारियों के पैरोडी गाने और डांस सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। धमतरी में छत्तीसगढ़ी गाने ‘मोर पथरा के देवता मानत नई हे वो’ पर डांस कर विरोध जताया गया। जिसका मतलब होता है- मेरे देवता मान नहीं रहे हैं। पुरुष कर्मचारी सीएम विष्णुदेव साय, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का मुखौटा लगाए हुए थे। उनके सामने महिला कर्मचारी पैरोडी गीत पर डांस कर रहीं थीं। इसी तरह ‘तड़पाओगे तड़पा लो’, क्या हुआ तेरा वादा गाने के जरिए भी प्रदर्शन किया गया। देखिए प्रदर्शन की ये तस्वीरें… मंत्री बोले- स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही, NHM कर्मियों को काम पर लौटना चाहिए दैनिक भास्कर से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा था कि, कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है। 10 में से 5 मांगें पूरी करने का आश्वासन NHM कर्मियों को दिया चुका है। बाकी मांग पूरी करना उनके हाथ में नहीं, इसके लिए वो केन्द्र से सिफारिश करेंगे। सांसद विजय बघेल और बृजमोहन अग्रवाल ने हड़ताल को दिया समर्थन भाजपा के दो दिग्गज सांसद बृजमोहन अग्रवाल और विजय बघेल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मियों की हड़ताल को जायज बताया है। इसी बीच भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में डिप्टी सीएम रहे टीएस सिंहदेव ने कहा कि हमने NHM कर्मियों से किया वादा पूरा नहीं किया। इसलिए कांग्रेस चुनाव हारी। NHM कर्मचारी का रायपुर समेत पूरे प्रदेश में धरना, प्रदर्शन और रैलियों का दौर जारी है। भाजपा सांसद विजय बघेल ने कहा कि कर्मचारियों की मांग जायज हैं। हम इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से बात करेंगे। समझिए प्रदर्शन की नौबत क्यों आई NHM कर्मचारियों का आरोप है कि, चुनाव के दौरान भाजपा ने “मोदी की गारंटी” के नाम से जो मेनिफेस्टो जारी किया था। उसमें संविदा कर्मचारियों को 100 दिनों के भीतर नियमित करने का वादा किया गया था। लेकिन 20 महीनों में 160 से अधिक ज्ञापन देने के बाद भी सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। तीन चरणों में शुरू हुआ आंदोलन इसके बाद ये तय किया गया कि चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। NHM संविदा कर्मचारियों ने 3 चरणों में आंदोलन शुरू किया। पहले चरण में आंदोलन सभी जिलों में शुरू हुआ। जो 24 अगस्त तक चला। अब संभागीय स्तर पर आंदोलन आ पहुंचा है। तूता में रायपुर, बलौदाबाजार और गरियाबंद इन तीन जिलों के कर्मचारी पहुंच चुके हैं। स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई। मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई अस्पतालों में तो ओटी और प्रसव सेवाएं पूरी तरह बंद है। अस्पतालों में ताले लटके हुए हैं। हड़ताल के कारण शासकीय अस्पतालों में संस्थागत प्रसव, पैथोलॉजी जांच, एक्स-रे, सोनोग्राफी और टीकाकरण जैसी जरूरी सेवाएं प्रभावित हुई हैं। रेगुलर कर्मचारियों की छुट्टी कैंसिल सबसे ज्यादा असर रात्रिकालीन प्रसव और ऑपरेशन थिएटर्स (ओटी) पर पड़ा है, जो पूरी तरह बंद हैं। इससे गंभीर मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने नियमित कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और उन्हें तुरंत ड्यूटी पर लौटने के आदेश दिए हैं।
आज काम पर नहीं लौटे NHM-कर्मी…16000 पद होंगे खाली:नोटिस देकर नौकरी से निकालेगी विभाग, कांग्रेस बोली-समाधान के बजाय दमन का रास्ता अपना रही सरकार

















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