प्रदेश के छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) घोटाला केस में एक और खुलासा हुआ है। मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा ने अपने परिजन और रिश्तेदारों के नाम से 28 शैल कंपनियां बनाई थीं। इन कंपनियों का संचालन छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों में किया जा रहा था। मोक्षित कार्पोरेशन ने इनसे 162.22 करोड़ रुपए का कारोबार किया और 28.46 करोड़ रुपए के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की चोरी की। इस मामले में इन सभी संस्थाओं और इनसे जुड़ी कुछ और फर्मों(कुल मिलकर 85 फर्मों) को डीजीसीआई रायपुर ने नोटिस जारी किया है। यह खुलासा डीजीसीआई अफसरों ने मोक्षित कार्पोरेशन की इनपुट टैक्स क्रेडिट की जांच रिपेार्ट में किया है। रिपोर्ट में डीजीसीआई ने छत्तीसगढ़ के साथ महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश में भी इस सन्दर्भ में जांच की थी। रायपुर के अफसर 18 महीने से कर रहे थे जांच: डीजीसीआई के रायपुर जोनल ऑफिस के अफसरों ने बताया कि मोक्षित के खिलाफ जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की जांच बीते साल फरवरी में शुरू की गई थी। करीब 18 महीने चली जांच के बाद कार्पोरेशन को आईटीसी के रूप में 28.46 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी का खुलासा हुआ। जांच के दौरान जोनल दफ्तर रायपुर में पदस्थ जीएसटी अफसरों को करीब 200 से अधिक बैंक खातों से करोड़ों रुपए की हेराफेरी (मनी लॉन्ड्रिंग) के साक्ष्य हाथ लगे हैं। मोक्षित ने 74.52 करोड़ रुपए के उपकरण सप्लाई किए, वसूले 132.78 करोड़ : डीजीसीआई अफसरों के मुताबिक मोक्षित ने 278 अलग-अलग कंपनियों से 38.26 करोड़ रुपए के मेडिकल उपकरणों की खरीदी की। यह सीजीएमएससी को 74.52 करोड़ रुपए में बेचे गए। लेकिन, मोक्षित ने सीजीएमएससी से उपकरणों की कीमत 132.78 करोड़ रुपए ली। इन कंपनियों से उपकरण खरीदी के बदले लिया आईटी
सीजीएमएससी घोटाले में खुलासा:मोक्षित के डायरेक्टर ने रिश्तेदारों के नाम 28 फर्में बना टैक्स चोरी की

















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