छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग (सीजीपीएससी) गड़बड़ी मामले में सीबीआई ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी के टीम ने तत्कालीन पीएससी सचिव रिटायर्ड आईएएस जीवन किशोर ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, टामन सोनवानी की बहू दीपा आदिल, निशा कोसले और जीवन किशोर ध्रुव के बेटे सुमित ध्रुव को गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपियों को सीबीआई स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने 22 सितंबर तक सीबीआई रिमांड मंजूर कर ली।। पांचों की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अब तक 12 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इससे पहले रिटायर्ड आईएएस और तत्कालीन पीएससी चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, उनका भतीजा साहिल, नीतेश, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर, कारोबारी श्रवण कुमार गोयल, बेटा शशांक और बहू भूमिका कटियार को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी रायपुर जेल में बंद हैं और अब तक उन्हें जमानत नहीं मिल पाई है। सीबीआई 2021 पीएससी में चयनित 18 उम्मीदवारों की भूमिका की जांच कर रही है। इनमें से अधिकांश उम्मीदवार तत्कालीन सरकार में प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदार हैं। इन्हीं कारणों से इन 18 उम्मीदवारों को अब तक जॉइनिंग नहीं दी गई है। आरोप है कि प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले ही लीक कर दिया गया था और उम्मीदवारों तक पहुंचा दिया गया था। पीएससी के सभी पर्चे लीक थे, एक कॉपी सचिव तक पहुंची, जो रिश्तेदारों को दे दी सीजी पीएससी 2021 की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। इस परीक्षा के प्री और मेन्स दोनों के सभी सेट लीक हुए थे। ये लीक तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक ने चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर के साथ सचिव जीवन किशोर ध्रुव ने मिलकर किया। पर्चे छापने का ठेका कोलकाता के अरुण द्विवेदी की प्रिंटिंग प्रेस मेसर्स एकेडी प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। कंपनी ने प्रिलिम्स के दो पर्चे तैयार किए थे। इसमें सामान्य अध्ययन और छत्तीसगढ़ से संबंधित 100 प्रश्नों का प्रश्न पत्र था। सामान्य अभिरुचि (सीसेट) के 100 प्रश्नों का दूसरा प्रश्न पत्र शामिल था। कंपनी ने प्रश्न पत्र तैयार कर लिया और प्रिंट करने वाले थे। तभी आरती ने प्रिंटिंग कंपनी के मालिक अरुण द्विवेदी को फोन कर पर्चे रिव्यू कराने के लिए बुलाया। जनवरी 2021 में उसका स्टाफ महेश दास सात सेट में प्रश्न पत्र लेकर रायपुर आया। उसने सील बंद पर्चे आरती को सौंपे। आरती पर्चे लेकर घर चली गई। आरती ने उन्हें टामन और ललित के साथ मिलकर खोल लिया और कॉपी करवा ली। बाद में लिफाफा फिर से सील कर महेश को प्रिटिंग के लिए वापस दे दिया गया। साजिश में तत्कालीन सचिव ध्रुव की भी मुख्य भूमिका सामने आई है। उन्होंने अपने बेटे सुमित ध्रुव के लिए पर्चा लिया जो डिप्टी कलेक्टर के लिए चयनित हुए। टामन ने यह पर्चा घर पर साहिल, नीतेश, नीतेश की पत्नी निशा कोसले और दीपा आदिल को दिया। परीक्षा में दीपा जिला आबकारी अधिकारी, निशा डिप्टी कलेक्टर, साहिल डीएसपी और नीतेश डिप्टी कलेक्टर बने। ललित गणवीर ने पर्चा बजरंग पावर एंड इस्पात के डायरेक्टर श्रवण गोयल को दिया। उनके बेटे शशांक, बहू भूमिका ने उससे तैयारी की। दोनों डिप्टी कलेक्टर पद पर चुने गए। आरती को कितने पैसे मिले, जांच जारी सीबीआई यह जांच कर रही है कि आरती वासनिक को इस साजिश से कितने पैसे मिले। हर दस्तावेज पर परीक्षा नियंत्रक के नाते आरती के दस्तखत हैं। प्रारंभिक जांच में टामन सिंह के ट्रांजेक्शन मिले हैं। उन्होंने अपनी प|ी की ग्राम समिति के खाते में बजरंग पावर से 45 लाख रुपए जमा कराए। कुछ और ट्रांजेक्शन भी मिले हैं, लेकिन आरती को इससे क्या फायदा हुआ? इसका सबूत अब तक नहीं मिल पाया। नान घोटाला सरेंडर को पहुंचे शुक्ला, शाम तक नहीं आई ईडी नान घोटाला केस में रिटायर्ड आईएएस डॉ. आलोक शुक्ला शुक्रवार सुबह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी लेकर ईडी कोर्ट पहुंचे। यहां उन्होंने कोर्ट की कॉपी दी और गिरफ्तारी के इंतजार में शाम 5 बजे तक बैठे रहे, लेकिन ईडी की टीम नहीं आई। कोर्ट बंद हुआ तो वे वापस लौट गए। कोर्ट का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट से अधिकृत कॉपी आने पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। इधर, ईडी ने तर्क दिया है कि उन्हें कोर्ट से कॉपी नहीं मिली है। दरअसल, नान घोटाला मामले में आलोक शुक्ला को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। फरार चल रहे रिटायर्ड आईएएस निरंजन, उनके बेटे समेत 3 गिरफ्तार 3200 करोड़ के शराब घोटाले में फरार रिटायर्ड आईएएस निरंजन दास, होटल कारोबारी नीतेश पुरोहित और उसके बेटे यश पुरोहित को ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार किया है। तीनों को शुक्रवार को एसीबी-ईओडब्ल्यू स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्हें 25 सितंबर तक ईओडब्ल्यू रिमांड पर भेज दिया गया। ईओडब्ल्यू का आरोप है कि शराब घोटाले के 800 करोड़ रुपए सिंडीकेट के मुखिया अनवर ढेबर ने जेल रोड स्थित गिरिराज होटल में रखवाए थे। इन पैसों की जिम्मेदारी नीतेश पुरोहित पर थी। यहीं से पैसा नेताओं, अधिकारियों, पार्टी फंड और अन्य जगहों पर भेजा जाता था।
सीबीआई बड़ी कार्रवाई:तत्कालीन पीएससी सचिव ध्रुव, नियंत्रक आरती, टामन की 2 बहुओं समेत 5 गिरफ्तार

















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