सूरजपुर जिले के रेहर नदी पर बना डेडरी एनीकट इंजीनियरिंग का घटिया उदाहरण है। ऐसा उदाहरण की सुनकर हर कोई हैरान रह जाएगा। 27 करोड़ रुपए खर्च कर इस एनीकट को बनाया गया, ताकि यहां पानी रोककर 18 गांवों तक पानी पहुंचाया जा सके, लेकिन इसके निर्माण में इतनी बड़ी लापरवाही बरती गई कि यदि इस एनीकट में पानी रोका गया, तो पूरा एनीकट ढह जाएगा। भारी भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और अफसरों की लापरवाही से बना ये संसाधन शुरू होने से पहले ही ढहने की कगार पर है। एनीकट में दरारें बढ़ रही हैं, दीवारें जवाब दे रही हैं। 18 पिलर में से 8 पिलर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। यानी एनीकट का आधा हिस्सा डैमेज हो चुका है और मिट्टी का कटाव तेज़ी से हो रहा है। हालात को देखते हुए एनीकट में लगी मशीनें और लोहे के एंगल हटाने का टेंडर जारी किया है, ताकि ढांचा और न गिरे। जिस संरचना को पानी रोकना था, वह अब खुद पानी से डर गया है। इसी डर से पानी नहीं रोका जा रहा है। पानी रोका गया, तो एनीकट के बहने का खतरा है। इस योजना से डेडरी सहित 18 गांवों में सिंचाई और पेयजल पहुंचाया जाना था। साइट पर कोई कर्मचारी नहींमछली मारने पहुंच रहे ग्रामीण 27 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी योजना पूरी तरह से फेल हो गई। ग्रामीण इस एनीकट के नीचे मछली मारने पहुंच रहे हैं। एनीकट खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। आलम यह है कि वहां कोई कर्मचारी तक नहीं है। एनीकट में ही पानी नहीं रुक पा रहा है, तो इसके गांव तक पहुंचने का सवाल ही नहीं। ऐसे में 18 गांवों के फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। पहले तीन इंजीनियर सस्पेंडफिर बहाल, अब हुए रिटायर निर्माण में गड़बड़ी सामने आने पर तत्कालीन ईई जीपी पांडेय, एसडीओ एसके तिवारी और उप अभियंता एसके चतुर्वेदी को निलंबित किया गया था। लेकिन कुछ ही महीनों में तीनों को बहाल कर दिया गया और अब वे रिटायर हो चुके हैं। न कोई चार्जशीट, न जुर्माना, न जवाबदेही। भ्रष्टाचार पर कार्रवाई का नाटक हुआ और मामला दबा दिया गया। इसी मामले में तत्कालीन सीई को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था। एक्सपर्ट बोले- डायफ्रॉम वॉल की जगह कट-ऑफ वॉल बनाना पड़ा भारी एनीकट की जांच में शामिल एक सीनियर इंजीनियर ने बताया कि इसकी विफलता का मुख्य कारण नींव में की गई गंभीर तकनीकी चूक है। दरअसल, जिस स्थान पर डायफ्रॉम वाल जैसी वाटरटाइट संरचना बनाई जानी चाहिए थी, वहां कट-ऑफ वाल का निर्माण कर दिया गया। इससे एनीकट की नींव पूरी तरह वाटरटाइट नहीं हो पाई। इससे जलाशय में पानी भरने पर उसके दबाव से रिसाव शुरू हुआ और धीरे-धीरे निर्माण का शीर्ष भाग धंसने लगा। विडंबना ये है कि बिना टेस्टिंग के बिल पास कर दिया। एनीकट को बचाने 18 करोड़ का प्रस्ताव भेजा इधर, एनीकट को बचाने के लिए अब जल संसाधन विभाग ने₹18 करोड़ का मरम्मत का प्रस्ताव मंत्रालय को भेजा। लेकिन यह फाइल धूल फांक रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इंजीनियरों ने काम ठीक नहीं कराया। डेडरी के उप सरपंच यादव प्रसाद कहते हैं कि काम पूरा होने के बाद कुछ घरों में पानी आया था, लेकिन अब तो एनीकट ही ढहने की स्थिति में है। योजना की कहानी
निर्माण में लापरवाही का उदाहरण:घटिया इंजीनियरिंग… एनीकट, जिसे पानी रोकने बनाया वहां यदि पानी रुक गया, तो समूचा स्ट्रक्चर ही ढह जाएगा

















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