रायपुर में तड़के कलेक्टोरेट के रूम की छत ढही:जिस रूम की छत ढही, उससे 50 मी. दूर बैठते हैं कलेक्टर

रायपुर कलेक्टोरेट में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। तड़के सुबह करीब 4.30 बजे कमरा नंबर 8 (एंग्लो रिकॉर्ड रूम) जहां आजादी के समय से यानी 78 साल पुराने दस्तावेज रखे गए थे, वहां की छत ढह गई। यह रूम जहां कलेक्टर बैठते हैं, वहां से महज 50 मीटर की दूरी पर है। रात में इस हादसे के बारे में किसी को पता नहीं लगा। सुबह चौकीदार ने इसे देखा। उसने इसकी जानकारी अफसरों को दी। इसके बाद सुबह 9 बजे तक एसडीआरएफ के जवानों के साथ बड़ी संख्या में मजदूर वहां पहुंचे। रिकॉर्ड रूम की सभी फाइलों को निकालकर रजिस्ट्री​ विभाग के पास खाली पड़े कमरों में पहुंचाया गया। देर शाम तक फाइलों को पहुंचाने का काम चलता रहा। रिकॉर्ड रूम के मेंटेनेंस और दस्तावेजों की खोज के लिए आठ कर्मचारियों का स्टाफ है। करीब हफ्तेभर पहले ही उन्होंने कलेक्टर को बता दिया था कि कमरे की छत जर्जर हो गई है। इसके बाद रिकॉर्ड रूम से हटाकर स्टाफ को हटाकर कमरा नंबर 7 और 9 में उनके बैठने की व्यवस्था कर दी गई। हालांकि दस्तावेज नहीं हटाए गए। रिकॉर्ड रूम 110 साल पुराना, ​इसे अंग्रेजों ने बनवाया था
इतिहासकार रमेंद्रनाथ मिश्र ने दैनिक भास्कर को बताया कि इस कलेक्टोरेट भवन को अंग्रेजों ने 1854 के दौरान बनवाना शुरू किया था। शुरुआत में यह अंग्रेजी फौज का अस्तबल था। बाद में अंग्रेज इसे सरकारी कामों के लिए उपयोग करने लगे। करीब 600 साल पुराने कल्चुरी राजाओं के किले में लगे सिफलिस पत्थरों से अग्रेजों ने इस भवन में लगवाया था। बाद में इस भवन का विस्तार किया गया। करीब 1915 में इस रिकॉर्ड रूम को बनाया गया था। लेकिन बाद में मेंटनेंस नहीं होने से जर्जर हो गया। 13 साल: आठ कलेक्टर फिर भी नहीं बना पाए कंपोजिट बिल्डिंग कलेक्टोरेट की पुरानी बिल्डिंग बेहद कमजोर है। ये सभी कलेक्टरों को पता था। यही वजह है कि सबसे पहले तत्कालीन कलेक्टर डॉ. रोहित यादव ने 2012 में नई कंपोजिट बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन प्रस्ताव पर ध्यान ही नहीं दिया गया। मंत्रालय के अफसरों ने यह तक कह दिया कि नई बिल्डिंग की अभी जरूरत नहीं है। 2017 में रायपुर कलेक्टर रहे ओपी चौधरी ने दोबारा कंपोजिट बिल्डिंग बनाने की मंजूरी के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा, पर काम फाइलों में ही दौड़ता रहा। उनके इस्तीफा देने के बाद डॉ. बसवराजू, डॉ. एस भारतीदासन, सौरभ कुमार, डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे कलेक्टर रहे। लेकिन किसी भी कलेक्टर के कार्यकाल में कंपोजिट बिल्डिंग के लिए एक ईंट तक नहीं रखी गई। वर्तमान कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के कार्यकाल में एक बार फिर ​फाइल मंत्रालय में दौड़ी। पहले इस बिल्डिंग को 2019 में बनाने में 6 करोड़ की लागत तय की गई थी। लेकिन अब लागत बढ़कर करीब 11 करोड़ हो गई। ^रिकॉर्ड रूम से कर्मचारियों को पहले ही दूसरे कमरों में शिफ्ट कर दिया गया था। परिसर में जिस कमरे की छत गिरी वहां केवल पुरानी फाइलें रखी थीं। सभी दस्तावेज सुरक्षित हैं। कंपो​जिट बिल्डिंग की ड्राइंग-डिजाइन बन गई है। एसएसपी दफ्तर को शिफ्ट करे रहे हैं। -डॉ. गौरव कुमार सिंह, रायपुर, कलेक्टर

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