सचिवों व विभागाध्यक्षों की बैठक में सीएम साय के सख्त-निर्देश:जेम पोर्टल से खरीदी में गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई करें, ड्रग्स तस्करी रोकें अफसर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को मंत्रालय में विभागीय सचिवों और विभागाध्यक्षों की मैराथन बैठक ली। सभी सचिवों को सख्त निर्देश दिए कि ड्रग्स तस्करी पर कड़ाई से रोक लगाएं। इसके साथ ही जेम पोर्टल से होने वाली खरीदी में अनियमितता पर सख्त कार्रवाई करें। साय ने पूंजीगत व्यय में तेजी लाने, कामकाज में पारदर्शिता लाने, लोगों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के साथ ही गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस प्रणाली से शासन के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ी है। लगभग सभी विभागों में ई-ऑफिस प्रणाली लागू हो चुकी है। दिसंबर 2025 तक शेष विभाग इसे अनिवार्य रूप से लागू करें। सीएम ने कहा कि बजट में प्रावधानित कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति समय पर दी जाए। मुख्य सचिव विकासशील ने बताया कि वरिष्ठ अफसरों के लिए बायोमैट्रिक अटेंडेंस प्रणाली एक दिसंबर से लागू होगी। इसमें उपसचिव स्तर से ऊपर के अधिकारियों को इसमें अटेंडेंस लगानी होगी। लक्ष्य 2030 और 2्र047: बैठक में नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए विजन डॉक्यूमेंट 2030 का लक्ष्य दोहराया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए हर विभाग को अपनी ज़िम्मेदारी स्पष्ट करनी होगी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
नक्सल प्रभावित जिलों में बुनियादी ढांचे और सड़क निर्माण की प्रगति पर विशेष चर्चा की गई। बताया गया कि पिछले वर्षों में सड़क और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बेहतर काम हुआ है, लेकिन अभी भी कई स्थानों पर चुनौतियां बनी हुई हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन इलाकों में सड़क सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण निर्माण को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य- सभी योजनाएं 2027 तक पूरा करें राज्य सरकार ने लक्ष्य रखा है कि सभी स्वीकृत और चल रही योजनाओं पर अगले छह माह में तेजी से काम होगा और 2027 तक सभी योजनाएं पूरी कर ली जाएंगी। अधूरी योजनाओं को समय पर पूरा न करने से लोगों का भरोसा टूटता है। राज्य सरकार ने पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। बताया गया है कि अब सभी स्वीकृत योजनाओं की प्रशासनिक मंजूरी तत्काल जारी की जाएगी और टेंडर प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को समाप्त किया जाएगा। सभी बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्तर पर होगी। इसी तरह अफसरों से अपेक्षा की गई कि वे फील्ड विजिट पर जोर दें, लंबित फाइलों का निपटारा करें और विभागीय योजनाओं का प्रभावी प्रचार-प्रसार करें। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा, निर्माण कार्यों की समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाए। खास बातें: प्रभारी सचिव हर दो महीने में जिलों का दौरा अनिवार्य रूप से करें। {स्थानीय स्तर पर जनता से मिलें, उनकी समस्याओं को स्थल पर ही हल करें। {लंबित फाइलों और निविदाओं का समय पर निपटारा करें। {फील्ड विजिट को नियमित रूप से आयोजित करें।

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