प्रदेश के आईएएस अफसरों के बनाए एनजीओ राज्यश्रोत (नि:शक्तजन) संस्थान (एसआरसी) में हुई करोड़ों की गड़बड़ी, 30 कर्मचारियों के वेतन में हुआ गबन व अनियमितताओं को लेकर 5 साल बाद सीबीआई सोमवार को दस्तावेज जब्त करेगी। सीबीआई टीम शुक्रवार को समाज कल्याण संचालनालय पहुंची थी। संचालक को दस्तावेज की लिस्ट सौंपी, जिसके बाद संचालक ने दस्तावेज सोमवार को सीबीआई को देने की बात कही। विभागीय अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है। उधर, सूत्र के मुताबिक एसआरसी के बहुत सारे दस्तावेज मिसिंग हैं। गौरतलब है कि 25 मई 2025 को बिलासपुर हाईकोर्ट ने 2017-18 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दोबारा सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। तब राज्य की कांग्रेस सरकार ने सीबीआई को बैन कर रखा था इसलिए एफआईआर भोपाल ब्रांच में दर्ज हुई। 25 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट ने सीबीआई को दोबारा जांच के आदेश दिए और 15 दिन में दस्तावेज सीज करने को कहा। जिसके बाद भोपाल से दर्ज एफआईआर सीबीआई ब्रांच रायपुर को ट्रांसफर कर दी गई। इस दौरान भास्कर ने अपने इन्वेस्टीगेशन में कई बड़े और अहम खुलासे किए। बताया कि 14 सालों तक अस्तित्व में रहे एनजीओ की प्रबंध कार्यसमिति का न चुनाव हुआ, न बैठक हुई और न ऑडिट। बावजूद इसके केंद्र और राज्यों की योजनाओं के करोड़ों रुपए इसके खाते में ट्रांसफर होते रहे। एसआरसी के साल 2005-07 और 2007-14 तक निदेशक रहे राजेश तिवारी के साइन से पैसा निकलते रहे। FIR में तत्कालीन मंत्री रेणुका का नाम नहीं
5 फरवरी 2020 को भोपाल सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में विवेक ढांढ, एमके राउत, आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल (सभी आईएएस), सतीष पांडेय, पीपी सोती, राजेश तिवारी, अशोक
तिवारी, हरमन खलखो, एमएल पांडेय और पंकज वर्मा के नाम हैं। लेकिन इसमें 2004 में समाज कल्याण मंत्री रहीं रेणुका सिंह का नाम नहीं है जबकि एनजीओ के प्रबंध समिति में सबसे ऊपर इनका नाम हैं, साइन भी हैं।
भोपाल में दर्ज FIR रायपुर CBI को ट्रांसफर:आईएएस अफसरों के NGO के दस्तावेज आज जब्त करेगी CBI

















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