चिरमिरी ओपन कास्ट कोयला खदान का मामला:धमाके से सौ मीटर तक बरसे बोल्डर, नौ घायल, गाड़ियों-मशीनों को पहुंचा नुकसान

चिरमिरी ओपन कास्ट कोयला खदान में सोमवार को ब्लास्टिंग से पहले ही विस्फोट हो गया और नौ कर्मचारी घायल हो गए। घटना दोपहर करीब 2.30 बजे की है। कोयला खदान में ओवर बर्डन (ऊपरी मिट्टी) हटाने के लिए रूटीन ब्लास्टिंग की तैयारी की जा रही थी। इस दौरान निर्धारित समय से पहले ही ब्लास्ट हो गया। ब्लास्ट होते ही पत्थर उड़े और कर्मचारी चपेट में आ गए। ब्लास्ट से खदान क्षेत्र में खड़े ट्रक, बोलेरो, मशीनें और अन्य वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है। घटना को लेकर श्रमिक संगठनों ने खदान प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि ब्लास्टिंग के दौरान सतर्कता जरूरी है। समय से पहले बिना सूचना विस्फोट से खदान प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है। ब्लास्टिंग की तैयारी के दौरान ही महिलाकर्मियों समेत 9 कर्मी घायल हो गए। ब्लास्ट के साथ पत्थरों के टुकड़े गिरने लगे, जिससे घटना स्थल पर भगदड़ मच गई। घटना में कृष्णा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के कर्मचारियों सहित ब्लास्टिंग इंचार्ज रविंद्र चक्रधारी, ओवरमेन मनोज दास व कई महिला मजदूर घायल हो गए। हीरामती, दुलारो, दुर्गा, शंकर, शिवकुमार, मानसाय, रवि शंकर सहित अन्य कर्मचारियों को भी चोटें आई हैं। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद इलाज के लिए रेफर किया गया है। ब्लास्टिंग की तैयारी के बीच हुआ ब्लास्ट महिला कर्मी हीरामती और दुलारो पिछले 17 साल से ब्लास्टिंग का काम कर रही हैं। घायल महिलाओं ने बताया कि वे सब ब्लास्टिंग की तैयारी ही कर रहीं थीं कि इसी बीच अचानक ब्लास्ट हो गया। उन पर ऊपर से पत्थर और मिट्टी गिरनी लगी। गनीमत रही कि बड़ा हादसा टल गया और उन्हें हल्की चोटें आईं है। घटना की जानकारी मिलते ही खान प्रबंधन और साथी कर्मियों ने घायलों को फौरन अस्पताल पहुंचाया। खान प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि ब्लास्टिंग से पहले फायर क्षेत्र की गर्मी के कारण अचानक विस्फोट होने की आशंका है। घटना की जांच की जाएगी। घटना के बाद सवालों के घेरे में ब्लास्टिंग प्रोटोकॉल घटना ने खदान क्षेत्र में ब्लास्टिंग सुरक्षा प्रोटोकॉल और सतर्कता प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम तौर पर किसी भी खदान में ब्लास्टिंग से पहले सायरन बजाकर अलर्ट जारी किया जाता है। फिर कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर हटाया जाता है। रास्ते भी ब्लॉक किए जाते हैं और लोगों को खदान क्षेत्र से दूर भेजा जाता है। सोमवार को हुई घटना में इनमें से किसी मापदंड का पालन होता नजर नहीं आया है। श्रम संगठनों ने जताया विरोध, लापरवाही का लगाया आरोप घटना के बाद खदान क्षेत्र में तनाव का माहौल है। श्रमिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि सिर्फ उत्पादन लक्ष्य पूरा करने की जल्दी में प्रबंधन सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर रहा है। श्रमिक नेता कमलेश सिंह ने कहा कि हर बार मजदूरों की जान जोखिम में डाली जा रही है। मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। घटना की खबर मिलते ही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महापौर रामनरेश राय, जिला पंचायत सदस्य विजय अग्रवाल, जनपद अध्यक्ष शशिकला विक्रम सिंह, बजरंगी शाही, कमलेश सिंह, अब्दुल सलीम अस्पताल पहुंचे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *