छत्तीसगढ़ भारतमाला परियोजना घोटाला मामले में EOW ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में 12 बंडलों में 7,600 पन्नों का चालान पेश किया। EOW ने 43 करोड़ के भूमि अधिग्रहण घोटाले में 10 लोगों को आरोपी बनाया है। इन लोगों ने कथित तौर पर जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया। EOW ने हरमीत सिंह खनूजा, उमा तिवारी, केदार तिवारी, विजय जैन, कुंदन बघेल, भोजराज साहू, खेमराज कोसले, पुन्नूराम देशलहरे, गोपाल वर्मा, नरेंद्र नायक के खिलाफ पेश चालान किया है। SDM, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट पर दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया। EOW ने तकनीकी दस्तावेज, मोबाइल चैट्स, बैंक ट्रांजेक्शन और कई गवाहों के बयान को चालान का हिस्सा बनाया है। EOW अब अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच संदिग्ध लेनदेन, फर्जी दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर घोटाले के प्रमाण मिले हैं। जानिए क्या है भारत माला परियोजना ? भारतमाला परियोजना एक राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना हैं, जो भारत सरकार की है। इसके तहत नए राजमार्ग के अलावा उन परियोजनाओं को भी पूरा किया जाएगा जो अब तक अधूरे हैं। इसी के तहत रायपुर से विशाखापट्टनम तक करीब 463 किमी लंबी नई फोरलेन सड़क बनाई जा रही है। जानिए क्या है पूरा मामला भारत माला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण मामले में 43 करोड़ का घोटाला हुआ है। जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया गया। SDM, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट पर दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया। दैनिक भास्कर डिजिटल में खबर छपने के बाद कोरबा डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को सस्पेंड किया गया था। इसके पहले जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सस्पेंड किया गया था। शशिकांत और निर्भय पर जांच रिपोर्ट तैयार होने के 6 महीने बाद कार्रवाई हुई थी। इसके साथ ही निर्भय कुमार साहू सहित पांच अधिकारी-कर्मचारियों पर 43 करोड़ 18 लाख रुपए से अधिक राशि की गड़बड़ी का आरोप है। EOW की टीम सभी आरोपियों से पूछताछ की, जिसमें पता चला कि जमीन अधिग्रहण में करोड़ों रुपए हड़पे गए हैं। जमीन को टुकड़ों में बांटा, 80 नए नाम चढ़ाए राजस्व विभाग के मुताबिक मुआवजा करीब 29.5 करोड़ का होता है। अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन को छोटे टुकड़ों में काटकर 159 खसरे में बांट दिया। मुआवजा के लिए 80 नए नाम रिकॉर्ड में चढ़ा दिया गया। इससे 559 मीटर जमीन की कीमत करीब 29.5 करोड़ से बढ़कर 78 करोड़ रुपए पहुंच गई। अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ मुआवजा राशि निर्धारित की गई। जिसमें से 246 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं 78 करोड़ रुपए का भुगतान अभी रोक दिया गया है। अधिकारियों के ठिकाने पर हुई थी छापेमारी बता दें कि, 25 अप्रैल को EOW ने छत्तीसगढ़ के 17 से 20 अधिकारियों के ठिकाने पर छापेमार कार्रवाई की थी। इनमें SDM, तहसीलदार, पटवारी और राजस्व निरीक्षक समेत राजस्व विभाग के कई अधिकारी शामिल हैं। इनके ठिकानों पर जांच कर दस्तावेजों को जब्त किया गया था। EOW ने रायपुर, महासमुंद, दुर्ग और बिलासपुर में रेड मारी थी। इसमें निर्भय कुमार साहू, जितेन्द्र कुमार साहू, दिनेश पटेल, योगेश कुमार देवांगन, शशिकांत कुर्रे, लेखराम देवांगन, लखेश्वर प्रसाद किरण, बसंती धृतलहरे, रोशन लाल वर्मा, हरमीत सिंह खनूजा, उमा तिवारी, विजय जैन, दशमेश इन्ट्रावेंचर प्रा. लि., हृदय लाल गिलहरे और विनय कुमार गांधी के ठिकाने शामिल हैं। बैक डेट पर दस्तावेजों में गड़बड़ी करने की पुष्टि अवर सचिव के निर्देश पर बनी जांच रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है, कि अभनपुर इलाके में पदस्थ अधिकारियों ने बैक डेट में जाकर दस्तावेजों में गड़बड़ी की और जमीन मालिक को नुकसान पहुंचाया। इसका खुलासा इस बात से अफसरों ने किया, कि अभनपुर के ग्राम नायक बांधा और उरला में चार एकड़ जमीन जो सर्वे से पहले एक परिवार के पास थी। वो सर्वे होने के ठीक कुछ दिन पहले एक ही परिवार के 14 लोगों के नाम पर बांट दी गई। इसके बाद एक ही परिवार के सदस्यों को 70 करोड़ रुपए की मुआवजा का भुगतान कर दिया गया। जांच अधिकारियों ने तत्कालीन अफसरों की इस कार्यप्रणाली का सीधा जिक्र अपनी जांच रिपोर्ट में किया है। NHAI की टीम ने भी जताई थी आपत्ति रायपुर विशाखापट्नम इकोनॉमिक कॉरिडोर में हुई आर्थिक गड़बडी पर NHAI के अधिकारियों ने भी आपत्ति जताई थी। एनएचएआई की आपत्ति के बाद जांच रिपोर्ट को सचिव राजस्व विभाग को भेजा गया था और मुआवजा वितरण रोका गया था। ……………………………
भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला…7600 पन्नों का चालान पेश:EOW ने केदार, हरमीत,भोजराम समेत 10 को बनाया आरोपी, SDM-पटवारी और भू-माफिया ने किया 43 करोड़ का स्कैम

















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