भारतमाला घोटाला…किसानों को डराकर जमीन अपने नाम कराई:दलाल-राजस्व अफसरों की सांठगांठ, फर्जी साइन, बैक डेट में तैयार डॉक्यूमेंट्स से 32 करोड़ मुआवजा लिया

छत्तीसगढ़ भारतमाला परियोजना घोटाला मामले में EOW ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। चार्जशीट में एजेंसी का दावा है कि घोटाला करने के लिए राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने जमीन दलालों के साथ मिलकर सिंडिकेट बनाया था। जमीन दलाल हरमीत सिंह खनूजा समेत कई निजी व्यक्तियों को प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों के पास भेजा गया। दलालों ने किसानों से संपर्क किया और उन्हें बताया कि उनके राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटियां हैं, नामांतरण अधूरा है, सीमांकन नहीं हुआ है। इस वजह से उन्हें मुआवजा नहीं मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि उनका पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम से अच्छा संबंध है, जिससे वे रिकॉर्ड दुरुस्त करा सकते हैं और किसानों को अधिक मुआवजा दिला सकते हैं। इस झांसे में आकर किसानों से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। EOW ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में सोमवार (13 अक्टूबर) को 12 बंडलों में 8000 पन्नों का चालान पेश किया। जिसमें ये खुलासा हुआ है। वहीं, आरोपियों ने 32 करोड़ का घोटाला कर पैसे आपस में बांटे इसका भी जिक्र है। ऐसे किया गया घोटाला, 32 करोड़ आपस में बांटे ऐसे तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज हरमीत खनूजा की पत्नी तहसीलदार है। हरमीत ने विजय जैन, खेमराज कोसले और केदार तिवारी के साथ मिलकर बैक डेट में फर्जी बंटवारा, नामांतरण और ब्लैंक चेक और आरटीजीएस फार्म पर हस्ताक्षर कराए। आईसीआईसीआई बैंक, महासमुंद में खाता खुलवाकर मुआवजे का पैसा कई निजी संस्थाओं में जमा कराया गया और बाद में उसे निकालकर आपस में बांट लिया गया। इन अधिकारियों की भूमिका की जांच ईओडब्ल्यू तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू, आरआई रोशन लाल वर्मा, तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण, पटवारी जितेंद्र साहू, बसंती घृतलहरे, दिनेश पटेल और लेखराम देवांगन की भूमिका की जांच कर रही है। इन सभी को नोटिस जारी किए गए हैं और फिलहाल वे फरार हैं। 3 तरीके से किया गया फर्जीवाड़ा EOW की ओर से पैरवी कर रहे वकील सौरभ पांडे ने बताया कि भारत माला परियोजना में 3 तरह से अपराध किया गया। पहला, नायकबांधा​ तालाब के लिए पहले से ही मुआवजा मंजूर हो चुका था। विभाग से जब इस संबंध में पूछा गया तो पटवारी ने रिपोर्ट सही तरीके से नहीं दी। जिस जमीन के लिए पैसा दिया जा चुका था, उसी जमीन के लिए फिर से पैसा जारी कर दिया गया। दूसरा यह हुआ है कि 2019 एक डेटलाइन थी। इसके मुताबिक अगर इससे पहले खाता विभाजन हो चुका है, तो लोगों को मुआवजे का पैसा पर स्क्वायर फीट के हिसाब से मिलेगा। और अगर विभाजन पहले नहीं हुआ है तो हेक्टेयर के हिसाब से मिलेगा। यहां पर रेवेन्यू ऑफिसर, डिप्टी कलेक्टर और पटवारी ने मिलीभगत कर जमीन का विभाजन 2019 के पहले का दिखाया। इस तरह से ज्यादा मुआवजा दिया गया। अधिकारियों को जमीन दलालों ने मनाया वकील सौरभ पांडेय के मुताबिक इसके अलावा एक और अपराध किया गया है। विनय जैन और हरमीत सिंह खनूजा जमीन की दलाली करते थे। जिन लोगों को कम मुआवजा मिला था, उन लोगों को ज्यादा मुआवजा दिलाने के लिए रेवेन्यू ऑफिसर्स, डिप्टी कलेक्टर्स और पटवारी को इन्होंने ही मनाया। यह सब करने के एवज में इन लोगों को करोड़ों रुपए मिले। हरमीत सिंह और उसके परिवार को करीब 23 करोड़ रुपए मिले हैं। जिन लोगों को ज्यादा मुआवजा मिला उनके अकाउंट से हरमीत सिंह को पैसे ट्रांसफर हुए हैं। वहीं जैतूसाव मठ से संबंधित एक जमीन थी। महिला आरोपी उमा तिवारी ने बताया कि जमीन का एक टुकड़ा उसके नाम पर कर दिया गया था। जमीन के नाम पर उसने मुआवजा लिया। लेकिन जांच में सामने आया कि जमीन अब तक उसके नाम पर हुई ही नहीं थी। ………………………. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला…8000 पन्नों का चालान पेश: जमीन दलाल हरमीत को मिले 23 करोड़; रेवेन्यू ऑफिसर, SDM-पटवारी को साथ लिया; 3 तरीके से फर्जीवाड़ा छत्तीसगढ़ भारतमाला परियोजना घोटाला मामले में EOW ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में 12 बंडलों में 8000 पन्नों का चालान पेश किया। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने 43 करोड़ के भूमि अधिग्रहण घोटाले में 10 लोगों को आरोपी बनाया है। इन लोगों ने कथित तौर पर जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया। पढ़ें पूरी खबर…

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