नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के मेंबर भूपति उर्फ सोनू दादा ने अपने 60 साथियों के साथ सरेंडर कर दिया है। उस पर छत्तीसगढ़ समेत 4 राज्यों में 2 करोड़ रुपए का इनाम था। सरेंडर छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में हुआ। सरेंडर करने वाले माओवादियों ने अपने 54 हथियार भी पुलिस को सौंपे हैं, जिनमें जिसमें 8 एके-47 शामिल हैं। सोनू ने सरेंडर क्यों किया, इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। सोनू ने सरेंडर का मन करीब दो महीने पहले ही बना लिया था। दरअसल, नक्सलियों के महासचिव रहे गगन्ना उर्फ बासव राजू उर्फ नंबाला केशव राव को 21 मई को अबूझमाड़ इलाके में सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। उसकी मौत के बाद नए महासचिव की नियुक्ति होनी थी। सोनू को उम्मीद थी कि उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और नक्सलवाद के प्रति उसके समर्पण को देखते हुए संगठन का नया महासचिव उसे ही बनाया जाएगा। इस दौड़ में देवजी का नाम भी शामिल था, जिसमें देवजी ने बाजी मार ली। बताते हैं कि सोनू इसी के बाद से संगठन से नाराज था। इस बीच उसने अपनी पत्नी तारक्का से संपर्क किया, तो उसने भी सरेंडर के लिए प्रेरित किया। सोनू की पत्नी तारक्का ने कुछ महीने पहले ही गढ़चिरौली में सरेंडर किया था। अभी वह गढ़चिरौली में ही रह रही है। ऐसे में सोनू ने सरेंडर के बाद पत्नी के साथ रहने गढ़चिरौली को चुना। सोनू तीसरा मोस्ट वांटेड था, CBI-NIA-IB के रडार पर था सोनू दादा के साथ सरेंडर करने वाले 60 नक्सलियों में करीब दस डीवीसीएम भी शामिल हैं। सोनू पर अलग-अलग राज्यों में 200 से ज्यादा अपराध दर्ज हैं। 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की हत्या की प्लानिंग या सीधे हत्या में शामिल रहा। आदिवासी इलाकों में लेवी वसूली का मास्टरमाइंड रहा है। यही वजह है कि वह सीबीआई, आईबी और एनआईए जैसी देश की टॉप एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल टॉप-3 नक्सलियों में एक है। उसके अलावा नक्सल संगठन का मौजूदा महासचिव देवजी और दुर्दांत नक्सली हिड़मा का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है। सबसे पहले सोनू ने एक पर्चे के जरिए सरेंडर करने की बात कही थी और कहा था कि अभी फोर्स का दबाव ज्यादा है ऐसे में सरेंडर अच्छा विकल्प है। वैसे भूपति का पूरा परिवार शुरुआत से ही नक्सली संगठन से जुड़ा रहा है। भाई किशन नक्सली कमांडर रह चुका है। जो मारा जा चुका है। किशन की पत्नी सुजाता भी नक्सल कैंपों में ट्रेनर रही। किशन के मारे जाने के बाद सोनू और उसकी पत्नी तारक्का ने सुजाता का साथ दिया था। इसके बाद सबसे पहले सुजाता ने तेलंगाना में सरेंडर किया। सुजाता नक्सली कैंपों की ट्रेनर मानी जाती है। इसके अलावा सोनू दादा उर्फ भूपति और उनकी पत्नी लंबे समय से नक्सली विचारधारा से जुड़कर काम कर रहे थे। इनका कार्य क्षेत्र सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर के साथ ही दूसरे राज्य छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश तेलंगाना ओडिशा और झारखंड भी रहा है। इधर, मुखबिरी के शक में भाजपा नेता की गला घोंटकर हत्या जिले के इलमिडी थाना क्षेत्र में नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाते हुए भाजपा नेता को मौत के घाट उतार दिया। जानकारी के मुताबिक, उसूर तहसील के मुजलाकांकेर निवासी सत्यम पुनेम करीब 20 सालों से भाजपा से जुड़े थे। सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात नक्सली उनके घर पर पहुंचे और घर से उन्हें घसीटकर निकाला। इसके बाद रस्सी से गला घोंटकर सत्यम की हत्या कर दी। सुबह ग्रामीणों ने सत्यम का शव देख पुलिस को जानकारी दी। पुलिस को शव के पास ही नक्सलियों का एक पर्चा भी मिला है।
नक्सल संगठन में फूट उजागर:महासचिव नहीं बनने से खफा चर्चित नक्सली भूपति का 60 साथियों के साथ आत्मसमर्पण

















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