निष्क्रिय खातों की रकम खाताधारकों या वारिसों को लौटाई जाएगी, इसी महीने कैंप लगाएंगे बैंक

बड़ी राहत- छत्तीसगढ़ के बैंकों में 150 करोड़ से ज्यादा की रकम जाम, दस्तावेज जमा करने के बाद लोगों को वापस मिलेंगे छत्तीसगढ़ के बैंकों में एक लाख से ज्यादा निष्क्रिय खातों में पड़ी 150 करोड़ से ज्यादा की रकम लौटाने के लिए रिजर्व बैंक खाताधारकों या उनके वारिसों को एक मौका देने जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने विशेष सूचना जारी कर कहा है कि बैंकों के निष्क्रिय खाते (2 साल से ज्यादा और 10 वर्ष तक निष्क्रिय) में जो रकम जमा है या जिस पर किसी का दावा नहीं है, उसे आरबीआई के डीईए फंड में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इस रकम को खाताधारक या उनके कानूनी वारिस वापस ले सकते हैं। ऐसे ही लोगों की सुविधा के लिए अक्टूबर से दिसंबर तक छत्तीसगढ़ के सभी मुख्य शहरों में शिविर लगेगा। खाताधारक चाहें तो निष्क्रिय खातों को दोबारा शुरू भी करवा सकते हैं। जानिए कैसे रकम वापस पा पाएंगे… फ्रीज खातों से पैसा वापस पाने की प्रक्रिया के बारे में वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं… सामान्य लोग कैसे वापस ले सकेंगे पैसे?
– जिस बैंक में खाता है वहां जाना होगा भले ही वो आपकी नियमित ब्रांच न हो। {आधार, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र या ड्राइविंग लाइसेंस के साथ फॉर्म दें। {खाते का सत्यापन करने के बाद उस रकम को ब्याज के साथ वापस ले सकेंगे। आपके खाते में पैसा है या नहीं, ये कैसे पता लगेगा?
– संबंधित बैंक की वेबसाइट पर जाकर खाता नंबर डालकर जाना जा सकता है। इसके अलावा आरबीआई के UDGAM पोर्टल https://udgam.rbi.org.in पर लॉग इन कर इसकी जानकारी ली जा सकती है। इसमें अभी 30 बड़े बैंकों की जानकारी अपलोड है। अधिकारी जानकारी के लिए https://rbikehtahai.rbi.org.in और www.rbi.org.in पर भी लॉग इन कर सकते सकते हैं। आरबीआई के अधिकारिक वॉट्सएप नंबर 99990-41935 पर भी एसएमएस कर जानकारी ली जा सकती है। खाता नंबर भूल गए हैं तो?
– इसके लिए जिस बैंक में खाता था वहां जाना होगा। बैंक वाले जिस नाम से खाता था उसका अकाउंट नंबर आपको उपलब्ध करवा देंगे। इसके लिए आपको आधार और पैन कार्ड की कॉपी साथ लेकर जाना होगा। जिनके नाम पर खाता है़ उनकी मृत्यु होने पर?
– इसके लिए जरूरी होगा कि मृत व्यक्ति ने अपना नॉमिनी किसी को बनाया हो। जिसे नॉमिनी बनाया होगा वो ऐसी रकम पर दावा कर सकते हैं। इसके लिए मृत व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा। अगर नॉमिनी नहीं बनाया है, तो बैंक वारिस के दावे की पुष्टि के लिए दावेदार से अनापत्ति प्रमाण पत्र और एफिडेविट मांग सकता है। शिविर के लिए बैंक वाले क्या सूचना देंगे?
हां, डोरमेंट अकाउंट से रकम वापसी के लिए राजधानी समेत राज्य के सभी जिलों में अक्टूबर से दिसंबर तक शिविर आयोजित होंगे। शिविर कब और कहां लगेगा इसकी सूचना बैंक वाले देंगे। शाखाओं में नोटिस लगाया जाएगा। आरबीआई की वेबसाइट से भी जानकारी ली जा सकती है। शिविर में सभी दस्तावेजों के साथ लोग जा सकते हैं। पैसे वापसी के लिए क्या कोई शुल्क भी लगेगा?
– न​हीं, आरबीआई ने साफ कर दिया है कि ऐसे इनएक्टिव खातों को दोबारा शुरू करने के लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा। लोग इन खातों से रकम भी वापस ले सकेंगे।
बैंकों ने निष्क्रिय मानकर जिन खातों को बंद किया है उनमें सेविंग और करंट दोनों शामिल हैं। इनमें महिलाओं और ज्वाइंट अकाउंट वाले खातों की संख्या भी ज्यादा है। महिलाएं अपने पतियों या बच्चों से अलग होने के बाद खातों का उपयोग नहीं करती हैं। इस वजह से ऐसे खाते पहले बंद हो जाते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे युवाओं के खाते शामिल हैं जो किसी चेक या स्कॉलरशिप के लिए खाते खुलवाते हैं और बाद में उसमें कोई ट्रांजेक्शन नहीं करते हैं। खाता निष्क्रिय क्यों होता है, ऐसे समझिए…
– आरबीआई की अधिसूचना के अनुसार किसी भी बचत या चालू बैंक खातों में दो साल तक कोई लेन-देन नहीं होता है तो ऐसे ही खातों को बैंक निष्क्रिय खाते की श्रेणी में डाल देता है। इस तरह के निष्क्रिय खाते में न तो आप पैसा जमा कर सकते हैं न ही उसमें जमा रकम निकाल सकते हैं। यहां तक कि डिजिटल लेनदेन जैसे यूपीआई, आरटीजीएस, एनईएफटी और आईएमपीएस भी इसमें काम नहीं करते हैं। यानी निष्क्रिय खातों को जब तक दोबारा सक्रिय नहीं कराया जाता रकम वैसे ही खातों में जमा रहेगी। रायपुर के ही निष्क्रिय खातों में 60 करोड़ पड़े
बता दें कि आरबीआई के नियमानुसार किसी भी खाते में 2 साल तक किसी भी तरह का लेन-देन नहीं होने पर बैंक उसे निष्क्रिय की सूची में डाल देता है। प्रदेश में इनकी संख्या 1 लाख के पार पहुंच गई है। अभी राज्य में सबसे ज्यादा रायपुर में इनएक्टिव खाते हैं। राजधानी के अलग-अलग बैंकों में 60 करोड़ से ज्यादा की रकम ऐसी है जिसे लेने कोई नहीं आ रहा है।

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