बिलासपुर में बगैर सुरक्षा के बारूद फैक्ट्री संचालित:हादसे के बाद भी सबक नहीं, पटाखा फैक्ट्री-गोदाम में नौसीखिए मजदूर बना रहे बम

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नियमों को ताक पर रखकर पटाखा बनाने के लिए लाइसेंस जारी कर दिया गया है। शहर से लगे सरकंडा क्षेत्र के जिस जगह पर यह पटाखा फैक्ट्री है, वहां केवल छोटे-छोटे तीन कमरे बने हैं, जहां मजदूर खुले बदर बारूद के ढेर पर बैठकर पटाखे बना रहे हैं। यही हाल शहर में संचालित पटाखा दुकान और गोदामों का है। नियमों की बात करें तो पटाखा फैक्ट्री ही नहीं गोदाम में आगजनी और हादसे रोकने के लिए सुरक्षा मानक तय किए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है। जैसे कि गोदाम का निर्माण आग प्रतिरोधी सामग्री से होना चाहिए। गोदाम के अंदर आग बुझाने के उपकरणों की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा गोदाम और दुकान के आसपास के क्षेत्र में धूम्रपान पर सख्त पाबंदी होनी चाहिए। 16 अक्टूबर को दैनिक भास्कर की टीम ने ग्राम बैमा में बने पटाखा फैक्ट्री पहुंचकर रियलिटी चेक की, रिपोर्टर यहां ग्राहक बनकर फैक्ट्री में पहुंचा। यहां जंग लगी लोहे की पुरानी गेट के किनारे चौकीदार का घर था। अंदर आवाज लगाने पर चौकीदार बाहर आया। उसके कमरे के नजदीक शेड के नीचे सोरा (अमोनियम क्लोराइड), गंधक और अन्य विस्फोटक बनाने की बोरियां बरामंदे में खुली पड़ी थी। चौकीदार कृष्ण कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि फैक्ट्री इमरान खान (पप्पी) की है और उसकी पटाखे की दुकान कोतवाली थाने के सामने ज्वाली नाला के पास है। पिछले साल पटाखा गोदाम में लगी थी भीषण आग शहर के पटाखा गोदाम में पिछले साल 24 सितंबर को भीषण आग लगी थी। आग की लपटें तेजी से उठने के साथ यहां रखे बद से धमाकों की आवाजें गूंजने लगीं, जिससे आसपास के रहवासी दहशत में आ गए और घर छोड़कर बाहर निकल गए। भीषण आग से आस-पास अफरा-तफरी मच गई थी। घटना तोरवा थाना क्षेत्र के गुरु नानक चौक के पास हुई थी। यहां अवैध रूप से पटाखों को डंप कर रखा गया था। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद 8 फायर ब्रिगेड की मदद से आग को काबू में किया जा सका। जिला प्रशासन ने इस मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई थी। लेकिन, रिपोर्ट में क्या हुआ इसका अब तक पता नहीं चल सका है। वहीं, आगजनी की घटना के बाद भी इस बार पटाखा फैक्ट्री और गोदामों की सुरक्षा का परीक्षण तक नहीं कराया गया है। फैक्ट्री में केवल पटाखों का निर्माण बातचीत के दौरान जब रिपोर्टर ने पूछा कि पटाखा कहां मिलेगा तो चौकीदार ने कहा यहां केवल पटाखे बनाने का काम चलता है। पटाखों की बिक्री दुकान से होती है। यहां सीधे तौर पर पटाखा नहीं मिलता। पटाखा चाहिए तो दुकान से ले लीजिए। छोटे-छोटे तीन कमरों में मजदूर बना रहे थे बम फैक्ट्री यानी की खुली मैदान के अंदर छोटे-छोटे तीन कमरे बने हुए थे। 8×8 फीट के कमरों में बैठकर मजदूर बम सहित अन्य पटाखे बना रहे थे। एक कमरे में बम बनाकर पैकेट में रखे हुए थे और बाहर बारूद व पटाखों के छिलके बिखरे हुए थे। दूसरे कमरे में छह कर्मचारी बिना शर्ट पहने बारूद के ढेर पर बैठकर पांच नंबर साइज के ”टॉप टाइगर” बम बना रहे थे। मौके पर बहुत सारा बारूद, कागज के कवर और रस्सी के रोल पड़े थे। 5.41 एकड़ का है प्लाट जिस जगह पर यह प्लाट है, उसके किनारे नदी है। लेकिन, यहां आग बुझाने या हादसों से निपटने के लिए किसी भी तरह के उपकरण या सुरक्षा का उपाय नहीं था। प्लॉट के मालिक के बारे में चौकीदार ने बताया कि पूरा प्लॉट 5.41 एकड़ उनके मालिक के नाम पर है। दो दिन पहले जीएसटी की टीम भी पहुंची थी मौजूद चौकीदार कृष्ण कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि वह फैक्ट्री में 7 साल से चौकीदारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री से संबंधित दस्तावेज सही हैं। दो दिन पहले कारखाने में जीएसटी की टीम भी आई थी, कुछ देर रुककर जांच करने के बाद वहां से चली गई। सोरा, गंधक और चारकोल पाउडर से बना रहे बारूद इस कारखाने में ग्रामीण बिना किसी एक्सपर्ट के सोरा (अमोनियम क्लोराइड), गंधक (सल्फर) और चारकोल पाउडर (कोयले का चूरा) मिलाकर बारूद तैयार कर रहे हैं। इन्हें मिलाने की सटीक मात्राओं की जानकारी उन्हें नहीं है, वे अनुमान से तीनों पाउडरों को मिलाकर बारूद बनाते हैं। जिले में केवल दो के पास पटाखा बनाने का लाइसेंस जिला प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार बिलासपुर में केवल दो व्यक्तियों (तखतपुर के करीन फायरवर्क्स टाडा और चांटीडीह निवासी मोहम्मद सलीम) के नाम पर पटाखा बनाने का लाइसेंस दर्ज है। इनमें से तखतपुर में पटाखा बनाने का काम सालों पहले बंद हो चुका है। फैक्ट्री ही नहीं गोदामों में भी नहीं है सुरक्षा के उपाय शहर में स्थायी 24 और अस्थायी पटाखा कारोबारियों की संख्या 160 से अधिक है। 16 स्थायी कारोबारियों में किसी को 100 किलोग्राम तो किसी को 1100 किलो ग्राम बारूद रखने की अनुमित प्रशासन ने विस्फोटक अधिनियम 2008 के तहत प्रदान की है। वहीं अस्थायी पटाखा दुकान लगाने वालों को 30 दिनों से कम का लाइसेंस दिया जाता है। इन्हें बड़े पटाखों में 100 किलोग्राम और चायनीज पटाखे 500 किलो ग्राम तक रखने की अनुमति दी जाती है। पटाखा व्यापारियों का एक वर्ग ऐसा भी है जो सीधे भारत सरकार वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय पेट्रोलिम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) से भी लाइसेंस ले रखे हैं। इनकी संख्या कितनी है इसका पता कलेक्टर कार्यालय को भी नहीं है। प्रशासन ने इन्हें गोदाम बनाने के लाइसेंस तो दे दिया है। लेकिन, यहां भी सुरक्षा के कोई उपाय नहीं है। शहर के रिहायशी इलाकों में दुकान और गोदाम शहर के खपरगंज में पटाखों के तीन लाइसेंसी दुकानें हैं। इसके साथ ही जूनी लाइन में एक, गांधी चौक के पास दो, जवाली पुल के पास दो, बैमा में एक गोदाम, राजकिशोरनगर में एक, गोलबाजार में एक, रतनपुर पुराना पोस्ट ऑफिस के पास एक लाइसेंसी दुकानें हैं। लेकिन, शहर के बीच संचालित दुकान और गोदामों में सुरक्षा के कोई उपाय नहीं है। आग लगने या हादसा होने पर नगर सेना के फायर ब्रिगेड के भरोसे दुकान और गोदाम चल रही है। नियमों को दरकिनार कर संचालित हो रही फैक्ट्री SDM बोले- नियमों का पालन करना है जरूरी एसडीएम मनीष साहू का कहना है कि पटाखा फैक्ट्री हो या गोदाम। इनकी सुरक्षा के लिए शासन ने मापदंड तय किया है। समय-समय पर संबंधित विभाग के अधिकारी यहां निरीक्षण करते हैं। अगर, गैरकानूनी तरीके से ऐसा काम कराया जा रहा है और सुरक्षा नियमों का पालन नहीं हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। यदि संबंधित एक्टिविटी को लेकर साक्ष्य मिलता तो निश्चित रूप से ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ………………………… इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… बिलासपुर के पटाखा गोदाम में लगी भीषण आग, VIDEO:धमाके से गूंजा इलाका; ढाई घंटे बाद 8 फायर-ब्रिगेड गाड़ियों ने पाया काबू छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के पटाखा गोदाम में भीषण आग लगी है। देखते ही देखते आग की लपटें तेजी से उठने लगीं। कुछ ही देर में गोदाम में रखे पटाखे फूटने लगे। भीषण आग से आस-पास अफरा-तफरी मच गई। पढ़ें पूरी खबर…

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