पीएम आवास 2.0 में निकाय सुस्त:केंद्र सरकार ने मांगे 50 हजार लोगों के नाम, राज्य से सिर्फ 11 हजार ही भेज सके

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)-2.0 में छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। केंद्र सरकार ने राज्य को 50 हजार आवासों का कोटा स्वीकृत किया है, लेकिन अब तक पात्र हितग्राहियों की पहचान का काम पूरा नहीं हो सका है। राज्य सरकार को भेजी जाने वाली सूची अभी अधूरी है क्योंकि अधिकांश निकाय न तो आवेदन मंगा पाए हैं और न ही पात्र हितग्राहियों का चयन कर सके हैं। सूत्रों के अनुसार, लक्ष्य के विरुद्ध अब तक केवल 23 प्रतिशत हितग्राही ही खोजे जा सके हैं, जबकि कई जिलों में यह आंकड़ा शून्य है। इससे योजना की प्रगति बुरी तरह प्रभावित हुई है। राज्य सरकार ने निकायों की सुस्ती पर नाराजगी जताते हुए सख्त चेतावनी दी है और 30 नवंबर तक की नई डेडलाइन तय की है। इस तिथि तक सभी नगरीय निकायों को पात्र हितग्राहियों के 100 प्रतिशत नाम तय कर प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद राज्य सरकार डीपीआर तैयार कर केंद्र को भेजेगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि तय समयसीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो निकायों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी। डेडलाइन के बाद होगी कार्रवाई
सभी निकायों के लिए प्रधानमंत्री आवास का लक्ष्य तय है। साथ ही सभी निकायों को इस लक्ष्य के अनुसार 30 नवंबर तक पात्र हितग्राहियों को चिन्हित कर नाम सरकार के पास भेजना होगा। इस डेडलाइन तक लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले निकायों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी। नगरीय प्रशासन विकास विभाग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी 189 निकायों को पत्र लिखा है। बता दें कि इसी महीने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की चौथी बैठक हुई थी। इसमें केंद्र सरकार से प्राप्त लक्ष्य के अनुसार सभी नगरीय निकायों से पात्र हितग्राहियों के प्रस्ताव लेकर केंद्र काे भेजने के लिए कहा गया था। 9 जिलों की स्थिति चिंताजनक
प्रदेश के 9 जिलों की स्थिति चिंताजनक है। इनमें सबसे खराब हालत दंतेवाड़ा और नारायणपुर की है। वहां अब तक एक भी हितग्राही का चयन नहीं हो सका है। दंतेवाड़ा में 565 और नारायणपुर में 184 आवास बनाए जाने हैं। इसी तरह मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में 1,278 आवास बनाए जाने हैं, मगर केवल 3 प्रतिशत हितग्राही ही चिह्नित किए जा सके हैं। बस्तर में 4 प्रतिशत, बीजापुर में 9 प्रतिशत, सुकमा और दुर्ग में 11-11 प्रतिशत, जबकि जशपुर और महासमुंद में केवल 13-13 प्रतिशत पात्र हितग्राही खोजे गए हैं। आवास के लिए नया डीपीआर
पीएमएवाई शहरी-2.0 के तहत प्रदेश में 50 हजार मकान बनाए जाने हैं। इसमें से 11282 आवास के लिए डीपीआर भेजा जा चुका है। राज्य सरकार ने 39,220 आवास का डीपीआर बनाने के लिए नया लक्ष्य रखा है। डीपीआर एक महीने में तैयार करना होगा। नए लक्ष्य के बाद आवासों की संख्या 50,502 हो जाएगी।

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