छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम मोहंदीपाट में 25, 26 और 27 अक्टूबर को देव मड़ई का आयोजन किया जा रहा है। जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई है। तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में प्रदेशभर से श्रद्धालु पहुंचेंगे।
मुख्य मेला 26 अक्टूबर को आयोजित होगा। इस दौरान धमतरी, दुर्ग, राजनांदगांव, खैरागढ़, मानपुर-मोहला, कांकेर, अंबागढ़ चौकी सहित प्रदेश के करीब 12 जिलों से श्रद्धालु मोहंदीपाट बाबा के दर्शन करने आएंगे। संतान प्राप्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए प्रसिद्ध मान्यता है कि मोहंदीपाट बाबा के दरबार में संतान प्राप्ति, बच्चों की समस्याओं और अन्य मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धालु मन्नत मांगते हैं। जब उनकी इच्छा पूरी होती है, तो वे आभार स्वरूप मिट्टी से बने हाथी और घोड़े की मूर्ति बाबा को अर्पित करते हैं। यह परंपरा वर्षों से यहां चली आ रही है और अब इस स्थान की पहचान बन चुकी है। मेहंदीगढ़ से मिली मोहंदीपाट की पहचान ग्रामीणों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहचान रहे 36 गढ़ों में से एक मेहंदीगढ़ भी है। जिसे अब मोहंदीपाट के नाम से जाना जाता है। इसी वजह से गांव का नाम प्रदेशभर में प्रसिद्ध हुआ है। यहां का प्रमुख धार्मिक स्थल मेहंदीगढ़ के राजा मोहंदीपाट बाबा का मंदिर है। जहां हर वर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं।
मोहंदीपाट में देव मड़ई का आयोजन:संतान प्राप्ति और मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु चढ़ाते हैं मिट्टी के हाथी-घोड़े

















Leave a Reply