छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर और भिलाई-दुर्ग में छठ घाटों में आज शाम छठ व्रती महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी। इसके बाद मंगलवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूजा का समापन होगा। रायपुर में घाटों की सफाई, रोशनी और सजावट का काम पूरा कर लिया गया है। रायपुर में व्रती महिलाएं महादेव घाट पहुंचकर दीप जलाएंगी और पूजा-अर्चना करेंगी। इस दौरान बनारस से आए पंडितों द्वारा खारुन मइया की महाआरती का आयोजन किया जाएगा। वहीं बिलासपुर में घाटों को लाइटिंग से सजाया गया है। अरपा नदी के छठघाट में भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने रूट प्लान तैयार किया है। इसके तहत दोपहर 2 बजे से शुक्रवार सुबह 11 बजे तक इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी। देखिए रायपुर की ये तस्वीरें- रायपुर में 60 से ज्यादा जगहों पर छठ पूजा रायपुर में महादेव घाट के अलावा व्यास तालाब, नवा रायपुर और शहर के 60 से अधिक तालाबों पर भी छठ पूजा के आयोजन होंगे। रायपुर नगर निगम ने तैयारी पूरी कर ली है। संबंधित जोन कमिश्नरों को निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। घाटों पर पंडाल, स्टॉल और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बिलासपुर में छठ महापर्व से पहले अरपा नदी स्थित छठ घाट आकर्षक लाइटिंग से सज गया है। रविवार को छठ व्रतियों ने खरना के साथ ही निर्जला व्रत रखा और शाम को छठी मैया के लिए खास प्रसाद तैयार किया। सोमवार की शाम छठ व्रती डूबते सूर्य देव को अर्घ्य देंगे। तट पर निकलने से पहले पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से दउरा को सिर पर उठाकर लेकर जाएंगे। महिलाएं इस यात्रा में पारंपरिक छठ गीत गाती नजर आएंगी। बिलासपुर के तोरवा छट घाट में यह नजारा देखते ही बनता है। इसके अलावा अब मरीमाई मंदिर स्थित तालाब और कोनी के आसपास अरपा तट पर व्रती पहुंचते हैं। खरना प्रसाद के साथ 36 घंटे का कठिन व्रत सूर्य उपासना के इस महापर्व की विशेषता है कि, यह पूरी भक्ति और संकल्प के साथ मनाया जाता है। यह पर्व न केवल पारिवारिक समृद्धि के लिए होता है, बल्कि जीवन की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी मनाया जाता है। इसमें स्त्री और पुरुष समान रूप से भाग लेते हैं। अज्ञेय नगर निवासी रोशन सिंह ने बताया कि, छठ महापर्व की शुरुआत नहाय खाय के अनुष्ठान से हुई। जिसमें व्रतियों ने सात्विक भोजन किया। दूसरे दिन रविवार को खरना के साथ विशेष प्रसादी बनाया गया। इसके साथ व्रतियों का 36 घंटे का कठिन व्रत भी शुरू हो गया है। इस दौरान व्रती पानी तक ग्रहण नहीं करेंगी। सोमवार की शाम डूबते सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाएगा। छठ पूजा के प्रसाद और फल को एक बांस की टोकरी, जिसे दउरा कहा जाता है। देवकारी में रखकर पूजा शुरू होता है। सूप में नारियल, पांच प्रकार के फल और अन्य पूजन सामग्री रखी जाती है। जिसे घर का कोई एक सदस्य अपने सिर पर रखकर श्रद्धा से छठ घाट की ओर ले जाते हैं। आकर्षक लाइटिंग, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पूजा करने खाली पांव आ रहे श्रद्धालुओं के लिए घाट पर कारपेट बिछाए गए हैं। ट्रैफिक कंट्रोल करने यातायात विभाग ने विशेष व्यवस्था की है। वहीं, सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इधर, व्रतियों ने घरों में आम की लकड़ी जलाकर प्रसाद बनाया गया। सोमवार की शाम इसे नए सूपा और टोकरी में रखकर छठ घाट पहुंचेंगे। तिफरा महामाया तालाब, जबड़ापारा सरकंडा, रेलवे क्षेत्र मरीमाई मंदिर, कोनी में भी मां छठ की पूजा के लिए तैयारी पूरी हो गई है। श्रमदान कर तैयार किया घाट रविवार को तोरवा छठ घाट में भक्तों ने श्रमदान किया। घाट के आस-पास की सफाई की। सीढ़ियों को साफ किया। वहीं घाट पर रंग लगाए। नदी और घाट की साफ-सफाई प्रवीण झा के नेतृत्व में हुई। प्रवीण झा ने बताया कि तोरवा छठ घाट पर पर्व का यह रजत जयंती वर्ष है। एंट्री और एग्जिट गेट अलग-अलग बनाए गए बिलासपुर में छठ घाट में उमड़ने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए एंट्री और एग्जिट गेट दोनों अलग-अलग बनाए गए हैं। राजकिशोर नगर और मोपका चौक से आने वाले श्रद्धालुओं की एंट्री फॉरेस्ट गेट से होगी। पार्किंग स्थल क्रमांक 1, 2 और 3 से वाहन मोपका रोड से निकलेंगे। अन्य पार्किंग स्थलों से श्रद्धालुओं की वापसी उसी दिशा से होगी, जिस दिशा से वे आए हैं। भारी वाहन 5 डायवर्टेड रूट से गुजरेंगे बिलासपुर यातायात पुलिस ने अगले दो दिन तक छठ घाट व उससे जुड़ने वाली सभी सड़कों पर भारी वाहनों के ट्रैफिक को डायवर्ट किया है। 27 और 28 अक्टूबर को रूट से गुजरने वाले सभी भारी वाहनों को चिल्हाटी मोड़, मोपका तिराहा, बजरंग चौक राजकिशोर नगर, दर्री घाट और महमंद चौक से एंट्री नहीं दी जाएगी।
छठ महापर्व…डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी व्रती महिलाएं:रायपुर में बनारस से आए पंडित करेंगे महाआरती; बिलासपुर में भारी वाहनों की एंट्री बैन

















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