देश के सबसे बड़े छठ घाट बिलासपुर के अरपा तट पर छठ पर्व पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। यहां छठ महापर्व की छटा देखते ही बन रही थी। इस मौके पर छठ व्रतियों ने वेदी बनाकर छठी मइया की पूजा-आराधना की, जिसके बाद उदीयमान सूर्य देव को अर्घ्य देकर अपना कठिन व्रत पूर्ण किया। ऐसी मान्यता है कि छठ पर्व पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बिलासपुर के घाटो में करीब 50 हजार श्रद्धालु पहुंचे थे। ऐसा अनुमान है। देखिए इस खास मौके का ड्रोन वीडियो… सूर्य देव के निकलने का घंटों इंतजार 28 अक्टूबर की सुबह 3 बजे से गाजे-बाजे के साथ लोग दउरी और गन्ना लेकर छठ घाट पहुंचे। पहले घाट छठी मइया का वेदी बनाया और फिर दौरा का पूजा की। विधि-विधान से पूजा आराधना करने के बाद वेदी को विसर्जित किया। जिसके बाद अरपा नदी में दीपदान कर व्रत करने वाले लोग पानी में उतरने लगे। इस दौरान सूर्य देव के निकलने का घंटों इंतजार करते रहे। नई सुहागिन महिलाओं ने की पूजा इस दौरान मन्नत पूरी होने वाली कई महिलाएं अपने घर से जमीन पर लोटते हुए और कुछ बिना चप्पल पहने नंगे पांव छठ घाट पहुंचे। मान्यता है कि नई सुहागिन भी पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए छठ का व्रत रखती हैं। सुरुज चले भिनुसार, दुअरिया छठ मैया के… 27 अक्टूबर की शाम और फिर अगले दिन सुबह अरपा स्थित छठ घाट पर छठ व्रती महिलाएं तांबे के लोटे में जल-दूध लेकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया। भगवान की मंगलकामना की। फिर बैंड बाजे के साथ पुरुषों ने सिर पर दउरा रखा, तो महिलाएं छठ गीत सात घोड़ा पे सवार, सुरुज चले भिनुसार, दुअरिया छठ मैया के…,गाते हुए घर लौटीं। ऐसा ही नजारा गोंड़पारा, जबड़ापारा, कंस्ट्रक्शन कॉलोनी, मरीमाई मंदिर, कोनी का था। इस दौरान पूरे समय लोग छठी मइया की मंगल धुन के साथ उनकी आराधना में लीन नजर आए। खरना का प्रसाद लेकर किया कठिन व्रत छठ पर्व पर रविवार (26 अक्टूबर) को व्रतियों ने मिट्टी के चूल्हे में खरना का प्रसाद बनाकर ग्रहण किया। सोमवार (27 अक्टूबर) की शाम छठ घाट में सामूहिक रूप से डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना की। मंगलवार (28 अक्टूबर) की सुबह उगते सूर्य की आराधना के साथ पर्व का समापन हुआ। महिलाओं ने 36 घंटे कठिन व्रत रखा। सूर्य देव को अर्घ्य देने के साथ ही उनकी उपासना पूर्ण हुई और व्रतियों ने प्रसाद ग्रहण किया। अर्घ्य देने 101 लीटर दूध की व्यवस्था व्रतियों को अर्घ्य देने के लिए छठ पूजा समिति ने 101 लीटर दूध की व्यवस्था की। साथ ही घाट आने वाले सभी व्रतियों को समिति के द्वारा प्रसाद भी वितरित किया। व्रतियों के कपड़े बदलने का स्थान बनाया गया था। वहीं गौरेला, पेंड्रा से आए व्रतियों के रूकने और भोजन की व्यवस्था समिति द्वारा की गई थी। दर्शक पुल से सेल्फी लेते नजर आए। 2 बजे से ही घाट पर पहुंचने लगे श्रद्धालु 28 अक्टूबर की रात 2 बजे से ही गाजे-बाजे के साथ लोगों के दौरा और गन्ना लेकर छठ घाट पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। इस दौरान पहले घाट पर दौरा का पूजा की। जिसके बाद छठी मइया की विधि-विधान से पूजा-आराधना कर अरपा नदी में दीपदान कर व्रत करने वाले लोग एक-एक कर पानी के अंदर गए। कमर तक पानी के बीच उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। चार दिनी पर्व पर दिवाली सा नजारा चार दिनों तक मनाए जाने वाले इस पर्व पर दिवाली के बाद दूसरी दिवाली की झलक नजर आई। इस दौरान श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। करीब 1000 हजार मीटर के इस घाट में अर्घ्य देने वाली व्रतियों की भीड़ नजर आई। दावा किया जा रहा है कि आयोजन में 50 हजार से ज्यादा लोग छठ घाट पर पहुंचे थे।
देश के सबसे बड़े छठघाट का ड्रोन VIDEO:बिलासपुर के अरपा घाट में एक साथ हजारों व्रती महिलाओं ने की पूजा; उगते सूर्य को दिया अर्घ्य

















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