छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सीईओ यशवंत कुमार के मुताबिक प्रदेश के 71.54 फीसदी मतदाताओं को दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। देश में कहीं भी यदि किसी के माता-पिता का नाम मतदाता सूची में है तो उनका नाम काटा नहीं जाएगा। साथ ही 18 साल के हो गए हैं तो मतदाता सूची में नाम जोड़ लिया जाएगा। सरगुजा और बस्तर में वन अधिकार पत्रों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। प्रदेश में किसी भी मतदान केंद्र में 1200 से अधिक वोटर नहीं है। इसलिए यह माना जा रहा है कि बूथ लेवल अधिकारी पांच दिनों में एसआईआर कर लेगा। इसके पहले घर-घर निर्धारित फार्म पहुंचाए जाएंगे। यह फार्म उन सभी लोगों को भरना होगा जिनके नाम वोटरलिस्ट में हैं और जो 18 साल के हो चुके हैं। इसके साथ ही लोगों को चुनाव आयोग द्वारा तय 13 दस्तावेजों में कोई भी एक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। संक्षिप्त मतदाता पुनरीक्षण यानी समरी रिविजन में पुराने बेस को ही आधार मानकर मतदाता सूची से नाम हटाए और नए नाम सप्लीमेंट्री वोटरलिस्ट में जोड़ दिए जाते हैं, लेकिन एसआईआर में नई प्रक्रिया है। यदि किसी का नाम एक से ज्यादा जगहों पर वोटरलिस्ट में है तो सीईओ व आयोग की वेबसाइट में यह पकड़ में आ जाएगा। सीईओ ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड केवल पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल हो सकेगा। ये नागरिकता या जन्म का प्रमाण नहीं माना जाएगा। बताया गया कि प्रदेश में 1 जनवरी 2025 की स्थिति में 2.9 करोड़ मतदाता है। 2004 में एसआईआर के समय बीएलओ नहीं होते थे। एसआईआर: एक नजर राजनीतिक दलों की मांग, इलाके का ही हो बीएलओ इधर, राजनीतिक दलों की सीईओ कुमार व जेसीओ पीएस ध्रुव के साथ लंबी चर्चा हुई। इसमें भाजपा, कांग्रेस, आप, कम्युनिस्ट पार्टी आदि सभी दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि संबंधित बीएलओ उसी इलाके का हो, जो लोगों व क्षेत्रों को पहचानता हो। बीएलओ हर घर में ईमानदारी से पहुंचे ताकि किसी व्यक्ति या परिवार का नाम न कटे। हर बूथ पर राजनीतिक दल भी बूथ लेवल एजेंट रखेंगे। बीएलए की संख्या एक से ज्यादा हो सकती है, ताकि आपात स्थिति में काम प्रभावित न हो। एसआईआर में लगे कर्मचारियों के साथ बीएलए को भी प्रशिक्षण मिले। यदि कोई मतदाता घर पर नहीं मिलता है तो बीएलओ अलग-अलग वक्त पर जाए ताकि उससे मुलाकात हो सके। 13 दस्तावेज देने होंगे 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्म तो जन्मतिथि और जन्म स्थान प्रमाणित करने 13 तरह के दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। माता-पिता की जन्मतिथि व निवास के दस्तावेज प्रमाणित करेंगे। दोनों में से कोई भी भारतीय नागरिक नहीं हैं तो जन्म के समय का वैध पासपोर्ट व वीजा की कापी देनी होगी। भारत के बाहर जन्म होने पर विदेश स्थित भारतीय मिशन द्वारा जारी जन्म पंजीकरण प्रमाणपत्र देना होगा।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू:छत्तीसगढ़ के 71.54% मतदाताओं को कागज दिखाने की जरूरत नहीं

















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