यूकेजी में पढ़ने वाली बच्ची ने रखा छठ व्रत:36 घंटे निर्जला रही, हर परंपरा को निभाया; उगते सूर्य को अर्घ्य देकर संकल्प पूरा किया

बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में एक 6 साल की बच्ची ने छठ व्रत किया। ग्राम सिन्दूर में नेताम परिवार के घर जब छठ की तैयारी चल रही थी तभी वहां रहने वाली अनन्या नेताम (पंछी) ने भी छठ व्रत रखने की जिद की और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ उसने भी इस कठिन व्रत को पूरा किया। बच्ची ने नहाय खाय से लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक का सकंल्प पूरे विधि-विधान से पूरा किया। खरना के दिन प्रसाद खाने के बाद 36 घंटे का उपवास शुरू हो चुका था। अनन्या ने अगले दिन शाम को घाट में डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया और फिर उसके अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया। U-केजी में पढ़ती है अनन्या अनन्या रामानुजगंज के कन्हर वैली पब्लिक स्कूल में यूकेजी में पढ़ती है। घर में दादी, मम्मी और दो अन्य रिश्तेदारों ने भी छठ व्रत किया था। घर वालों ने बताया कि वह बचपन से ही पूजा पाठ उत्साह के साथ करती है। क्षेत्र में बना चर्चा का विषय श्रद्धा और आस्था के महापर्व छठ पर इस अनोखे मामले की चर्चा हर तरफ है। 6 साल की बच्ची की इस अटूट आस्था ने पूरे क्षेत्र को भावविभोर कर दिया है। अनन्या के पिता अजय नेताम, जो एक किसान हैं और माता राजकुमारी नेताम अपनी बेटी की इस भक्ति को देखकर गर्व महसूस कर रहे हैं। जब बच्ची ने जिद की तो लोगों ने भी उत्साह बढ़ाया परिवार के सदस्यों के मुताबिक, जब गांव में छठ की तैयारियां शुरू हुईं, तो अनन्या ने स्वयं व्रत करने की जिद की। पहले तो परिवार और गांव वाले आश्चर्यचकित रह गए, लेकिन बच्ची का दृढ़ संकल्प देखकर सभी ने उसका उत्साहवर्धन किया। महज छह साल की उम्र में अनन्या ने छठ व्रत के सभी नियमों का पालन करते हुए पूरे विधि-विधान से सूर्य देव और छठी मैया की आराधना की। स्थानीय सेंदुर नदी में अर्घ्य अर्पित करते समय जब इस नन्ही बच्ची ने अपने छोटे हाथों से सूर्य को प्रणाम किया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो उठीं। पूरी रात नदी तट पर रहकर परंपराओं का पालन किया गांव के बुजुर्गों ने अनन्या की इस आस्था को दुर्लभ बताया। उनका कहना है कि इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी आस्था और अनुशासन का उदाहरण कम ही देखने को मिलता है। अनन्या ने यह साबित किया है कि भक्ति के लिए उम्र कोई बाधा नहीं होती। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद अनन्या ने उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूरी रात नदी तट पर रहकर व्रत की परंपराओं का पालन किया। आज अनन्या नेताम (पंछी) पूरे इलाके में श्रद्धा, संकल्प और भक्ति का प्रतीक बन चुकी है। लोग उसकी मासूम भक्ति को नमन करते हुए उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा मान रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *