डीएमएफ घोटाला:ईओडब्ल्यू के चार शहरों में 14 जगह छापे, कैश के साथ प्रॉपर्टी के दस्तावेज व फर्जी बिल जब्त

डीएमएफ घोटाले में बुधवार सुबह ईओडब्ल्यू की छह टीमों ने चार शहरों के 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। आधा दर्जन कारोबारियों के अलग-अलग ठिकानों पर सुबह से लेकर देर रात तक जांच चलती रही। तलाशी के दौरान प्रॉपर्टी के दस्तावेज, फर्जी बिल और नगद रकम बरामद की गई। मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए गए हैं। सभी संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि रायपुर के वॉलफोर्ट एन्क्लेव में अशोक कुमार और अमित कोठारी के घर पर छापा मारा गया। इनका कारोबार कृषि कच्चे माल और खाद्य पदार्थों से जुड़ा है। इसके बाद दुर्ग में मेघ गंगा ग्रुप के डायरेक्टर मनीष पारख के घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की गई। शहर में कारोबारी की लाइफ केयर, एविस एडुकॉम, इमेज लैब और महावीर ज्वेलर्स जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं संचालित हैं। तलाशी के दौरान टीम ने डिजिटल साक्ष्य, बैंक स्टेटमेंट, चल-अचल संपत्ति संबंधी दस्तावेजों के अलावा अनेक अन्य महत्वपूर्ण कागजात बरामद किए। मनीष को एजेंसी पूछताछ के लिए रायपुर लेकर आई है। राजनांदगांव में कारोबारी ललित भंसाली, संतोष अग्रवाल और यश नाहटा के घर और संस्थानों में छापा मारा गया। आरके फर्नीचर और राठी फर्नीचर में भी जांच की गई। एक टीम ने धमतरी के सिर्री में अभिषेक त्रिपाठी के घर पर छापा मारा। सभी जगहों से दस्तावेज जब्त किए गए हैं। जानिए डीएमएफ घोटाला छत्तीसगढ़ में 575 करोड़ का डीएमएफ घोटाला हुआ है। हर जिले में जिला खनिज न्यास होता है। इसकी राशि को विकास के लिए खर्च किया जाता है। इसमें ठेका देने और सप्लाई का काम देने के लिए ठेकेदारों से 40-45 प्रतिशत पहले कमीशन लिया गया। इसके बाद उन्हें सप्लाई का काम दिया गया। मोटा कमीशन की वजह से सप्लाई किए गए वस्तुओं की गुणवत्ता निम्न थी। इसमें भारी भ्रष्टाचार किया। यह पैसा नीचे से ऊपर तक गया। इसमें कोरबा कलेक्टर रानू साहू समेत अन्य को आरोपी बनाया गया है। पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

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