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कटघरे में कार्रवाई:कृषि जमीन पर मकान बनाकर कुछ समय बाद बेच देते हैं

शहर के आउटर में सबसे ज्यादा अवैध प्लाटिंग हो रही है। क्योंकि निगम, प्रशासन और पुलिस जब तक हरकत में नहीं आती तब तक कि शिकायत न मिल जाए। तीनों विभागों के अफसरों को पता होता कि अवैध प्लाटिंग हो रही है, लेकिन सबकी मिलीभगत होने की वजह से कोई कार्रवाई नहीं होती। आम लोग जब इस तरह के मामलों में फंस जाते हैं तो वे शिकायत करते हैं। इसके बाद ही मजबूरी में निगम का बुलडोजर वहां पहुंचता है। अवैध प्लाटिंग को रोकने कार्रवाई के नाम पर कभी मुरुम की सड़क काट दी जाती है तो कभी मकानों की दीवारों को सामने से तोड़ दिया जाता है। पूरा निर्माण कभी नहीं तोड़ा जाता है। अफसरों की सबसे बड़ी चूक यह होती है कि कभी भी अवैध प्लाटिंग या अवैध निर्माण की खरीदी-बिक्री पर रोक नहीं लगाई जाती। यही वजह है कि उसी अवैध या जमीन को दोबारा किसी न किसी व्यक्ति को बेच दिया जाता है। अवैध प्लॉटिंग में खरीदी-बिक्री की प्रक्रिया को रोकने के लिए लंबा प्रोसेस है। निगम, तहसील और ​पुलिस की रिपोर्ट के बाद ही कलेक्टर संबंधित खसरा नंबरों की रजिस्ट्री पर रोक लगाते हैं। इस तरह की कार्रवाई कितनी कि जाती है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 10 साल में करीब 300 ही खसरा नंबरों को ब्लॉक किया गया है। राज्य सरकार ने छोटी जमीन की रजिस्ट्री रोकी तो उसका भी तोड़ निकाल लिया
कृषि जमीन पर अवैध प्लाटिंग को रोकने के लिए राज्य सरकार ने 2178 वर्गफीट से कम कृषि जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण, डायवर्सन और बटांकन पर रोक लगा दी है। लेकिन जमीन दलालों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। वे अब दो लोगों के नाम से इतनी ही जमीन की रजिस्ट्री करवा रहे हैं। इससे जमीन पर रजिस्ट्री की रोक भी हट जाती है और लोगों को कम कीमत में उतनी ही जमीन मिल जा रही है। बाद में मौके पर इसी जमीन को बराबर से दो भागों में बांटकर दो लोगों को दे दिया जा रहा है। स्टॉल लगाकर प्लॉट बेच रहे, तुरंत जमीन दिखा लाए दैनिक भास्कर की टीम गुरुवार को दोपहर करीब 12 बजे पुराना धमतरी रोड पर स्थित कमल विहार के प्रवेश द्वार पर पहुंची। वहां आधा दर्जन से अधिक लोग स्टॉल लगाकर बैठे थे। रिपोर्टर ने जब उनसे जमीन और मकान के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि उनके पास 495 से 2 हजार रुपए वर्गफीट तक के प्लॉट उपलब्ध हैं। वहां मौजूद कर्मचारी से कहा जमीन खरीदना है। को उसने पूछा बजट कितना है। इसके बाद उसने बताया कि बोरियाखुर्द में सस्ती कीमत में जमीन है। लेकिन वह कृषि है। कर्मचारी से जमीन दिखाने की जिद की गई तो वो मौके पर ले गया। वहां जमीन खरीदने पहले से ही लोग मौजूद थे। कर्मचारी ने प्लाट मालिक राजकुमार से मुलाकात करवाई। लगातार कर रहे कार्रवाई
सभी जोन कमिश्नरों से कहा गया है कि अवैध प्लाटिंग और​ निर्माण पर लगातार कार्रवाई करें। इन मामलों में संबंधित के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा रही है।
विश्वदीप, कमिश्नर नगर निगम रायपुर सबसे ज्यादा फायदा कृषि जमीन में जमीन दलालों को सबसे ज्यादा फायदा कृषि जमीन को बेचने से ही होता है। क्योंकि ये सस्ती खरीदते हैं और कम से कम दोगुना कीमत पर बेचते हैं। भू माफिया जोरा, पिरदा, टाटीबंध, लालपुर, गोंदवारा, बोरियाखुर्द, बीरगांव, भाटांगाव, दतरेंगा और नवा रायपुर के आसपास के इलाकों की ही जमीन की खरीदी-बिक्री सबसे ज्यादा कर रहे हैं। कृषि जमीन में प्लॉटिंग की अनुमति नहीं दी जा रही है। अवैध प्लॉटिंग पर फिर कार्रवाई अवैध निर्माणों और प्लॉटिंग के खिलाफ निगम की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी रही। जोन-9 में चल रहे अवैध निर्माणों को तोड़ा गया। जोन-8 और जोन-5 में अलग-अलग इलाकों में चल रही अवैध प्लाटिंग पर भी कार्रवाई की गई। जोन-5 नगर निवेश विभाग ने रायपुर तहसीलदार से अवैध प्लॉटिंग से जुड़ी भूमि के वास्तविक भूमि स्वामी की जानकारी मांगी है।

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