Raipur Archives - https://raipurnews.online/category/chhattisgarh/raipur/ Thu, 23 Jul 2026 11:48:06 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.4 छत्तीसगढ़ टीएलपीएस 2025 रिपोर्ट जारी: प्रारंभिक शिक्षा में शिक्षण पद्धतियों को मजबूत करने की पहल https://raipurnews.online/chhattisgarh/raipur/chhtteesgdh-teeelpeees-2025-riport-jaree-praranbhik-shiksha-men-shikshan-pddhtiyon-ko-mjboot-krne-kee-phl/ Thu, 23 Jul 2026 11:48:02 +0000 https://raipurnews.online/?p=71 रायपुर, जुलाई, 2026: लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) ने टाटा ट्रस्ट और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), छत्तीसगढ़ के साथ मिलकर जुलाई 2026 को एससीईआरटी, रायपुर के कॉन्फ्रेंस हॉल में ‘टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस) 2025’ रिपोर्ट जारी की। यह सर्वे कक्षा 1 और 2 में शिक्षण प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति को […]

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रायपुर, जुलाई, 2026: लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) ने टाटा ट्रस्ट और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), छत्तीसगढ़ के साथ मिलकर जुलाई 2026 को एससीईआरटी, रायपुर के कॉन्फ्रेंस हॉल में ‘टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस) 2025’ रिपोर्ट जारी की। यह सर्वे कक्षा 1 और 2 में शिक्षण प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति को समझने और स्कूल के शुरुआती वर्षों में अपनाए जा रहे पढ़ाने के तरीकों का विश्लेषण करने के उद्देश्य से किया गया है। रिपोर्ट के निष्कर्ष ‘निपुण भारत मिशन’ के तहत बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) को मजबूत करने के प्रयासों को और प्रभावी बनाने में सहायक होंगे।

रिपोर्ट विमोचन कार्यक्रम में एससीईआरटी छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त संचालक श्री जे. पी. रथ, एलएलएफ के राष्ट्रीय सलाहकार (बहुभाषी शिक्षा) पद्मश्री महेंद्र कुमार मिश्रा, सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, डाइट (DIET) के प्राचार्य, समग्र शिक्षा के प्रतिनिधि, राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) के सदस्य और शिक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए।

यह अध्ययन नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच कबीरधाम और नारायणपुर जिलों की 100 कक्षाओं में किए गए अवलोकन पर आधारित है। एलएलएफ के सीनियर एकेडमिक स्पेशलिस्ट अजय गुप्ता ने सर्वे की रूपरेखा और इसकी प्रक्रिया साझा की, जबकि सीनियर स्पेशलिस्ट (बहुभाषी शिक्षा) संजय गुलाटी ने रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एससीईआरटी छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त संचालक श्री जे. पी. रथ ने कहा कि ऐसी कक्षाओं की सबसे ज़्यादा जरूरत है, जहाँ बच्चे बिना डर के अपनी गलतियों से सीख सकें। उन्होंने कहा, “जिस दिन कोई छात्र बिना डर के अपनी गलती स्वीकार कर लेता है, उसी दिन उसके भीतर असली सीख शुरू होती है। एक अच्छा शिक्षक सिर्फ़ जवाब नहीं देता, बल्कि ऐसा सवाल छोड़ता है जो पूरी जिंदगी सीखने की प्रेरणा देता है।”

टाटा ट्रस्ट की डिप्टी हेड ऑफ प्रोग्राम्स और हेड ऑफ एजुकेशन अमृता पटवर्धन ने कहा, “छत्तीसगढ़ टीएलपीएस रिपोर्ट हमें सिर्फ कार्यक्रमों की जानकारी तक सीमित नहीं रखती, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कक्षा के भीतर बच्चे और शिक्षक पढ़ाने-सीखने की प्रक्रिया को कैसे अनुभव करते हैं। रिपोर्ट बताती है कि सर्वे में शामिल 84 प्रतिशत स्कूलों में एक ही कक्षा में अलग-अलग स्तर के बच्चों को पढ़ाया जाता है। इससे शुरुआती शिक्षा में कुछ अवसर मिलते हैं, तो कुछ चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। समाजसेवी संस्थाओं के लिए इस तरह की विस्तृत जानकारी बहुत अहम है, क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिलती है कि बहुभाषा शिक्षण, कक्षा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और बहुस्तरीय कक्षाओं में पढ़ाने के तरीकों को कहाँ और कैसे मजबूत किया जा सकता है, ताकि सरकार और उसके सहयोगी जमीनी ज़रूरतों के हिसाब से बेहतर काम कर सकें।”

कार्यक्रम में अन्य शिक्षा विशेषज्ञों ने भी कहा कि नीतियाँ और सिद्धांत दिशा तय करते हैं, लेकिन असली सफलता ज़मीन पर उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। डाइट जशपुर के प्राचार्य श्री एम. ज़ेड. यू. सिद्दीकी ने कहा कि अच्छी नीतियाँ और पर्याप्त संसाधन तभी सार्थक हैं, जब उनका असर कक्षा में स्पष्ट दिखे। वहीं, एससीईआरटी की राज्य स्रोत समूह की सदस्या पुष्पा शुक्ला ने कहा कि बच्चों के सीखने के नतीजों में सुधार के लिए कक्षा की शिक्षण प्रक्रिया में बदलाव अनिवार्य है।

एलएलएफ के संस्थापक और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. धीर झिंगरन ने कहा, “छत्तीसगढ़ की भाषाई, सामाजिक और भौगोलिक विविधता उसकी कक्षाओं में साफ दिखाई देती है। टीएलपीएस रिपोर्ट हमें यह समझने में मदद करती है कि बच्चे किस तरह भाग लेते हैं, शिक्षक अलग-अलग भाषा और सीखने की जरूरतों के मुताबिक कैसे पढ़ाते हैं और किन क्षेत्रों में कक्षा के तौर-तरीकों को और मजबूत करने की जरूरत है। शुरुआती शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों और मेंटर्स को लगातार शैक्षणिक सहयोग देना होगा, ताकि छत्तीसगढ़ का हर बच्चा निपुण बन सके।”

सर्वे में सामने आया कि 66 प्रतिशत शिक्षक बच्चों की मातृभाषा से परिचित थे। 82 प्रतिशत कक्षाओं में शिक्षक, समूह या व्यक्तिगत गतिविधियों के दौरान बच्चों के काम की नियमित निगरानी नहीं कर रहे थे, और 70 प्रतिशत कक्षाओं में सीखने के स्तर के अनुरूप पढ़ाने के तरीकों में बदलाव नहीं देखा गया। रिपोर्ट में बच्चों की भागीदारी बढ़ाने, गतिविधियों को रोजमर्रा के अनुभवों से जोड़ने और मातृभाषा के प्रभावी उपयोग जैसे सुधारों पर ज़ोर दिया गया है।

लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के बारे में: वर्ष 2015 में स्थापित एलएलएफ एक गैर-लाभकारी शिक्षा संस्था है, जो सरकारी प्राथमिक स्कूलों में एफएलएन के लिए सरकारों के साथ मिलकर काम करती है। संस्था का मुख्य उद्देश्य शुरुआती वर्षों में बच्चों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एलएलएफ मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में कार्य करती है, जिसमें ‘बहुभाषी शिक्षा’ (MLE) एक अंतर्निहित आधार के रूप में शामिल है:

  1. शिक्षकों और मेंटर्स का पेशेवर विकास: संस्था शिक्षकों को कक्षा में आधुनिक, बाल-केंद्रित और बहुभाषी शिक्षण विधियों के प्रभावी उपयोग में सक्षम बनाने का प्रयास करती है। एलएलएफ का मानना है कि यदि शिक्षण के दौरान बच्चे की मातृभाषा का सम्मान किया जाए, तो बच्चे की अवधारणात्मक समझ अधिक गहरी होती है।
  2. डेमोंस्ट्रेशन कार्यक्रम: संस्था ज़िला स्तर पर मॉडल कार्यक्रमों का संचालन करती है। इन कार्यक्रमों में बहुभाषी शिक्षण सामग्री और रणनीतियों के प्रयोग से कक्षा प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाकर बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार सुनिश्चित किए जाने का प्रयास किया जाता है।
  3. व्यवस्थागत मजबूती (Systemic Strengthening): एलएलएफ जिला और राज्य स्तर पर शिक्षा विभागों के साथ मिलकर नीतियों के क्रियान्वयन और अकादमिक सहयोग को सुदृढ़ करती है। संस्था यह सुनिश्चित करती है कि बहुभाषी शिक्षा का दृष्टिकोण केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रहकर, पूरी शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बने, जिससे सुधारों में निरंतरता बनी रहे।
    संस्था यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी बच्चा पीछे न रहे। अब तक एलएलएफ ने 10 राज्यों में 2.18 करोड़ बच्चों और 11.8 लाख शिक्षकों तक पहुँच बनाई है, और ज़िला स्तर पर 14 लाख बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार किया है।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल: स्वस्थ माताओं, स्वस्थ बच्चों और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए बनेगी समन्वित कार्ययोजना https://raipurnews.online/chhattisgarh/mukhymantree-shree-vishhanu-dev-say-kee-phl-svsth-mataon-svsth-bchchon-aur-kuposhhan-mukt-chhtteesgdh-ke-lie-bnegee-smnvit-karyyojna/ Wed, 22 Jul 2026 11:26:36 +0000 https://raipurnews.online/?p=62 यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से सभी संबंधित विभाग मिलकर तैयार करेंगे प्रभावी रणनीति रायपुर, 22 जुलाई 2026: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन और बच्चों के समग्र विकास के लिए सभी संबंधित […]

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यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से सभी संबंधित विभाग मिलकर तैयार करेंगे प्रभावी रणनीति

रायपुर, 22 जुलाई 2026: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन और बच्चों के समग्र विकास के लिए सभी संबंधित विभागों को यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से समन्वित एवं परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे से शिष्टाचार भेंट के दौरान चर्चा कर रहे थे। बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, बाल संरक्षण और कुपोषण की चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा आदिम जाति विकास विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को साझा लक्ष्य और बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण में प्रभावी कमी लाई जा सके।

उन्होंने अधिकारियों से मल्टी-सेक्टोरल रणनीति तैयार करने को कहा, जिससे स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचे और बच्चों के पोषण स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित हो।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे का शॉल एवं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान ‘नंदी’ भेंट कर स्वागत किया। वहीं, सुश्री मैककैफ्रे ने भारत में यूनिसेफ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष स्मारक डाक टिकट मुख्यमंत्री को भेंट किया।

सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे ने मुख्यमंत्री का ‘जय जोहार’ कहकर अभिवादन किया और कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और सरल-सहज लोगों का प्रदेश है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ लंबे समय से राज्य सरकार के साथ मिलकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है तथा भविष्य में भी यह सहयोग जारी रहेगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के बच्चों का भविष्य अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध बनेगा।

बैठक में मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ की प्रमुख सुश्री सीमा कुमार, श्री अनिल गुलाटी तथा डॉ. बाल पारितोष दास उपस्थित थे।

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