Raipur Archives - https://raipurnews.online/category/chhattisgarh/raipur/ Mon, 24 Aug 2026 10:18:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.4 Sports Enthusiast Association की “बचपन सीरीज” ने फिर जगाईं बचपन की सुनहरी यादें https://raipurnews.online/sports/sports-enthusiast-association-kee-bchpn-seereej-ne-fir-jgaeen-bchpn-kee-sunhree-yaden/ Mon, 24 Aug 2026 10:17:53 +0000 https://raipurnews.online/?p=144 रायपुर। Sports Enthusiast Association (SEA) द्वारा अगस्त माह में आयोजित “बचपन सीरीज” ने संस्था के सदस्यों को उनके बचपन की सुनहरी यादों से दोबारा जोड़ दिया। चार रविवार तक चले इस अनूठे आयोजन में 25 से 65 वर्ष तक की आयु के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और बचपन में खेले जाने वाले पारंपरिक एवं […]

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रायपुर। Sports Enthusiast Association (SEA) द्वारा अगस्त माह में आयोजित “बचपन सीरीज” ने संस्था के सदस्यों को उनके बचपन की सुनहरी यादों से दोबारा जोड़ दिया। चार रविवार तक चले इस अनूठे आयोजन में 25 से 65 वर्ष तक की आयु के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और बचपन में खेले जाने वाले पारंपरिक एवं मनोरंजक खेलों का आनंद उठाया।

“बचपन सीरीज” की परिकल्पना और सफल आयोजन SEA के सदस्य श्री आनंद सोनी द्वारा किया गया। आयोजन के दौरान उम्र की सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए सदस्यों ने विभिन्न खेलों में भाग लिया और हंसी-खुशी के बीच अपने बचपन के दिनों को फिर से जिया।

खेलों के साथ बढ़ा आपसी जुड़ाव

आयोजन के दौरान सदस्यों में खासा उत्साह और उमंग देखने को मिली। बचपन के खेलों ने जहां पुरानी यादों को ताजा किया, वहीं सदस्यों के बीच आपसी जुड़ाव, मित्रता और सकारात्मक ऊर्जा को भी बढ़ावा दिया।

SEA के अध्यक्ष श्री समीर सिंह, सचिव श्री नीलेश कटारिया एवं प्रवक्ता श्रीमती लिपि जैन ने आयोजन को अपना मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि इस तरह के रचनात्मक आयोजन स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के साथ-साथ लोगों को तनावमुक्त वातावरण प्रदान करते हैं और आपसी सौहार्द को मजबूत करते हैं।

“उम्र सिर्फ एक संख्या है”

“बचपन सीरीज” ने यह संदेश दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। यदि दिल में बचपन जिंदा हो, तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर बचपन की खुशियों को दोबारा महसूस किया जा सकता है।

चार रविवार तक चले इस आयोजन ने SEA के सभी प्रतिभागियों के लिए यादगार पल संजोए। सदस्यों ने भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक, मनोरंजक और आपसी जुड़ाव बढ़ाने वाले आयोजनों के आयोजन की उम्मीद जताई।

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युवाओं की ऊर्जा और रचनात्मकता से बनेगा विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय https://raipurnews.online/chhattisgarh/raipur/yuvaon-kee-oorja-aur-rchnatmkta-se-bnega-viksit-bhaart-aur-viksit-chhtteesgdh-mukhymantree-vishhanudev-say/ Tue, 18 Aug 2026 17:19:45 +0000 https://raipurnews.online/?p=134 रायपुर, 18 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है। युवाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप अवसर देकर राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से व्यापक रूप से जोड़ना जरूरी है। […]

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रायपुर, 18 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है। युवाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप अवसर देकर राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से व्यापक रूप से जोड़ना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित ‘मेरा युवा भारत’ (माय भारत) की प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक में यह बात कही। उन्होंने प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को माय भारत से जोड़ने और विभिन्न विभागों की गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

‘सशक्त युवा-सशक्त छत्तीसगढ़’ के संकल्प पर जोर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवाओं को स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, खेल, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन, कौशल विकास, कृषि, तकनीकी शिक्षा, आपदा प्रबंधन और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में सेवा एवं नेतृत्व के अवसर दिए जाने चाहिए। इससे युवाओं को व्यावहारिक अनुभव मिलने के साथ उनकी नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी मजबूत होगी।

उन्होंने ‘सशक्त युवा-सशक्त छत्तीसगढ़’ की भावना के अनुरूप ग्राम से राज्य स्तर तक मजबूत युवा नेटवर्क तैयार करने के निर्देश दिए। डिजिटल डिटॉक्स, सेवा भाव, सामाजिक जुड़ाव और सामुदायिक उत्तरदायित्व से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

छत्तीसगढ़ में 6.60 लाख से अधिक युवा माय भारत से जुड़े

बैठक में बताया गया कि देशभर में 2.65 करोड़ से अधिक युवा माय भारत प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हैं। छत्तीसगढ़ में भी 6.60 लाख से अधिक युवा इससे जुड़ चुके हैं।

माय भारत युवाओं और सरकार के बीच सिंगल विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में काम कर रहा है, जहां स्वयंसेवा, अनुभव आधारित शिक्षण, कौशल, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी गतिविधियों एवं अवसरों की जानकारी उपलब्ध है।

अनुभव आधारित कार्यक्रमों से युवाओं को अवसर

देशभर में 24,900 से अधिक ईएलपी (Experiential Learning Programmes) के माध्यम से 1.21 लाख युवाओं को शासन की विभिन्न गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिला है। छत्तीसगढ़ में 233 ईएलपी के जरिए 2,389 से अधिक युवा जुड़े हैं।

इसी तरह देशभर में 1.53 लाख से अधिक स्वयंसेवा अवसरों के माध्यम से 10 लाख से ज्यादा युवाओं को सेवा गतिविधियों से जोड़ा गया है। छत्तीसगढ़ में 5,778 वालंटियर अवसरों में 23,900 से अधिक युवाओं ने भाग लिया है।

बस्तर के युवाओं को मिलेंगे नए अवसर

मुख्यमंत्री ने बस्तर के युवाओं को माय भारत की गतिविधियों से बड़े पैमाने पर जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बस्तर शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में यहां के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ना बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि माय भारत के माध्यम से बस्तर के युवाओं की प्रतिभा को पहचान, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को खेल, कला, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में नेतृत्व के अवसर दिए जाने चाहिए।

विकसित छत्तीसगढ़ यंग लीडर्स डायलॉग पर जोर

बैठक में ‘विकसित छत्तीसगढ़ यंग लीडर्स डायलॉग’ आयोजित करने पर भी चर्चा हुई। इसके माध्यम से खेल, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, समाज कल्याण, नगरीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन, पर्यटन और कृषि जैसे क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

बैठक में विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट, विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, विकसित भारत युवा कनेक्ट, यूथ आइकन, विकसित भारत पदयात्रा, सरदार@150 पदयात्रा और ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ जैसी पहलों के माध्यम से युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की जानकारी भी दी गई।

इस दौरान माय भारत की वालंटियर अदिति द्वारा तैयार ट्राइबल आर्ट का छायाचित्र मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को भेंट किया गया। मुख्यमंत्री ने उनकी रचनात्मक प्रतिभा की सराहना की।

बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, संचालक श्रीमती तनुजा सलाम, माय भारत की सीईओ डॉ. प्रियंका शुक्ला सहित राज्य एवं जिला स्तर के अधिकारी उपस्थित रहे।

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छत्तीसगढ़ टीएलपीएस 2025 रिपोर्ट जारी: प्रारंभिक शिक्षा में शिक्षण पद्धतियों को मजबूत करने की पहल https://raipurnews.online/chhattisgarh/raipur/chhtteesgdh-teeelpeees-2025-riport-jaree-praranbhik-shiksha-men-shikshan-pddhtiyon-ko-mjboot-krne-kee-phl/ Thu, 23 Jul 2026 11:48:02 +0000 https://raipurnews.online/?p=71 रायपुर, जुलाई, 2026: लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) ने टाटा ट्रस्ट और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), छत्तीसगढ़ के साथ मिलकर जुलाई 2026 को एससीईआरटी, रायपुर के कॉन्फ्रेंस हॉल में ‘टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस) 2025’ रिपोर्ट जारी की। यह सर्वे कक्षा 1 और 2 में शिक्षण प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति को […]

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रायपुर, जुलाई, 2026: लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) ने टाटा ट्रस्ट और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), छत्तीसगढ़ के साथ मिलकर जुलाई 2026 को एससीईआरटी, रायपुर के कॉन्फ्रेंस हॉल में ‘टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस) 2025’ रिपोर्ट जारी की। यह सर्वे कक्षा 1 और 2 में शिक्षण प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति को समझने और स्कूल के शुरुआती वर्षों में अपनाए जा रहे पढ़ाने के तरीकों का विश्लेषण करने के उद्देश्य से किया गया है। रिपोर्ट के निष्कर्ष ‘निपुण भारत मिशन’ के तहत बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) को मजबूत करने के प्रयासों को और प्रभावी बनाने में सहायक होंगे।

रिपोर्ट विमोचन कार्यक्रम में एससीईआरटी छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त संचालक श्री जे. पी. रथ, एलएलएफ के राष्ट्रीय सलाहकार (बहुभाषी शिक्षा) पद्मश्री महेंद्र कुमार मिश्रा, सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, डाइट (DIET) के प्राचार्य, समग्र शिक्षा के प्रतिनिधि, राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) के सदस्य और शिक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए।

यह अध्ययन नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच कबीरधाम और नारायणपुर जिलों की 100 कक्षाओं में किए गए अवलोकन पर आधारित है। एलएलएफ के सीनियर एकेडमिक स्पेशलिस्ट अजय गुप्ता ने सर्वे की रूपरेखा और इसकी प्रक्रिया साझा की, जबकि सीनियर स्पेशलिस्ट (बहुभाषी शिक्षा) संजय गुलाटी ने रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एससीईआरटी छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त संचालक श्री जे. पी. रथ ने कहा कि ऐसी कक्षाओं की सबसे ज़्यादा जरूरत है, जहाँ बच्चे बिना डर के अपनी गलतियों से सीख सकें। उन्होंने कहा, “जिस दिन कोई छात्र बिना डर के अपनी गलती स्वीकार कर लेता है, उसी दिन उसके भीतर असली सीख शुरू होती है। एक अच्छा शिक्षक सिर्फ़ जवाब नहीं देता, बल्कि ऐसा सवाल छोड़ता है जो पूरी जिंदगी सीखने की प्रेरणा देता है।”

टाटा ट्रस्ट की डिप्टी हेड ऑफ प्रोग्राम्स और हेड ऑफ एजुकेशन अमृता पटवर्धन ने कहा, “छत्तीसगढ़ टीएलपीएस रिपोर्ट हमें सिर्फ कार्यक्रमों की जानकारी तक सीमित नहीं रखती, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कक्षा के भीतर बच्चे और शिक्षक पढ़ाने-सीखने की प्रक्रिया को कैसे अनुभव करते हैं। रिपोर्ट बताती है कि सर्वे में शामिल 84 प्रतिशत स्कूलों में एक ही कक्षा में अलग-अलग स्तर के बच्चों को पढ़ाया जाता है। इससे शुरुआती शिक्षा में कुछ अवसर मिलते हैं, तो कुछ चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। समाजसेवी संस्थाओं के लिए इस तरह की विस्तृत जानकारी बहुत अहम है, क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिलती है कि बहुभाषा शिक्षण, कक्षा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और बहुस्तरीय कक्षाओं में पढ़ाने के तरीकों को कहाँ और कैसे मजबूत किया जा सकता है, ताकि सरकार और उसके सहयोगी जमीनी ज़रूरतों के हिसाब से बेहतर काम कर सकें।”

कार्यक्रम में अन्य शिक्षा विशेषज्ञों ने भी कहा कि नीतियाँ और सिद्धांत दिशा तय करते हैं, लेकिन असली सफलता ज़मीन पर उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। डाइट जशपुर के प्राचार्य श्री एम. ज़ेड. यू. सिद्दीकी ने कहा कि अच्छी नीतियाँ और पर्याप्त संसाधन तभी सार्थक हैं, जब उनका असर कक्षा में स्पष्ट दिखे। वहीं, एससीईआरटी की राज्य स्रोत समूह की सदस्या पुष्पा शुक्ला ने कहा कि बच्चों के सीखने के नतीजों में सुधार के लिए कक्षा की शिक्षण प्रक्रिया में बदलाव अनिवार्य है।

एलएलएफ के संस्थापक और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. धीर झिंगरन ने कहा, “छत्तीसगढ़ की भाषाई, सामाजिक और भौगोलिक विविधता उसकी कक्षाओं में साफ दिखाई देती है। टीएलपीएस रिपोर्ट हमें यह समझने में मदद करती है कि बच्चे किस तरह भाग लेते हैं, शिक्षक अलग-अलग भाषा और सीखने की जरूरतों के मुताबिक कैसे पढ़ाते हैं और किन क्षेत्रों में कक्षा के तौर-तरीकों को और मजबूत करने की जरूरत है। शुरुआती शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों और मेंटर्स को लगातार शैक्षणिक सहयोग देना होगा, ताकि छत्तीसगढ़ का हर बच्चा निपुण बन सके।”

सर्वे में सामने आया कि 66 प्रतिशत शिक्षक बच्चों की मातृभाषा से परिचित थे। 82 प्रतिशत कक्षाओं में शिक्षक, समूह या व्यक्तिगत गतिविधियों के दौरान बच्चों के काम की नियमित निगरानी नहीं कर रहे थे, और 70 प्रतिशत कक्षाओं में सीखने के स्तर के अनुरूप पढ़ाने के तरीकों में बदलाव नहीं देखा गया। रिपोर्ट में बच्चों की भागीदारी बढ़ाने, गतिविधियों को रोजमर्रा के अनुभवों से जोड़ने और मातृभाषा के प्रभावी उपयोग जैसे सुधारों पर ज़ोर दिया गया है।

लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के बारे में: वर्ष 2015 में स्थापित एलएलएफ एक गैर-लाभकारी शिक्षा संस्था है, जो सरकारी प्राथमिक स्कूलों में एफएलएन के लिए सरकारों के साथ मिलकर काम करती है। संस्था का मुख्य उद्देश्य शुरुआती वर्षों में बच्चों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एलएलएफ मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में कार्य करती है, जिसमें ‘बहुभाषी शिक्षा’ (MLE) एक अंतर्निहित आधार के रूप में शामिल है:

  1. शिक्षकों और मेंटर्स का पेशेवर विकास: संस्था शिक्षकों को कक्षा में आधुनिक, बाल-केंद्रित और बहुभाषी शिक्षण विधियों के प्रभावी उपयोग में सक्षम बनाने का प्रयास करती है। एलएलएफ का मानना है कि यदि शिक्षण के दौरान बच्चे की मातृभाषा का सम्मान किया जाए, तो बच्चे की अवधारणात्मक समझ अधिक गहरी होती है।
  2. डेमोंस्ट्रेशन कार्यक्रम: संस्था ज़िला स्तर पर मॉडल कार्यक्रमों का संचालन करती है। इन कार्यक्रमों में बहुभाषी शिक्षण सामग्री और रणनीतियों के प्रयोग से कक्षा प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाकर बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार सुनिश्चित किए जाने का प्रयास किया जाता है।
  3. व्यवस्थागत मजबूती (Systemic Strengthening): एलएलएफ जिला और राज्य स्तर पर शिक्षा विभागों के साथ मिलकर नीतियों के क्रियान्वयन और अकादमिक सहयोग को सुदृढ़ करती है। संस्था यह सुनिश्चित करती है कि बहुभाषी शिक्षा का दृष्टिकोण केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रहकर, पूरी शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बने, जिससे सुधारों में निरंतरता बनी रहे।
    संस्था यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी बच्चा पीछे न रहे। अब तक एलएलएफ ने 10 राज्यों में 2.18 करोड़ बच्चों और 11.8 लाख शिक्षकों तक पहुँच बनाई है, और ज़िला स्तर पर 14 लाख बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार किया है।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल: स्वस्थ माताओं, स्वस्थ बच्चों और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए बनेगी समन्वित कार्ययोजना https://raipurnews.online/chhattisgarh/mukhymantree-shree-vishhanu-dev-say-kee-phl-svsth-mataon-svsth-bchchon-aur-kuposhhan-mukt-chhtteesgdh-ke-lie-bnegee-smnvit-karyyojna/ Wed, 22 Jul 2026 11:26:36 +0000 https://raipurnews.online/?p=62 यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से सभी संबंधित विभाग मिलकर तैयार करेंगे प्रभावी रणनीति रायपुर, 22 जुलाई 2026: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन और बच्चों के समग्र विकास के लिए सभी संबंधित […]

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यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से सभी संबंधित विभाग मिलकर तैयार करेंगे प्रभावी रणनीति

रायपुर, 22 जुलाई 2026: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन और बच्चों के समग्र विकास के लिए सभी संबंधित विभागों को यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से समन्वित एवं परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे से शिष्टाचार भेंट के दौरान चर्चा कर रहे थे। बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, बाल संरक्षण और कुपोषण की चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा आदिम जाति विकास विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को साझा लक्ष्य और बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण में प्रभावी कमी लाई जा सके।

उन्होंने अधिकारियों से मल्टी-सेक्टोरल रणनीति तैयार करने को कहा, जिससे स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचे और बच्चों के पोषण स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित हो।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे का शॉल एवं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान ‘नंदी’ भेंट कर स्वागत किया। वहीं, सुश्री मैककैफ्रे ने भारत में यूनिसेफ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष स्मारक डाक टिकट मुख्यमंत्री को भेंट किया।

सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे ने मुख्यमंत्री का ‘जय जोहार’ कहकर अभिवादन किया और कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और सरल-सहज लोगों का प्रदेश है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ लंबे समय से राज्य सरकार के साथ मिलकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है तथा भविष्य में भी यह सहयोग जारी रहेगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के बच्चों का भविष्य अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध बनेगा।

बैठक में मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ की प्रमुख सुश्री सीमा कुमार, श्री अनिल गुलाटी तथा डॉ. बाल पारितोष दास उपस्थित थे।

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