स्वास्थ्य विभाग में संविलियन सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 25 कर्मियों की बुधवार को बर्खास्तगी के बाद राज्यभर के 16 हजार से ज्यादा कर्मियों ने गुरुवार को सामूहिक इस्तीफा दे दिया। प्रदेश के हर जिले में काम का बहिष्कार कर रहे कर्मचारियों ने अपने-अपने जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। हड़ताली कर्मचारी इस बात से नाराज हैं कि उनकी मांगें पूरी कर स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल करने की जगह उनके आंदोलन को कुचलने की कोशिश की जा रही है। छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के बैनर तले 16 हजार से ज्यादा कर्मचारी 18 अगस्त से हड़ताल पर हैं। काम का बहिष्कार कर कर्मचारी हर जिला मुख्यालय में धरना दे रहे हैं। हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। एनएचएम के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित गिरी ने दावा किया है कि राज्यभर के 16 हजार से ज्यादा कर्मियों ने इस्तीफा दे दिया है। संघ की ओर से स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को 160 से अधिक ज्ञापन दिए गए हैं। नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों को चुन-चुनकर किया बर्खास्त, ताकि टूट जाए आंदोलन
मोहम्मद निजाम की रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग की ओर से एनएचएम के 25 अधिकारियों-कर्मचारियों की बर्खास्तगी चुन-चुनकर की गई। आंदोलनकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सहित हर जिले के उन कर्मचारियों को टारगेट किया गया जो संगठन के पदाधिकारी होने के साथ-साथ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में ही इस बात की चर्चा है कि आंदोलन तोड़ने के लिए ही नेतृत्व करने वालों को बर्खास्त किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और आंदोलनकारी संघ के पदाधिकारियों के बीच टकराव को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी हैं। कहा जा रहा है कि आपसी टकराव के कारण ही शासन की घोषणा के बावजूद आंदोलनकारियों की मांगों को पूरा करने का स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया है। उनकी मांग पूरी करने की शासन की घोषणा को प्रक्रिया में डाल दिया गया है। आंदोलनकारियों को कहना है कि उनकी 10 मांगों में टॉप-5 मांग को किनारे कर दिया गया है। उसके बाद की 5 मांगों को पूरा करने की घोषणा तो की गई है लेकिन उसे लेकर संघ की ओर से जो आपत्ति की गई है, उसे सुना भी नहीं जा रहा है। इधर, एनएचएम में शामिल करने की मांग को लेकर सीएम हाउस घेरने निकलीं मितानिनें को जहां दिखीं वहीं रोका एनएचएम में शामिल करने समेत तीन सूत्रीय मांगों को लेकर 7 अगस्त से आंदोलन कर रहीं छत्तीसगढ़ की 75 हजार मितानिनों ने गुरुवार को सीएम हाउस घेरने की चेतावनी दी थी। लेकिन, प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों से राजधानी की ओर आने वाली सड़कों पर पुलिस ने पहरा बिछा रखा था, जिसके कारण उन्हें सड़कों पर ही रोक दिया गया। इससे नाराज मितानिनों ने बीच सड़क पर बैठकर प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी। ये हैं मांगें- मितानिनों को एनएचएम में शामिल किया जाए। मानदेय में 50% वृद्धि की जाए तथा ठेका प्रथा समाप्त किया जाए।
विरोध:काम का बहिष्कार कर धरने पर कर्मचारी, बोले-आंदोलन को कुचलने की कोशिश





















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