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मच्छरों पर नियंत्रण नगर निगम के रही सबसे बड़ी चुनौती:छह माह नहीं सालों से नहीं देखा कैसे होती है फॉगिंग, मच्छरों से बचने खुद कर रहे इंतजाम

मच्छरों पर नियंत्रण नगर निगम के लिए हमेशा ही एक चुनौती रही है। सालों से इसकी जिम्मेदारी नगर निगम के जोन पर है। जोन से ही मच्छरों पर नियंत्रण के लिए केमिकल का छिड़काव और फागिंग अभियान चलाया जा रहा है। केमिकल की खरीदी और फागिंग के लिए मशीन चलाने हर वार्डों को रोज पांच से दस लीटर डीजल दिया जाता रहा है। इस सिस्टम से मच्छर उन्मूलन के दावे लगभग फेल रहे हैं। पिछले कई साल से लोगों ने ना तो एंटी लार्वा का छिड़काव देखा है और ना ही फागिंग होते। व्यवस्था दुरुस्त करने नगर निगम ने पिछले साल सितंबर में दुर्ग की एजेंसी को तीन महीने में सवा करोड़ का काम दिया। तीन अतिरिक्त महीने काम बढ़ाया, लेकिन कंपनी ने काम ही नहीं किया और उसे सवा दो करोड़ के भुगतान हो गए। मच्छर भगाने पर हर माह 4 करोड़ खर्च कर रहे लोग नगर निगम के तमाम दावों के बावजूद शहर में मच्छरों पर कोई नियंत्रण नहीं है। इसलिए लोग अब खुद ही मच्छरों के लिए उपाय करने लगे हैं। शहर में मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती, क्वाइल, मॉस्किटो कीलर, रैकेट तथा अन्य साधनों पर खर्च बढ़ गया है। हर घर में ये चीजें आम है। शहर में करीब चार लाख घर हैं और औसतन हर महीने मच्छरों पर 100 रुपए भी खर्च किए जा रहे हैं तो कम से कम चार करोड़ रुपए लोगों के हर महीने मच्छर भगाने पर खर्च हो रहे हैं। जानिए, क्या है राजधानी के इलाकों का हाल छत्तीसगढ़ नगर निवासी रजत साहू का कहना है कि पिछले एक-डेढ़ साल में एक-दो बार ही फागिंग हुई है। एंटी लार्वां का छिड़काव तो कभी हुआ ही नहीं। मच्छरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि घर में बिना अगरबत्ती या क्याइल जलाए सो नहीं सकते। पुरानी बस्ती निवासी बालेश्वर श्रीवास्तव का कहना है कि क्षेत्र में मच्छरों के आतंक से सभी परेशान हैं। बीते दो-तीन वर्षों से मच्छरों के काटने से हजारों लोग डेंगु, मलेरिया जैसी घातक बीमारी के शिकार हुए हैं। रामसागरपारा निवासी राजकुमार साहू का कहना है कि कई महीने तो क्या कई सालों से मच्छर भगाने के लिए ना तो फागिंग करने आए हैं और ना ही नालियों में दवा का छिड़काव करने वाले। इस वजह से मच्छर बढ़ रहे हैं। पुराना ठेका खत्म, जोन अफसरों से कहा है फॉगिंग करने निगम के पिछले कार्यकाल में दुर्ग की एजेंसी को ठेका दिया गया था। एजेंसी के खिलाफ शिकायतें मिली थी। इसलिए ठेका खत्म किया गया। सभी जोनों को फागिंग और एंटी लार्यों के छिड़काव के निर्देश दिए गए हैं। – विनोद पांडे, अपर आयुक्त ननि

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