जन्म के समय लिंगानुपात में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी, 974 के साथ राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन

राष्ट्रीय बालिका दिवस | 24 जनवरी

रायपुर, 23 जनवरी 2026

बालिकाओं के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समग्र सशक्तिकरण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। यह दिवस बालिकाओं के सम्मान, समान अवसर और सुरक्षित भविष्य के लिए सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।

भारत सरकार द्वारा कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम एवं लिंगानुपात में सुधार के लिए गर्भाधान पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PC PNDT) अधिनियम, 1994 लागू किया गया, जिसे वर्ष 2003 में और अधिक सुदृढ़ किया गया। यह अधिनियम अल्ट्रासाउंड, एमनियोसेंटेसिस, आईवीएफ जैसी तकनीकों के माध्यम से भ्रूण के लिंग परीक्षण एवं चयन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है।

नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में जन्म के समय लिंगानुपात 929 (प्रति 1000 पुरुष) तक पहुँचना लैंगिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्तमान में राज्य का जन्म के समय लिंगानुपात (SRB) 974 है, जो देश में सर्वाधिक है। यह उपलब्धि प्रदेश में बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों, सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाओं एवं सामाजिक चेतना का प्रतिफल है।

राज्य में PC PNDT अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा कठोर एवं सतत निगरानी की जा रही है। अल्ट्रासाउंड केंद्रों का नियमित निरीक्षण, सत्यापन एवं पंजीयन/नवीनीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है। जिला एवं राज्य स्तरीय सलाहकार समितियों की नियमित बैठकों के माध्यम से अधिनियम के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई एवं कानूनी प्रक्रिया को और अधिक मजबूत किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ द्वारा कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम, लिंग आधारित भेदभाव के उन्मूलन तथा किशोरियों के सशक्तिकरण हेतु निरंतर जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं। राज्य के सभी जिलों में निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ करने, नियमित समीक्षा तथा अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर अनिवार्य सूचना प्रदर्शन सुनिश्चित करने हेतु ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

बालिका दिवस पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल जी ने बताया की छत्तीसगढ़ का 974 का जन्म के समय लिंगानुपात इस बात का प्रमाण है कि हमारा समाज बेटियों के सम्मान और संरक्षण के प्रति निरंतर जागरूक हो रहा है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों, जिला प्रशासन, महिला समूहों और जनप्रतिनिधियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। हमारी सरकार का संकल्प है कि PC PNDT अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटी का सम्मान बढ़ाओ के संकल्प को जमीनी स्तर तक साकार किया जाए, ताकि प्रदेश की हर बालिका सुरक्षित, स्वस्थ और सशक्त भविष्य की ओर अग्रसर हो सके।”

स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ प्रदेश को बालिकाओं के लिए सुरक्षित, समान एवं अवसरों से परिपूर्ण बनाने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है, ताकि हर बेटी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *