रायपुर समेत 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट:सरगुजा-संभाग में धीमा पड़ा मानसून, 35 डिग्री के साथ राजधानी सबसे गर्म, पेंड्रा में 22 डिग्री तापमान

छत्तीसगढ़ में मानसून की तीव्रता अगले 5 दिनों में दक्षिणी छत्तीसगढ़ में अधिकांश और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों पर बढ़ेगी। यानी बस्तर संभाग से लगे लगभग स्थानों में भारी बारिश होगी। वहीं उत्तरी हिस्से में अगले कुछ दिन मानसून कमजोर रहेगा। मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए रायपुर, दुर्ग, बालोद, धमतरी, सुरजपुर, बलरामपुर, जशपुर सहित बस्तर संभाग के सभी जिलों कुल 15 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा बाकी अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहेगा। पिछले 24 घंटे की बात करें तो सरगुजा संभाग के अधिकांश स्थानों पर अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गई है। तापमान की बात करें तो गुरुवार को सबसे अधिक टेंपरेचर 35 डिग्री सेल्सियस रायपुर और सबसे कम न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस पेंड्रा रोड में दर्ज किया गया। रायपुर में सूरज ढलते ही बदला मौसम इस बीच रायपुर में गुरुवार शाम तेज बारिश हुई। कुछ ही देर की बारिश में सड़कों पर पानी भर गया। वहीं धमतरी जिले में बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई, जबकि 2 घायल हैं। घायलों को अस्पताल लाया गया है। बलौदाबाजार में 600 आबादी वाला एक गांव टापू में तब्दील हो गया। कौआडीह नाला उफान पर बलौदाबाजार का कौआडीह नाला उफान पर है, जिससे वटगन-खरतोल मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। सड़क पर 2-3 फीट ऊपर पानी बह रहा है। वाहनों का आना-जान पूरी तरह रुक गया है। बारिश के कारण स्कूल भी बंद हैं। कई खेत पानी में डूब गए हैं। बारिश के बाद झरनों की सुंदरता तस्वीरों में देखिए लंबा रह सकता है मानसून मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियमित समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है। बेमेतरा में 671.8 मिमी बरसा पानी जुलाई का पहला पखवाड़ा बारिश के लिहाज से काफी अच्छा रहा। अब तक प्रदेश में 405.3 मिमी बारिश हो गई है। यह औसत से 6 प्रतिशत ज्यादा है। कोंडागांव, बेमेतरा और सुकमा को छोड़कर प्रदेश के सभी जिलों में औसत से ज्यादा बारिश हो चुकी है। अब तक बलरामपुर में सबसे ज्यादा 671.8 मिलीमीटर पानी बरसा है। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *