रायपुर में बारिश, सभी जिलों में यलो अलर्ट:बस्तर संभाग के जिलों में 5 दिन बरसात; कवर्धा में पुल से 5 बहे, 1 की मौत

छत्तीसगढ़ में मौसम विभाग ने सभी जिलों में आज भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। दक्षिणी हिस्से यानी बस्तर संभाग में अगले 5 दिन बारिश होगी। रायपुर में सुबह से बारिश हो रही है। रविवार को कई जिलों में तेज बारिश से प्रदेश के कई नदी-नाले उफान पर हैं। कुछ हादसे भी सामने आए हैं। कवर्धा जिले के रानीदहरा जलप्रपात में देखने आए 5 पर्यटक लौटते वक्त पुल से बह गए, जिसमें से एक की मौत हो गई, जबकि एक अब भी लापता है। तीन को बचाया गया है। वहीं भारी बारिश से दल्ली राजहरा में बाढ़ जैसे हालात बन गए। नाले के तेज बहाव में एक गाय बह गई। दल्ली राजहरा से अंतागढ़ जाने वाला रेलवे ट्रैक जलभराव के कारण डूब गया। पहले ये दो तस्वीरें देखिए बिजली की चपेट में आने से युवक की मौत रायपुर में शनिवार को बिजली गिरने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि दो घायल हैं। तीनों युवक छत पर गेम खेलने बैठे थे। इसी दौरान अचानक बिजली गिरी। घायलों का इलाज जारी है। घटना खम्हारडीह के भावना नगर की है। राज्य में अब तक 437.1 मिमी बारिश, सबसे कम बेमेतरा में छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 437.1 मिलीमीटर औसत बारिश हो चुकी है। बलरामपुर जिले में सबसे ज्यादा 738.9 मिमी पानी गिरा है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 236.8 मिमी औसत वर्षा हुई है। वहीं तापमान की बात करें तो पिछले 24 घंटे में सबसे अधिक टेंपरेचर 32.8 डिग्री सेल्सियस बिलासपुर और सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.0 डिग्री सेल्सियस दुर्ग और राजनांदगांव में दर्ज किया गया। बारिश की तस्वीरें देखिए- बारिश के बाद झरनों की सुंदरता तस्वीरों में देखिए लंबा रह सकता है मानसून मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियमित समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ

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