बलरामपुर समेत 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट:बिलासपुर-मुंगेली समेत 4 जिलों में बिजली गिरेगी,आंधी चलेगी,बाकी जगह मौसम सामान्य,केलो डैम के 4 गेट खुले

छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटों में अधिकांश जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई। रायपुर में रात से बूंदाबांदी हो रही है। इस बीच मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए बलरामपुर में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा कोरबा, सूरजपुर, सरगुजा, जशपुर, रायगढ़, इन पांच जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। जीपीएम, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा इन 4 जिलों में बिजली गिरने, बादल गरजने और आंधी चलने का यलो अलर्ट जारी किया गया है। अन्य जिलो में मौसम सामान्य रहेगा। पिछले 24 घंटों में बिलासपुर संभाग के कुछ स्थानों में भारी बारिश हुई। रायगढ़ जिले में लगातार बारिश के बाद केलो डैम के 4 गेट खोले गए। इससे केलो नदी का जलस्तर बढ़ गया है। कई नदी-नाले उफान पर हैं। बारिश के तस्वीरें देखिए… सिस्टम कमजोर, बस्तर में कम बरसेगा पानी सिनौप्टिक सिस्टम की बात करें तो छत्तीसगढ़ के मध्य भागों और उससे सटे पूर्वी मध्य प्रदेश में बना लो प्रेशर एरिया कमजोर हो गया है। हालांकि, इससे जुड़ा साइक्लोन सर्कुलेशन दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में एक्टिव है। 1 जून से अब तक 801 मिमी पानी बरसा 1 जून से अब तक प्रदेश में 801.8 मिमी औसत बारिश हो चुकी है। बलरामपुर में सबसे ज्यादा 1158.2 मिमी पानी बरसा है। बेमेतरा में सबसे कम 394.7 मिमी बारिश हुई है। जून से जुलाई के बीच 623.1 MM मिमी बारिश प्रदेश में 1 जून से 30 जुलाई तक कुल 623.1 MM मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग ने 558MM के करीब बारिश का अनुमान लगाया था। यानी अनुमान से 12 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। वहीं सिर्फ जुलाई महीने की बात करें तो कुल 453.5 मिमी बारिश हुई है। पिछले 10 सालों में सिर्फ 2 बार ही जुलाई में बारिश का आंकड़ा 400MM पार हुआ है। 2023 में जुलाई माह में प्रदेश में सबसे ज्यादा 566.8MM पानी बरसा था। इससे पहले 2016 में 463.3MM पानी गिरा था जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ

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