2 दिन पूरे प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी:बंगाल में बने सिस्टम का असर,16 जिलों में अलर्ट,सारंगढ़ में कार समेत 3 बहे,तैरकर जान बचाई

पिछले 24 घंटे में पूरे प्रदेश में जोरदार बारिश हुई। रायपुर में करीब 45 मिमी पानी बरसा, जबकि सबसे ज्यादा 106.3 मिमी बारिश सारंगढ़-बिलाईगढ़ में हुई। यहां उफनते नाले को पार करने की कोशिश में कार बह गई, लेकिन तीनों सवार तैरकर जान बचाने में सफल रहे। मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल के पास बने लो प्रेशर एरिया के कारण यह बारिश हो रही है, जिसका असर दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में दिखाई दे रहा है। यह बरसात का दौर अगले दो दिन तक जारी रह सकता है। इसी बीच मौसम विभाग ने आज कांकेर, नारायणपुर और बीजापुर जिलों के लिए बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि जीपीएम, मुंगेली, बिलासपुर, कबीरधाम, बेमेतरा, राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, बालोद, कोंडागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा सहित 13 जिलों में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। सारंगढ़ में कार बही, तैरकर बचाई जान सारंगढ़ में बारिश से उफनते नाले को पार कर रही कार बह गई। हालांकि कार सवार तीन लोगों ने तैरकर जान बचा ली। तीनों बरमकेला से ओडिशा जा रहे थे। ग्रामीणों ने उन्हें नाला पार नहीं करने की सलाह दी थी। लेकिन उन्होंने नहीं मानी। नाले के ऊपर 2-3 फीट ऊपर पानी बह रहा है फिर भी लोग जान जोखिम में डालकर नाला पार कर रहे थे। ओडिशा को जोड़ने वाला बरमकेला का विक्रम नाला वर्षों से अधूरे पुल के कारण लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। तस्वीर देखिए… केलो डैम के 3 गेट खोले गए रायगढ़ में लगातार बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर हैं। बारिश से जलस्तर बढ़ने के बाद केलो डैम के 3 गेट खोल दिए गए हैं, जिससे केलो नदी का जलस्तर बढ़ गया है। बलराम में सबसे ज्यादा बारिश, बेमेतरा में सबसे कम प्रदेश में अब तक 1096.1 मिमी बारिश हुई है। बेमेतरा जिले में अब तक 495.1 मिमी पानी बरसा है, जो सामान्य से 52% कम है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, राजनांदगांव, रायगढ़ में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। जबकि बलरामपुर में 1492.4 मिमी पानी गिरा है, जो सामान्य से 53% ज्यादा है। लो प्रेशर एरिया के असर को समझिए उत्तर ओडिशा, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और गंगीय पश्चिम बंगाल के पास निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बना हुआ है। इसका असर मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ में भारी वर्षा के रूप में देखने को मिल रहा है। लो प्रेशर एरिया कैसे बनता है ओडिशा, बंगाल पर बने सिस्टम का असर नमी का प्रवाह भारी वर्षा की स्थिति ऊपरी हवा का चक्रवात (Cyclonic Circulation) पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर गति छत्तीसगढ़ पर सीधा असर जानिए क्यों गिरती है बिजली बादलों में मौजूद पानी की बूंदें और बर्फ के कण हवा से रगड़ खाते हैं, जिससे उनमें बिजली जैसा चार्ज पैदा होता है। कुछ बादलों में पॉजिटिव और कुछ में नेगेटिव चार्ज जमा हो जाता है। जब ये विपरीत चार्ज वाले बादल आपस में टकराते हैं तो बिजली बनती है। आमतौर पर यह बिजली बादलों के भीतर ही रहती है, लेकिन कभी-कभी यह इतनी तेज होती है कि धरती तक पहुंच जाती है। बिजली को धरती तक पहुंचने के लिए कंडक्टर की जरूरत होती है। पेड़, पानी, बिजली के खंभे और धातु के सामान ऐसे कंडक्टर बनते हैं। अगर कोई व्यक्ति इनके पास या संपर्क में होता है तो वह बिजली की चपेट में आ सकता है।

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